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SanatanWeb.com > Blog > गीतकाव्य > स्तोत्र > कृष्ण स्तोत्र > सन्तान गोपाल स्तोत्रम्
कृष्ण स्तोत्रस्तोत्र

सन्तान गोपाल स्तोत्रम्

Sanatani
Last updated: जनवरी 24, 2026 7:54 अपराह्न
Sanatani
Published: जनवरी 24, 2026
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सन्तान गोपाल स्तोत्रम्

सन्तान गोपाल स्तोत्रम्(Santan Gopala Stotram) हिंदू धर्म में एक पवित्र स्तोत्र है, जिसे भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप गोपाल को समर्पित किया गया है। यह स्तोत्र भगवान गोपाल की दिव्य लीलाओं, उनकी करुणा और बाल रूप के सौंदर्य का वर्णन करता है। यह स्तोत्र न केवल भक्ति की अभिव्यक्ति है, बल्कि इसे पढ़ने से मानसिक शांति, आध्यात्मिक शक्ति और भगवान का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

Contents
  • सन्तान गोपाल स्तोत्रम्
  • सन्तान गोपाल स्तोत्रम् के लाभ
  • पाठ विधि
  • सन्तान गोपाल स्तोत्रम्
  • सन्तान गोपाल स्तोत्रम् के ऊपर पूछे जाने वाले प्रश्न FAQs for Santan Gopala Stotram
    • सन्तान गोपाल स्तोत्रम् क्या है?
    • u003cstrongu003eसन्तान गोपाल स्तोत्रम् का पाठ कब और कैसे करना चाहिए?u003c/strongu003e
    • सन्तान गोपाल स्तोत्रम् के पाठ से क्या लाभ होते हैं?
    • u003cstrongu003eक्या सन्तान गोपाल स्तोत्रम् का पाठ विशेष अवसरों पर किया जाता है?u003c/strongu003e
    • क्या सन्तान गोपाल स्तोत्रम् का पाठ किसी विशेष नियम के तहत होता है?

यह स्तोत्र सरल और भावपूर्ण श्लोकों से युक्त है। इसे प्राचीन ऋषियों और भक्तों द्वारा रचित माना जाता है। इसकी रचना का उद्देश्य भगवान के प्रति गहन प्रेम और समर्पण को व्यक्त करना है।

गोपाल का अर्थ है गाएं पालने वाले भगवान, जो ब्रज के नंदलाल और यशोदा मैया के पुत्र हैं। उनका बाल रूप अत्यंत मधुर, आकर्षक और भक्तों के लिए आध्यात्मिक प्रेरणा का स्रोत है।

सन्तान गोपाल स्तोत्रम् के लाभ

सनातन गोपाल स्तोत्र का नियमित पाठ करने से अनेक लाभ मिलते हैं:

  1. मन की शुद्धि: यह स्तोत्र मन को शांत करता है और नकारात्मक विचारों को दूर करता है।
  2. आध्यात्मिक उन्नति: भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप की भक्ति से आत्मा को परम शांति मिलती है।
  3. सुख-समृद्धि: परिवार में सुख-शांति और समृद्धि आती है।
  4. संतान सुख: इस स्तोत्र का पाठ करने से नि:संतान दंपतियों को संतान का आशीर्वाद प्राप्त हो सकता है।

पाठ विधि

  • इस स्तोत्र का पाठ प्रातःकाल या संध्या के समय किया जाना चाहिए।
  • पाठ से पहले भगवान गोपाल का स्मरण करें और उन्हें पुष्प, तुलसीदल, दूध, माखन और मिश्री अर्पित करें।
  • शुद्ध मन और ध्यान के साथ श्लोकों का उच्चारण करें।
  • जन्माष्टमी: भगवान श्रीकृष्ण के जन्मदिन पर इस स्तोत्र का पाठ विशेष रूप से किया जाता है।
  • बालक रूप पूजा: जब किसी परिवार में बच्चे का जन्म होता है, तो गोपाल के बाल स्वरूप की पूजा में इस स्तोत्र का उपयोग होता है।
  • नित्य पूजा: इसे दैनिक पूजा में शामिल करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आती है।

सन्तान गोपाल स्तोत्रम्

अथ सन्तानगोपालस्तोत्रम्

ॐ गोपालाय विद्महे गोपीजन वल्लभाय धीमहि ।
तन्नो गोपालः प्रचोदयात् ॥

ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ग्लौं देवकी सुत गोविन्द वासुदेव जगत्पते
देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गतः ॥
भूर्भुवस्सुवरोम् । इति दिग्विमोकः ॥

श्रीशं कमलपत्राक्षं देवकीनन्दनं हरिम् ।
सुतसम्प्राप्तये कृष्णं नमामि मधुसूदनम् ॥ १ ॥

नमाम्यहं वासुदेवं सुतसम्प्राप्तये हरिम् ।
यशोदाङ्कगतं बालं गोपालं नन्दनन्दनम् ॥ २ ॥

अस्माकं पुत्रलाभाय गोविन्दं मुनिवन्दितम् ।
नमाम्यहं वासुदेवं देवकीनन्दनं सदा ॥ ३ ॥

गोपालं डिम्भकं वन्दे कमलापतिमच्युतम् ।
पुत्रसम्प्राप्तये कृष्णं नमामि यदुपुङ्गवम् ॥ ४ ॥

पुत्रकामेष्टि फलदं कञ्जाक्षं कमलापतिम् ।
देवकीनन्दनं वन्दे सुतसम्प्राप्तये त्वहम् (मम) ॥ ५ ॥

पद्मापते पद्मनेत्र पद्मनाभ जनार्दन ।
देहि मे तनयं श्रीश वासुदेव जगत्पते ॥ ६ ॥

यशोदाङ्कगतं बालं गोविन्दं मुनिवन्दितम् ।
अनन्त (अस्माकं) पुत्रलाभाय नमामि श्रीशमच्युतम् ॥ ७ ॥

भूतकृत्-भूतभृद्भावो भुतात्मा भूतभावनः (श्रीपते देवदेवेश दीनार्तिर्हरणाच्युत) ।
गोविन्द मे सुतं देहि नमामि त्वां जनार्दन ॥ ८ ॥

भक्तकामद गोविन्द भक्तरक्ष शुभप्रद ।
देहि मे तनयं कृष्ण रुक्मिणीवल्लभ प्रभो ॥ ९ ॥

रुक्मिणीनाथ सर्वेश देहि मे तनयं सदा ।
भक्तमन्दार पद्माक्ष त्वामहं शरणं गतः ॥ १० ॥

देवकीसुत गोविन्द वासुदेव जगत्पते ।
देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गतः ॥ ११ ॥

वासुदेव जगद्वन्द्य श्रीपते पुरुषोत्तम ।
देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गतः ॥ १२ ॥

कञ्जाक्ष कमलानाथ परकारुणिकोत्तम ।
देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गतः ॥ १३ ॥

लक्ष्मीपते पद्मनाभ मुकुन्द मुनिवन्दित ।
देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गतः ॥ १४ ॥

कार्यकारणरूपाय वासुदेवाय ते सदा ।
नमामि पुत्रलाभार्थं सुखदाय बुधाय ते ॥ १५ ॥

राजीवनेत्र श्रीराम रावणारे हरे कवे ।
तुभ्यं नमामि देवेश तनयं देहि मे हरे ॥ १६ ॥

अनन्त (अस्माकं) पुत्रलाभाय भजामि त्वां जगत्पते ।
देहि मे तनयं कृष्ण वासुदेव रमापते ॥ १७ ॥

श्रीमानिनी मानहारि (श्रीमानिनी मानचोर) गोपीवस्त्रापहारक ।
देहि मे तनयं कृष्ण वासुदेव जगत्पते ॥ १८ ॥

अस्माकं पुत्रसम्प्राप्तिं कुरुष्व यदुनन्दन ।
रमापते वासुदेव मुकुन्द मुनिवन्दित ॥ १९ ॥

वासुदेव सुतं देहि तनयं देहि माधव ।
पुत्रं मे देहि श्रीकृष्ण वत्सं देहि महाप्रभो ॥ २० ॥

डिम्भकं देहि श्रीकृष्ण आत्मजं देहि राघव ।
भक्तमन्दार मे देहि तनयं नन्दनन्दन ॥ २१ ॥

नन्दनं देहि मे कृष्ण वासुदेव जगत्पते ।
कमलानाथ गोविन्द मुकुन्द मुनिवन्दित ॥ २२ ॥

अन्यथा शरणं नास्ति त्वमेव शरणं मम ।
सुतं देहि श्रियं देहि श्रियं पुत्रं प्रदेहि मे ॥ २३ ॥

यशोदास्तन्यपानज्ञं पिबन्तं यदुनन्दनम् ।
वन्देऽहं पुत्रलाभार्थं कपिलाक्षं हरिं सदा ॥ २४ ॥

नन्दनन्दन देवेश नन्दनं देहि मे प्रभो ।
रमापते वासुदेव श्रियं पुत्रं जगत्पते ॥ २५ ॥

पुत्रं श्रियं श्रियं पुत्रं पुत्रं मे देहि माधव ।
अस्माकं दीनवाक्यं च (दीनवाक्यस्य) अवधारय श्रीपते ॥ २६ ॥

गोपाल डिम्भ गोविन्द वासुदेव रमापते ।
अस्माकं डिम्भकं देहि श्रियं देहि जगत्पते ॥ २७ ॥

मद्वाञ्छितफलं देहि देवकीनन्दनाच्युत ।
मान्द (मम) पुत्रार्थितं धन्यं कुरुष्व यदुनन्दन ॥ २८ ॥

याचेऽहं त्वां श्रियं पुत्रं देहि मे पुत्रसम्पदम् ।
भक्तचिन्तामणे राम कल्पवृक्ष महाप्रभो ॥ २९ ॥

आत्मजं नन्दनं पुत्रं कुमारं डिम्भकं सुतम् ।
अर्भकं तनयं देहि सदा मे रघुनन्दन ॥ ३० ॥

वन्दे सन्तानगोपालं माधवं भक्तकामदम् ।
अस्माकं पुत्रसम्प्राप्त्यै सदा गोविन्दमच्युतम् ॥ ३१ ॥

ओङ्कारयुक्तं गोपालं श्रीयुक्तं यदुनन्दनम् ।
क्लींयुक्तं देवकीपुत्रं नमामि यदुनायकम् ॥ ३२ ॥

वासुदेव मुकुन्देश गोविन्द माधवाच्युत ।
देहि मे तनयं कृष्ण रमानाथ महाप्रभो ॥ ३३ ॥

राजीवनेत्र गोविन्द कपिलाक्ष हरे प्रभो ।
समस्त काम्यवरद देहि मे तनयं सदा ॥ ३४ ॥

पद्मनाभ श्यामपद्म बृन्दरूप जगद्पते (अब्जपद्मनिभ पद्मवृन्दरूप जगत्पते) ।
सत्पुत्रं (वरसत्पुत्रं) देहि मे देव रमानायक (रूपनायक) माधव ॥ ३५ ॥

नन्दपाल धरापाल गोविन्द यदुनन्दन ।
देहि मे तनयं कृष्ण रुक्मिणीवल्लभ प्रभो ॥ ३६ ॥

दासमन्दार गोविन्द मुकुन्द माधवाच्युत ।
गोपाल पुण्डरीकाक्ष देहि मे तनयं श्रियम् ॥ ३७ ॥

यदुनायक पद्मेश नन्दगोपवधूसुत ।
देहि मे तनयं कृष्ण श्रीराध (श्रीधर) प्राणनायक ॥ ३८ ॥

अस्माकं वाञ्छितं देहि देहि पुत्रं रमापते ।
स्तुवदाम् (भगवन्) कृष्ण सर्वेश वासुदेव जगत्पते ॥ ३९ ॥

रमाहृदयसम्भार सत्यभामामनःप्रिय ।
देहि मे तनयं कृष्ण रुक्मिणीवल्लभ प्रभो ॥ ४० ॥

चन्द्रसूर्याक्ष गोविन्द पुण्डरीकाक्ष माधव ।
अस्माकं भाग्यसत्पुत्रं देहि देव जगत्पते ॥ ४१ ॥

कारुण्यरूप पद्माक्ष पद्मनाभ-समर्चित ।
देहि मे तनयं कृष्ण देवकीनन्दनन्दन ॥ ४२ ॥

देवकीसुत श्रीनाथ वासुदेव जगत्पते ।
समस्तकामफलद देहि मे तनयं सदा ॥ ४३ ॥

भक्तमन्दार गम्भीर शङ्कराच्युत माधव ।
देहि मे तनयं गोप-बालवत्सल रमापते (श्रीपते) ॥ ४४ ॥

श्रीपते वासुदेवेश देवकीप्रियनन्दन ।
भक्तमन्दार मे देहि तनयं जगतां प्रभो ॥ ४५ ॥

जगन्नाथ रमानाथ भूमिनाथ दयानिधे ।
वासुदेवेश सर्वेश देहि मे तनयं प्रभो ॥ ४६ ॥

श्रीनाथ कमलपत्राक्ष वासुदेव जगत्पते ।
देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गतः ॥ ४७ ॥

दासमन्दार गोविन्द भक्तचिन्तामणे प्रभो ।
देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गतः ॥ ४८ ॥

गोविन्द पुण्डरीकाक्ष रमानाथ महाप्रभो ।
देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गतः ॥ ४९ ॥

श्रीनाथ कमलपत्राक्ष गोविन्द मधुसूदन ।
सत्पुत्रफल (मत्पुत्रफल)-सिद्ध्यर्थं भजामि त्वां जनार्दन ॥ ५० ॥

स्तन्यं पिबन्तं जननीमुखाम्बुजं
विलोक्य मन्दस्मितमुज्ज्वलाङ्गम् ।
स्पृशन्तमन्यस्तनमङ्गुलीभिः
वन्दे यशोदाङ्कगतं मुकुन्दम् ॥ ५१ ॥

याचेऽहं पुत्रसन्तानं भवन्तं पद्मलोचन ।
देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गतः ॥ ५२ ॥

अस्माकं पुत्रसम्पत्ते-श्चिन्तयामि जगत्पते ।
शीघ्रं मे देहि दातव्यं भवता मुनिवन्दित ॥ ५३ ॥

वासुदेव जगन्नाथ श्रीपते पुरुषोत्तम ।
कुरु मां पुत्रदत्तं च कृष्ण देवेन्द्रपूजितः ॥ ५४ ॥

कुरु मां पुत्रदत्तं च यशोदाप्रियनन्दन ।
मह्यं च पुत्रसन्तानं दातव्यं भवता हरे ॥ ५५ ॥

वासुदेव जगन्नाथ गोविन्द देवकीसुत ।
देहि मे तनयं राम कौसल्याप्रियनन्दन ॥ ५६ ॥

पद्मपत्राक्ष गोविन्द विष्णो वामन माधव ।
देहि मे तनयं सीता-प्राणनायक राघव ॥ ५७ ॥

कञ्जाक्ष कृष्ण देवेन्द्र-मण्डित मुनिवन्दित ।
लक्ष्मणाग्रज श्रीराम देहि मे तनयं सदा ॥ ५८ ॥

देहि मे तनयं राम दशरथप्रियनन्दन ।
सीतानायक कञ्जाक्ष मुचुकुन्दवरप्रद ॥ ५९ ॥

विभीषणाय या लङ्का भवता वलीयता प्रभो (विभीषणस्यया लङ्का प्रदत्ता भवता पुरा) ।
अस्माकं तत्प्रकारेण तनयं देहि माधव ॥ ६० ॥

भवदीयपदाम्भोजे चिन्तयामि निरन्तरम् ।
देहि मे तनयं सीता-प्राणवल्लभ राघव ॥ ६१ ॥

राम मत्काम्यवरद पुत्रोत्पत्तिफलप्रद ।
देहि मे तनयं श्रीश कमलासनवन्दित ॥ ६२ ॥

राम राघव सीतेश लक्ष्मणानुज देहि मे ।
भाग्यवत्पुत्रसन्तानं दशरथात्मज श्रीपते ॥ ६३ ॥

देवकीगर्भसञ्जात यशोदाप्रियनन्दन ।
देहि मे तनयं राम कृष्ण गोपाल माधव ॥ ६४ ॥

कृष्ण माधव गोविन्द वामनाच्युत शङ्कर ।
देहि मे तनयं श्रीश गोपबालकनायक ॥ ६५ ॥

गोपबाल महाधन्य गोविन्दाच्युत माधव ।
देहि मे तनयं कृष्ण वासुदेव जगत्पते ॥ ६६ ॥

दिशतु दिशतु पुत्रं देवकीनन्दनोऽयं
दिशतु दिशतु शीघ्रं भाग्यवत्पुत्रलाभम् ।
दिशतु दिशतु श्रीशो राघवो रामचन्द्रो
दिशतु दिशतु पुत्रं वंशविस्तारहेतोः ॥ ६७ ॥

ददातु मां वासुदेवोही (दीयतां वासुदेवेन) तनयोमत्प्रियः सुतम् (सुतः) ।
कुमारो नन्दनः सीता-नायकॊ-विशदा मम (नायकेन सदा मम) ॥ ६८ ॥

राम राघव गोविन्द देवकीसुत माधव ।
देहि मे तनयं श्रीश गोपबालकनायक ॥ ६९ ॥

वंशविस्तारकं पुत्रं देहि मे मधुसूदन ।
सुतं देहि सुतं देहि त्वामहं शरणं गतः ॥ ७० ॥

ममाभीष्टसुतं देहि कंसारे माधवाच्युत ।
सुतं देहि सुतं देहि त्वामहं शरणं गतः ॥ ७१ ॥

चन्द्रार्क-कल्पपर्यन्तं तनयं देहि माधव ।
सुतं देहि सुतं देहि त्वामहं शरणं गतः ॥ ७२ ॥

विद्यावन्तं बुद्धिमन्तं श्रीमन्तं तनयं सदा ।
देहि मे तनयं कृष्ण देवकीनन्दनं सदा (देवकीनन्दन प्रभो) ॥ ७३ ॥

नमामि त्वां पद्मनेत्र सुतलाभाय कामदम् ।
मुकुन्दं पुण्डरीकाक्षं गोविन्दं मधुसूदनम् ॥ ७४ ॥

भगवन् कृष्ण गोविन्द सर्वकामफलप्रद ।
देहि मे तनयं स्वामिन् त्वामहं शरणं गतः ॥ ७५ ॥

स्वामिन् त्वं भगवन् राम कृष्ण माधव कामद ।
देहि मे तनयं नित्यं त्वामहं शरणं गतः ॥ ७६ ॥

तनयं देहि गोविन्द कञ्जाक्ष कमलापते ।
सुतं देहि सुतं देहि त्वामहं शरणं गतः ॥ ७७ ॥

पद्मापते पद्मनेत्र पद्मजनक माधव (प्रद्युम्नजनक प्रभो) ।
सुतं देहि सुतं देहि त्वामहं शरणं गतः ॥ ७८ ॥

शङ्खचक्रगदाखड्ग शार्ङ्गपाणे रमापते ।
देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गतः ॥ ७९ ॥

नारायण रमानाथ राजीवपत्रलोचन ।
सुतं मे देहि देवेश पद्मपद्मानुवन्दित ॥ ८० ॥

राम माधव गोविन्द देवकीवरनन्दन ।
रुक्मिणीनाथ सर्वेश नारदादिसुरार्चित ॥ ८१ ॥

देवकीसुत गोविन्द वासुदेव जगत्पते ।
देहि मे तनयं श्रीश गोपबालकनायक ॥ ८२ ॥

मुनिवन्दित गोविन्द रुक्मिणीवल्लभ प्रभो ।
देहि मे तनयं श्रीश (कृष्ण) गोपबालकनायक (त्वामहं शरणं गतः) ॥ ८३ ॥

गोपिका लूनपुष्पणां मकरन्द रथप्रिय (गोपिकार्जितपङ्केजमरन्दासक्तमानस)।
देहि मे तनयं श्रीश (कृष्ण) गोपबालकनायक (त्वामहं शरणं गतः )॥ ८४ ॥

र्रमा हृदय राजीव लोलमाधव कामद । (रमाहृदय पङ्केजलोल माधव कामद)
ममाभीष्टसुतं देहि त्वामहं शरणं गतः ॥ ८५ ॥

वासुदेव रमानाथ दासानां मङ्गलप्रद ।
देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गतः ॥ ८६ ॥

कल्याणप्रद गोविन्द मुरारे मुनिवन्दित ।
देहि मे तनयं श्रीश (कृष्ण) गोपबालकनायक (त्वामहं शरणं गतः) ॥ ८७ ॥

पुत्रप्रद मुकुन्देश रुक्मिणीवल्लभ प्रभो ।
देहि मे तनयं श्रीश (कृष्ण) गोपबालकनायक (त्वामहं शरणं गतः) ॥ ८८ ॥

पुण्डरीकाक्ष गोविन्द वासुदेव जगत्पते ।
देहि मे तनयं श्रीश (कृष्ण) गोपबालकनायक (त्वामहं शरणं गतः) ॥ ८९ ॥

दयानिधे वासुदेव मुकुन्द मुनिवन्दित ।
देहि मे तनयं श्रीश (कृष्ण) गोपबालकनायक (त्वामहं शरणं गतः) ॥ ९० ॥

पुत्रसम्पत्प्रदातारं गोविन्दं देवपूजितम् ।
वन्दामहे सदा कृष्णं पुत्रलाभप्रदायिनम् ॥ ९१ ॥

कारुण्यनिधये गोपीवल्लभाय मुरारये ।
नमस्ते पुत्रलाभार्थं देहि मे तनयं विभो ॥ ९२ ॥

नमस्तस्मै रमेशाय रुक्मिणीवल्लभाय ते ।
देहि मे तनयं श्रीश गोपबालकनायक ॥ ९३ ॥

नमस्ते वासुदेवाय नित्यश्रीकामुकाय च ।
पुत्रदाय च सर्पेन्द्र….शायिने रङ्गशायिने ॥ ९४ ॥

रङ्गशायिन् रमानाथ मङ्गलप्रद माधव ।
देहि मे तनयं श्रीश गोपबालकनायक ॥ ९५ ॥

दासस्य मे सुतं देहि दीनमन्दार राघव ।
सुतं देहि सुतं देहि पुत्रं देहि रमापते ॥ ९६ ॥

यशोदातनयाभीष्ट पुत्रदानरतः सदा ।
देहि मे तनयं श्रीश (कृष्ण) गोपबालकनायक (त्वामहं शरणं गतः) ॥ ९७ ॥

मदिष्टदेव गोविन्द वासुदेव जनार्दन ।
देहि मे तनयं श्रीश (कृष्ण) गोपबालकनायक (त्वामहं शरणं गतः) ॥ ९८ ॥

नीतिमान् धनवान् पुत्रो विद्यावांश्च प्रजापते ।
भगवंस्त्वत्कृपायाश्च वासुदेवेन्द्रपूजित ॥ ९९ ॥

यः पठेत् पुत्रशतकं सोऽपि सत्पुत्रवान् भवेत् ।
श्रीवासुदेवकथितं स्तोत्ररत्नं सुखाय च ॥ १०० ॥

जपकाले पठेन्नित्यं पुत्रलाभं धनं श्रियम् ।
ऐश्वर्यं राजसम्मानं सद्यो याति न संशयः ॥ १०१ ॥

सन्तान गोपाल स्तोत्रम् के ऊपर पूछे जाने वाले प्रश्न FAQs for Santan Gopala Stotram

  1. सन्तान गोपाल स्तोत्रम् क्या है?

    सन्तान गोपाल स्तोत्रम् एक पवित्र हिंदू स्तोत्र है जो भगवान श्रीकृष्ण के बाल रूप, गोपाल, की स्तुति के लिए लिखा गया है। यह स्तोत्र उनके बाल लीलाओं और दिव्य गुणों का वर्णन करता है, और इसे श्रद्धापूर्वक पाठ करने से भक्तों को आध्यात्मिक शांति और सुख की प्राप्ति होती है।

  2. u003cstrongu003eसन्तान गोपाल स्तोत्रम् का पाठ कब और कैसे करना चाहिए?u003c/strongu003e

    सन्तान गोपाल स्तोत्रम् का पाठ प्रातःकाल या संध्या के समय करना शुभ माना जाता है। इसे करने से पहले स्वच्छ होकर पूजा स्थल पर बैठें और भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति या चित्र के सामने दीप जलाकर श्रद्धा से पाठ करें। नियमित पाठ करने से मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है।

  3. सन्तान गोपाल स्तोत्रम् के पाठ से क्या लाभ होते हैं?

    सन्तान गोपाल स्तोत्रम् के पाठ से अनेक आध्यात्मिक और मानसिक लाभ होते हैं, जैसे:u003cbru003eबच्चों के स्वास्थ्य और विकास में सुधार।u003cbru003eमन में शांति और सकारात्मकता का संचार।u003cbru003eभक्ति भाव में वृद्धि और भगवान श्रीकृष्ण की कृपा प्राप्ति।u003cbru003eजीवन की समस्याओं का समाधान और मानसिक तनाव से मुक्ति।

  4. u003cstrongu003eक्या सन्तान गोपाल स्तोत्रम् का पाठ विशेष अवसरों पर किया जाता है?u003c/strongu003e

    हाँ, सन्तान गोपाल स्तोत्रम् का पाठ विशेष रूप से जन्माष्टमी, बाल गोपाल के जन्मदिन, या किसी बच्चे के जन्मोत्सव पर किया जाता है। इसके अलावा, इसे परिवार में सुख-शांति और समृद्धि के लिए किसी भी शुभ अवसर पर किया जा सकता है।

  5. क्या सन्तान गोपाल स्तोत्रम् का पाठ किसी विशेष नियम के तहत होता है?

    सन्तान गोपाल स्तोत्रम् के पाठ के लिए कोई कठोर नियम नहीं हैं, लेकिन इसे पूर्ण श्रद्धा और शुद्ध मन से करना आवश्यक है। पाठ के दौरान ध्यान भटकने से बचें और भगवान गोपाल के दिव्य स्वरूप का स्मरण करें। स्तोत्र को समझकर पढ़ना अधिक लाभकारी माना जाता है।

पद्मालय स्तोत्रम्
श्री सत्यनारायण आरती 
आर्तिहर स्तोत्रम्
शारदा दशक स्तोत्रम्
श्री महा कालभैरव कवचं
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Reading: सन्तान गोपाल स्तोत्रम्
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