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नवग्रह स्तोत्रस्तोत्र

नवग्रह शरणागति स्तोत्रम्

Sanatani
Last updated: जनवरी 26, 2026 7:43 अपराह्न
Sanatani
Published: जनवरी 26, 2026
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नवग्रह शरणागति स्तोत्रम्

नवग्रह शरणागति स्तोत्रम्(Navagraha Sharanagati Stotram) एक अत्यंत प्रभावशाली और पवित्र स्तोत्र है, जो विशेष रूप से नवग्रहों के शांति, कृपा और अनुकूलता के लिए समर्पित है। यह स्तोत्र भक्तों को जीवन में आने वाली ग्रह-सम्बंधित बाधाओं को दूर करने में मदद करता है। नवग्रहों को वैदिक ज्योतिष में महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है, और ये हमारे जीवन के विभिन्न पहलुओं को प्रभावित करते हैं, जैसे स्वास्थ्य, धन, शिक्षा, विवाह, और करियर।

Contents
  • नवग्रह शरणागति स्तोत्रम्
  • नवग्रह शरणागति स्तोत्रम्
  • नवग्रह शरणागति स्तोत्रम् का महत्व
  • नवग्रह शरणागति स्तोत्रम् पाठ का विधि-विधान
  • नवग्रह शरणागति स्तोत्रम् पर पूछे जाने वाले प्रश्न
    • नवग्रह शरणागति स्तोत्रम् क्या है?
    • नवग्रह शरणागति स्तोत्रम् का पाठ कब और कैसे करना चाहिए?
    • नवग्रह शरणागति स्तोत्रम् का पाठ करने से क्या लाभ होते हैं?
    • क्या नवग्रह शरणागति स्तोत्रम् को किसी विशेष पूजा विधि के साथ पढ़ना अनिवार्य है?
    • नवग्रह शरणागति स्तोत्रम् के रचयिता कौन हैं?

इस स्तोत्र की रचना महर्षि व्यास द्वारा की गई मानी जाती है। यह स्तोत्र नवग्रहों के प्रति भक्ति, समर्पण और शरणागति का प्रतीक है। इसमें भगवान सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु, और केतु की स्तुति की गई है।

नवग्रह शरणागति स्तोत्रम्

सहस्रनयनः सूर्यो‌ रविः खेचरनायकः|
सप्ताश्ववाहनो देवो दिनेशः शरणं मम|
तुहिनांशुः शशाङ्कश्च‌ शिवशेखरमण्डनः|
ओषधीशस्तमोहर्ता राकेशः शरणं मम|
महोग्रो महतां वन्द्यो महाभयनिवारकः|
महीसूनुर्महातेजा मङ्गलः शरणं मम|
अभीप्सितार्थदः शूरः सौम्यः सौम्यफलप्रदः|
पीतवस्त्रधरः पुण्यः सोमजः शरणं मम|
धर्मसंरक्षकः श्रेष्ठः सुधर्माधिपतिर्द्विजः|
सर्वशास्त्रविपश्चिच्च देवेज्यः शरणं मम|
समस्तदोषविच्छेदी कविकर्मविशारदः|
सर्वज्ञः करुणासिन्धु- र्दैत्येज्यः शरणं मम|
वज्रायुधधरः काकवाहनो वाञ्छितार्थदः|
क्रूरदृष्टिर्यमभ्राता रविजः शरणं मम|
सैंहिकेयोऽर्द्धकायश्च सर्पाकारः शुभङ्करः|
तमोरूपो विशालाक्ष असुरः शरणं मम|
दक्षिणाभिमुखः प्रीतः शुभो जैमिनिगोत्रजः|
शतरूपः सदाराध्यः सुकेतुः शरणं मम

नवग्रह शरणागति स्तोत्रम् का महत्व

  1. ग्रह दोषों का निवारण: कुंडली में यदि कोई ग्रह अशुभ स्थिति में हो तो इस स्तोत्र का नियमित पाठ लाभकारी होता है।
  2. सकारात्मक ऊर्जा का संचार: यह स्तोत्र मानसिक और शारीरिक ऊर्जा को बढ़ाता है।
  3. सफलता और शांति: ग्रहों की कृपा प्राप्त होने से जीवन में समृद्धि और शांति आती है।
  4. आध्यात्मिक प्रगति: यह स्तोत्र आत्मा को शुद्ध करता है और भक्ति को गहरा करता है।

नवग्रह शरणागति स्तोत्रम् पाठ का विधि-विधान

  1. सुबह स्नान के बाद साफ वस्त्र धारण करें।
  2. किसी पवित्र स्थान पर दीपक जलाकर नवग्रहों का ध्यान करें।
  3. नवग्रह शरणागति स्तोत्रम् का पाठ करें।
  4. ग्रहों से अपनी समस्याओं के समाधान के लिए प्रार्थना करें।

नवग्रह शरणागति स्तोत्रम् पर पूछे जाने वाले प्रश्न

  1. नवग्रह शरणागति स्तोत्रम् क्या है?

    नवग्रह शरणागति स्तोत्रम् एक पवित्र स्तोत्र है, जिसमें नौ ग्रहों के प्रति श्रद्धा और शरणागत भाव प्रकट किया गया है। इस स्तोत्र के माध्यम से व्यक्ति ग्रहों के कुप्रभाव को कम करने और उनकी कृपा प्राप्त करने की प्रार्थना करता है।

  2. नवग्रह शरणागति स्तोत्रम् का पाठ कब और कैसे करना चाहिए?

    नवग्रह शरणागति स्तोत्रम् का पाठ प्रातःकाल या संध्या के समय शुद्ध मन और स्थान पर करना चाहिए। इसे करने से पहले स्नान कर लें और एक शांत स्थान पर बैठकर ध्यान लगाकर पाठ करें। इसे मंगलवार, शनिवार या ग्रहों की दशा-स्थिति के अनुसार करना अधिक प्रभावी माना जाता है।

  3. नवग्रह शरणागति स्तोत्रम् का पाठ करने से क्या लाभ होते हैं?

    इस स्तोत्र का पाठ करने से व्यक्ति को ग्रहों की अशुभ दशा से मुक्ति मिलती है और जीवन में शांति, समृद्धि और सुख का अनुभव होता है। यह स्वास्थ्य, धन और रिश्तों से जुड़ी समस्याओं को हल करने में सहायक होता है।

  4. क्या नवग्रह शरणागति स्तोत्रम् को किसी विशेष पूजा विधि के साथ पढ़ना अनिवार्य है?

    नवग्रह शरणागति स्तोत्रम् को किसी विशेष पूजा विधि के बिना भी पढ़ा जा सकता है। हालांकि, यदि इसे नवग्रहों की मूर्तियों या चित्रों के सामने दीप जलाकर, चंदन और फूल अर्पित करके पढ़ा जाए, तो इसका प्रभाव अधिक होता है।

  5. नवग्रह शरणागति स्तोत्रम् के रचयिता कौन हैं?

    नवग्रह शरणागति स्तोत्रम् के रचयिता का नाम स्पष्ट रूप से ज्ञात नहीं है। यह स्तोत्र प्राचीन वैदिक और धार्मिक ग्रंथों में वर्णित है, और इसे वेदों और शास्त्रों की परंपरा से प्रेरित माना जाता है।

श्री शिवपञ्चाक्षर स्तोत्रम्‌
श्री वेङ्कटेश्वर अष्टोत्तर शत नामावलि
ललिता पंचकम् – லலிதா பஞ்சகம்
ललिता पुष्पांजलि स्तोत्रम्
लक्ष्मी विभक्ति वैभव स्तोत्रम्
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