कृष्ण नामावली स्तोत्र
कृष्ण नामावली स्तोत्रम्(Krishna Namavali Stotram) एक महत्वपूर्ण भक्ति स्तोत्र है जो भगवान श्री कृष्ण के 108 नामों का गायन और जप करने के लिए विशेष रूप से प्रचलित है। यह स्तोत्र भगवान श्री कृष्ण के दिव्य स्वरूप को स्मरण करने और उनकी उपासना करने का एक अद्भुत तरीका है। इसे विशेष रूप से उन भक्तों द्वारा उपयोग किया जाता है जो भगवान श्री कृष्ण की आराधना में गहरे रुचि रखते हैं और उनके नामों का जप करना चाहते हैं।
कृष्ण नामावली स्तोत्र के महत्व
कृष्ण नामावली स्तोत्र का अत्यधिक धार्मिक और मानसिक महत्व है। यह स्तोत्र भगवान श्री कृष्ण के अनेक नामों को एकत्र करके उनकी महिमा का गान करता है। भगवान श्री कृष्ण का नाम लेने से व्यक्ति के पापों का नाश होता है और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह स्तोत्र भक्तों को मानसिक शांति और भक्ति की ओर प्रेरित करता है।
कृष्ण नामावली स्तोत्र
केशवं केशिमथनं वासुकेर्नोगशायिनम् ।
रासक्रीडाविलासाढ्यं कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम् ॥
नारायणं नरहरिं नारदादिभिरर्चितम् ।
तारकं भवबन्धानां कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम् ॥
माधवं मधुरावासं भूधरोद्धारकं विभुम् ।
आधारं सर्वभूतानां कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम् ॥
गोविन्दमिन्दुवदनं श्रीवन्द्यचरणाम्बुजम् ।
नवेन्दीवरसङ्काशं कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम् ॥
विष्णुमुष्णीषभूषाढ्यं जिष्णुं दानवमर्दनम् ।
तृष्णाभयप्रभेत्तारं कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम् ॥
मधुसूदनं विधिनुतं बुधमानसवासितम् ।
दधिचोरं महाभागं कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम् ॥
त्रिविक्रमं त्रिलोकेशं वृषाद्यदितिजैर्नुतम् ।
कविं पुराणपुरुषं कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम् ॥
वामनं श्रीमदाकारं कामितार्थफलप्रदम् ।
रामानुजं सामलोलं कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम् ॥
श्रीधरं श्रीधरानुतं राधेयाद्यैर्नुतं हरिम् ।
राधाविडम्बनासक्तं कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम् ॥
हृषीकेशं विषावासं भिषजं भवरोगिणाम् ।
तुषाराद्रिसुतावन्द्यं कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम् ॥
पद्मनाभं पद्मनेत्रं पद्माहृत्पद्मबम्भरम् ।
आध्मातमुरलीलोलं कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम् ॥
दामोदरं श्यामलाङ्गं सोमसूर्यविलोचनम् ।
चामीकराम्बरधरं कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम् ॥
सङ्कर्षणं वेङ्कटेशं ओङ्काराकारमव्ययम् ।
शङ्खचक्रगदापाणिं कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम् ॥
वासुदेवं व्यासनुतं भासुराभरणोज्ज्वलम् ।
दासपोषणसंसक्तं कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम् ॥
प्रद्युम्नमाम्नायमयं खद्योतनमयार्चितम् ।
वैद्यनाथं प्रपञ्चास्यं कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम् ॥
अनिरुद्धं ध्रुवनुतं शुद्धसङ्कल्पमव्ययम् ।
शुद्धब्रह्मानन्दरूपं कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम् ॥
नरोत्तमं पुराणेशं मुरदानववैरिणम् ।
करुणावरुणावासं कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम् ॥
अधोक्षजं सुधालापं बुवमानसवासिनम् ।
अधिकानुग्रहं रक्षं कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम् ॥
नारसिंह दारुणास्यं क्षीराम्बुधिनिकेतनम् ।
वीराग्रेसरमानन्दं कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम् ॥
अच्युतं कच्छपाकारमुज्ज्वलं कुण्डलोज्ज्वलम् ।
सच्चिदानन्दरूपं च कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम् ॥
जनार्दनं घनाकारं सनातनतमं विभुम् ।
विनायकपतिं नाथं कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम् ॥
उपेन्द्रमिन्द्रावरजं कवीन्द्रनुतविग्रहम् ।
कविं पुराणपुरुषं कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम् ॥
हरिं सुरासुरनुतं दुरालोकं दुरीक्षणम् ।
परेशं मुरसंहारं कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम् ॥
श्रीकृष्णं गोकुलावासं साकेतपुरवासिनम् ।
आकाशकालदिग्रूपं कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम् ॥
कृष्णस्तोत्रं चतुर्विंशमेतत् सन्नामगर्भितम् ।
यः पठेत् प्रातरुत्थाय सर्वपापैः प्रमुच्यते ॥
कृष्ण नामावली स्तोत्र का जप करने के लाभ
- पापों का नाश: कृष्ण के नाम का उच्चारण करने से सभी पापों का नाश होता है और व्यक्ति को शुद्धि प्राप्त होती है।
- मानसिक शांति: जप करने से मन की शांति बढ़ती है और चिंता, तनाव जैसी समस्याओं से छुटकारा मिलता है।
- भक्ति का विकास: यह स्तोत्र भक्ति के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करता है और व्यक्ति के अंदर श्री कृष्ण के प्रति श्रद्धा और प्रेम को बढ़ाता है।
- आध्यात्मिक उन्नति: कृष्ण के नामों का जप करने से आत्मा की उन्नति होती है और मोक्ष की प्राप्ति के द्वार खुलते हैं।
कृष्ण नामावली स्तोत्र का पूजा विधि:
- शुद्ध अवस्था में बैठें: स्तोत्र का पाठ करते समय शरीर और मन को शुद्ध करना आवश्यक है। स्वच्छ स्थान पर बैठकर पूजा शुरू करें।
- गंगाजल से आचमन करें: शुद्धता बनाए रखने के लिए गंगाजल से आचमन करें।
- प्रथम श्री कृष्ण के चित्र या मूर्ति के सामने दीपक लगाकर बैठें।
- 108 नामों का जप करें: कृष्ण नामावली स्तोत्र के 108 नामों का जप करें। यह जप एक माला में 108 दानों के माध्यम से किया जा सकता है।



