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बुधवार, जनवरी 28, 2026

मेधा सूक्तम्

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Medha Suktam In Hindi

मेधा सूक्तम्(Medha Suktam) वेदों में एक महत्वपूर्ण सूक्त है, जो यजुर्वेद से लिया गया है। यह सूक्त मुख्यतः बुद्धि, ज्ञान, और स्मृति की प्राप्ति के लिए पाठ किया जाता है। इसे विशेष रूप से वैदिक पाठों में विद्यार्थियों और ज्ञान के साधकों द्वारा उच्चारित किया जाता है। यह सूक्त देवी मेधा (बुद्धि व प्रज्ञा की अधिष्ठात्री देवी) की स्तुति करता है और उनकी कृपा से मनुष्य को ज्ञान, विवेक, स्मरण शक्ति और चातुर्य प्राप्त होता है।

मेधा सूक्तम् का पाठ

तैत्तिरीयारण्यकम् – 4, प्रपाठकः – 10, अनुवाकः – 41-44

ॐ-यँश्छन्द॑सामृष॒भो वि॒श्वरू॑पः । छन्दो॒भ्यो-ऽध्य॒मृता᳚थ्सम्ब॒भूव॑ । स मेन्द्रो॑ मे॒धया᳚ स्पृणोतु । अ॒मृत॑स्य देव॒धार॑णो भूयासम् । शरी॑र-म्मे॒ विच॑र्​षणम् । जि॒ह्वा मे॒ मधु॑मत्तमा । कर्णा᳚भ्यां॒ भूरि॒विश्रु॑वम् । ब्रह्म॑णः को॒शो॑-ऽसि मे॒धया पि॑हितः । श्रु॒त-म्मे॑ गोपाय ॥

ॐ शान्ति॒-श्शान्ति॒-श्शान्तिः॑ ॥

ओ-म्मे॒धादे॒वी जु॒षमा॑णा न॒ आगा᳚-द्वि॒श्वाची॑ भ॒द्रा सु॑मन॒स्य मा॑ना । त्वया॒ जुष्टा॑ नु॒दमा॑ना दु॒रुक्ता᳚-न्बृ॒हद्व॑देम वि॒दथे॑ सु॒वीराः᳚ । त्वया॒ जुष्ट॑ ऋ॒षिर्भ॑वति देवि॒ त्वया॒ ब्रह्मा॑-ऽऽग॒तश्री॑रु॒त त्वया᳚ । त्वया॒ जुष्ट॑श्चि॒त्रं-विँ॑न्दते वसु॒ सा नो॑ जुषस्व॒ द्रवि॑णो न मेधे ॥

मे॒धा-म्म॒ इन्द्रो॑ ददातु मे॒धा-न्दे॒वी सर॑स्वती । मे॒धा-म्मे॑ अ॒श्विना॑वु॒भा-वाध॑त्ता॒-म्पुष्क॑रस्रजा । अ॒प्स॒रासु॑ च॒ या मे॒धा ग॑न्ध॒र्वेषु॑ च॒ यन्मनः॑ । दैवी᳚-म्मे॒धा सर॑स्वती॒ सा मा᳚-म्मे॒धा सु॒रभि॑-र्जुषता॒ग्॒ स्वाहा᳚ ॥

आमा᳚-म्मे॒धा सु॒रभि॑-र्वि॒श्वरू॑पा॒ हिर॑ण्यवर्णा॒ जग॑ती जग॒म्या । ऊर्ज॑स्वती॒ पय॑सा॒ पिन्व॑माना॒ सा मा᳚-म्मे॒धा सु॒प्रती॑का जुषन्ताम् ॥

मयि॑ मे॒धा-म्मयि॑ प्र॒जा-म्मय्य॒ग्नि-स्तेजो॑ दधातु॒,
मयि॑ मे॒धा-म्मयि॑ प्र॒जा-म्मयीन्द्र॑ इन्द्रि॒य-न्द॑धातु॒,
मयि॑ मे॒धा-म्मयि॑ प्र॒जा-म्मयि॒ सूर्यो॒ भ्राजो॑ दधातु ॥

[ॐ हं॒स॒ हं॒साय॑ वि॒द्महे॑ परमहं॒साय॑ धीमहि । तन्नो॑ हंसः प्रचो॒दया᳚त् ॥ (हंसगायत्री)]

ॐ शान्ति॒-श्शान्ति॒-श्शान्तिः॑ ॥

मेधा सूक्तम् का महत्व

  1. ज्ञान और प्रज्ञा का विकास:
    मेधा सूक्तम् बुद्धि को तेज करने और प्रज्ञा को जागृत करने का एक अद्भुत माध्यम है। इसका पाठ करने से स्मृति शक्ति प्रबल होती है और निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है।
  2. शैक्षिक सफलता के लिए:
    विद्यार्थी इस सूक्त का पाठ अपनी पढ़ाई और परीक्षा में सफलता प्राप्त करने के लिए करते हैं। यह मन को शांत करता है और ध्यान केंद्रित करने में मदद करता है।
  3. धार्मिक और आध्यात्मिक लाभ:
    यह सूक्त केवल शैक्षिक उद्देश्यों तक सीमित नहीं है; इसका पाठ धार्मिक और आध्यात्मिक उन्नति के लिए भी किया जाता है। यह आत्मिक शांति और उच्च स्तर की चेतना प्राप्त करने में सहायक होता है।
  4. संस्कारों में उपयोग:
    मेधा सूक्तम् का पाठ वैदिक संस्कारों जैसे उपनयन संस्कार, नामकरण संस्कार आदि में किया जाता है। यह बच्चों को बुद्धिमान और संस्कारी बनाने का प्रतीक है।

मेधा सूक्तम् का प्रभाव

  • मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण से:
    मेधा सूक्तम् का नियमित पाठ मानसिक तनाव को कम करता है और मस्तिष्क की क्षमता को बढ़ाता है। यह व्यक्ति के आत्मविश्वास को बढ़ाने में सहायक है।
  • आध्यात्मिक दृष्टिकोण से:
    इसे पढ़ने से साधक की आध्यात्मिक शक्ति जागृत होती है। यह पाठ साधक को ध्यान और आत्मानुभूति की दिशा में प्रेरित करता है।

मेधा सूक्तम् पाठ करने की विधि

  1. शुद्धता:
    इस सूक्त का पाठ करते समय मन, वाणी और शरीर की शुद्धता का ध्यान रखना चाहिए। पाठ से पहले स्नान करना और पवित्र स्थान पर बैठना उचित है।
  2. समर्पण भाव:
    पाठ करते समय हृदय में पूर्ण श्रद्धा और समर्पण होना चाहिए। देवी मेधा का ध्यान और प्रार्थना करने से सूक्त का प्रभाव और बढ़ जाता है।
  3. समय:
    मेधा सूक्तम् का पाठ प्रातःकाल या संध्या समय में करना अधिक फलदायक होता है। इसे नियमित रूप से करना चाहिए।

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