By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
SanatanWeb.comSanatanWeb.comSanatanWeb.com
Notification Show More
Font ResizerAa
  • सनातनज्ञान
    • वेद
    • उपनिषद
    • शास्त्र
      • धर्मशास्त्र
      • कामशास्त्र
      • रसायनशास्त्र
      • संगीतशास्त्र
      • ज्योतिषशास्त्र
      • अर्थशास्त्र
    • पुराण
    • उपपुराण
    • सूत्र
  • गीतकाव्य
    • अष्टकम्
    • आरती
    • स्तोत्र
    • कथाए
    • कवचम्
    • कविताये और प्राथनाए
    • गरबा
    • चालीसा
    • भजन
    • भारत माता
    • मंत्र
    • शाबर मंत्र
    • शतकम्
    • संस्कृत श्लोक अर्थ सहित
    • सूक्तम्
  • आरोग्य
    • आयुर्वेद
    • घरेलू उपचार
    • योग और योगासन
  • ज्योतिष
    • ज्योतिष उपाय
    • राशि चिन्‍ह
    • राशिफल
    • हस्तरेखा
  • त्यौहार
  • धार्मिक पुस्तके
  • प्राचीन मंदिर
  • व्यक्तिपरिचय
  • हिन्दी
    • हिन्दी
    • English
    • ગુજરાતી
Reading: कृष्ण चौराष्टकम
Share
Font ResizerAa
SanatanWeb.comSanatanWeb.com
  • सनातनज्ञान
  • गीतकाव्य
  • आरोग्य
  • ज्योतिष
  • त्यौहार
  • धार्मिक पुस्तके
  • प्राचीन मंदिर
  • व्यक्तिपरिचय
  • हिन्दी
Search
  • सनातनज्ञान
    • वेद
    • उपनिषद
    • शास्त्र
    • पुराण
    • उपपुराण
    • सूत्र
  • गीतकाव्य
    • अष्टकम्
    • आरती
    • स्तोत्र
    • कथाए
    • कवचम्
    • कविताये और प्राथनाए
    • गरबा
    • चालीसा
    • भजन
    • भारत माता
    • मंत्र
    • शाबर मंत्र
    • शतकम्
    • संस्कृत श्लोक अर्थ सहित
    • सूक्तम्
  • आरोग्य
    • आयुर्वेद
    • घरेलू उपचार
    • योग और योगासन
  • ज्योतिष
    • ज्योतिष उपाय
    • राशि चिन्‍ह
    • राशिफल
    • हस्तरेखा
  • त्यौहार
  • धार्मिक पुस्तके
  • प्राचीन मंदिर
  • व्यक्तिपरिचय
  • हिन्दी
    • हिन्दी
    • English
    • ગુજરાતી
Follow US
SanatanWeb.com > Blog > गीतकाव्य > अष्टकम् > कृष्ण चौराष्टकम
अष्टकम्कृष्ण स्तोत्र

कृष्ण चौराष्टकम

Sanatani
Last updated: जनवरी 2, 2026 7:56 अपराह्न
Sanatani
Published: जनवरी 2, 2026
Share
SHARE

Krishna Chaurashtakam In Hindi

कृष्ण चौराष्टकम संस्कृत भाषा में रचित एक प्रसिद्ध स्तोत्र है, जिसमें भगवान श्रीकृष्ण की महिमा और उनकी दिव्य लीलाओं का वर्णन किया गया है। यह स्तोत्र श्री आदि शंकराचार्य द्वारा रचित माना जाता है, हालांकि कुछ विद्वानों के अनुसार, यह किसी अन्य भक्त कवि द्वारा लिखा गया हो सकता है। इसमें आठ श्लोक (अष्टक) हैं, जो भगवान श्रीकृष्ण के रूप, गुण, और लीलाओं का वर्णन करते हुए भक्तों को उनकी भक्ति में डूबने का मार्ग प्रदान करते हैं।

Contents
  • Krishna Chaurashtakam In Hindi
  • कृष्ण चौराष्टकम की रचना
  • कृष्ण चौराष्टकम
  • कृष्ण चौराष्टकम का भावार्थ
  • कृष्ण चौराष्टकम का महत्व
  • कृष्ण चौराष्टकम का पाठ कैसे करें?
  • FAQs for Krishna Chaurashtakam
    • What is Krishna Chaurashtakam?
    • Who composed Krishna Chaurashtakam?
    • What is the significance of Krishna Chaurashtakam?
    • In what language is Krishna Chaurashtakam written?
    • How can one benefit from chanting Krishna Chaurashtakam?

कृष्ण चौराष्टकम की रचना

कृष्ण चौराष्टकम में भगवान श्रीकृष्ण की चतुराई, उनकी बाल लीलाओं और गोपियों के साथ उनके हास्यपूर्ण व्यवहार का वर्णन किया गया है। “चौर” शब्द का अर्थ चोर होता है, और इस स्तोत्र में भगवान कृष्ण को प्रेम, भक्ति, और मन की शांति को “चुराने वाले” के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

प्रमुख विशेषताएँ:

  1. भगवान कृष्ण के बालरूप का अद्भुत वर्णन।
  2. उनकी चंचलता और गोपियों के साथ उनकी लीलाओं का चित्रण।
  3. भक्तों के मन की भावनाओं को व्यक्त करते हुए भगवान को अपने करीब लाने की प्रार्थना।
  4. सरल, सुंदर और भावपूर्ण श्लोक जो हर भक्त के मन को छू लेते हैं।

कृष्ण चौराष्टकम

व्रजे प्रसिद्धं नवनीतचौरं
गोपाङ्गनानां च दुकूलचौरम् ।
अनेकजन्मार्जितपापचौरं
चौराग्रगण्यं पुरुषं नमामि ॥
श्रीराधिकाया हृदयस्य चौरं
नवाम्बुदश्यामलकान्तिचौरम् ।
पदाश्रितानां च समस्तचौरं
चौराग्रगण्यं पुरुषं नमामि ॥
अकिञ्चनीकृत्य पदाश्रितं यः
करोति भिक्षुं पथि गेहहीनम् ।
केनाप्यहो भीषणचौर ईदृग्-
दृष्टः श्रुतो वा न जगत्त्रयेऽपि ॥
यदीय नामापि हरत्यशेषं
गिरिप्रसारान् अपि पापराशीन् ।
आश्चर्यरूपो ननु चौर ईदृग्
दृष्टः श्रुतो वा न मया कदापि ॥
धनं च मानं च तथेन्द्रियाणि
प्राणांश्च हृत्वा मम सर्वमेव ।
पलायसे कुत्र धृतोऽद्य चौर
त्वं भक्तिदाम्नासि मया निरुद्धः ॥
छिनत्सि घोरं यमपाशबन्धं
भिनत्सि भीमं भवपाशबन्धम् ।
छिनत्सि सर्वस्य समस्तबन्धं
नैवात्मनो भक्तकृतं तु बन्धम् ॥
मन्मानसे तामसराशिघोरे
कारागृहे दुःखमये निबद्धः ।
लभस्व हे चौर हरे चिराय
स्वचौर्यदोषोचितमेव दण्डम् ॥
कारागृहे वस सदा हृदये मदीये
मद्भक्तिपाशदृढबन्धननिश्चलः सन् ।
त्वां कृष्ण हे प्रलयकोटिशतान्तरेऽपि
सर्वस्वचौर हृदयान् न हि मोचयामि ॥

कृष्ण चौराष्टकम का भावार्थ

कृष्ण चौराष्टकम में भगवान श्रीकृष्ण को “माखन चोर” और “मन चोर” के रूप में वर्णित किया गया है। उनके बालरूप में, वे यशोदा माता के माखन को चुराने और गोपियों के घरों में शरारत करने के लिए प्रसिद्ध हैं। इस स्तोत्र में भगवान की इन्हीं लीलाओं को ध्यान में रखते हुए कहा गया है कि कृष्ण केवल माखन ही नहीं, भक्तों के मन को भी चुराते हैं।

यह भक्तों को यह भी सिखाता है कि भगवान का स्मरण उनकी बाल लीलाओं के माध्यम से किया जा सकता है, जो सरलता और भोलापन का प्रतीक हैं। भक्त उनके इन गुणों के माध्यम से भक्ति का गहन अनुभव करते हैं।

कृष्ण चौराष्टकम का महत्व

  1. आध्यात्मिक शांति: कृष्ण चौराष्टकम का पाठ करने से मन को शांति और आनंद की अनुभूति होती है।
  2. भक्ति की प्रेरणा: यह स्तोत्र भगवान के प्रति गहरी भक्ति उत्पन्न करता है और मन में पवित्रता लाता है।
  3. सांसारिक समस्याओं से मुक्ति: कृष्ण को याद करने और उनके लीलाओं का ध्यान करने से भक्त को अपने दुखों और चिंताओं से राहत मिलती है।
  4. ध्यान का माध्यम: स्तोत्र के प्रत्येक श्लोक भगवान की लीलाओं और गुणों का ऐसा वर्णन करता है कि यह ध्यान और साधना के लिए उपयुक्त है।

कृष्ण चौराष्टकम का पाठ कैसे करें?

  1. सुबह-सुबह स्नान कर शुद्ध होकर भगवान कृष्ण की मूर्ति या तस्वीर के सामने बैठें।
  2. दीप जलाएं और शांत मन से कृष्ण चौराष्टकम का पाठ करें।
  3. पाठ के दौरान भगवान के बालरूप और उनकी लीलाओं का ध्यान करें।
  4. पाठ के अंत में भगवान से अपने जीवन में शांति और भक्ति की कामना करें।

कृष्ण चौराष्टकम हमें यह सिखाता है कि भगवान की भक्ति केवल बड़े कर्मकांडों से ही नहीं, बल्कि सरल और भावपूर्ण तरीके से भी की जा सकती है। उनकी लीलाओं को स्मरण करते हुए अपने जीवन को भक्ति और प्रेम से भरपूर बनाना ही सच्ची आराधना है।

इस स्तोत्र का पाठ हर उम्र के भक्तों के लिए उपयुक्त है, क्योंकि इसमें भगवान की लीलाओं का वर्णन इतनी सरलता और प्रेम से किया गया है कि इसे पढ़ने और सुनने मात्र से मन में आनंद और उत्साह उत्पन्न होता है।

FAQs for Krishna Chaurashtakam

  1. What is Krishna Chaurashtakam?

    Krishna Chaurashtakam is a devotional hymn consisting of eight verses dedicated to Lord Krishna. It is a Sanskrit composition that praises Krishna’s divine qualities, his leelas (divine pastimes), and his role as the supreme protector and guide of his devotees. Reciting this hymn is believed to bring spiritual peace and strengthen devotion.

  2. Who composed Krishna Chaurashtakam?

    The Krishna Chaurashtakam is traditionally attributed to Adi Shankaracharya, a revered Indian philosopher and theologian. His compositions often focus on the worship of deities, expressing profound devotion and philosophical depth.

  3. What is the significance of Krishna Chaurashtakam?

    The Krishna Chaurashtakam highlights various attributes of Lord Krishna, including his playful and loving nature, his wisdom, and his role as a savior. It serves as a tool for meditation and devotion, helping devotees connect deeply with Krishna’s divine essence. Reciting this hymn regularly is believed to dispel negativity, invoke divine blessings, and foster inner peace.

  4. In what language is Krishna Chaurashtakam written?

    Krishna Chaurashtakam is written in Sanskrit, a classical language of ancient India. Sanskrit is considered sacred and is widely used in Hindu religious texts and hymns. The verses are composed in a rhythmic and poetic manner, making them melodious and easy to recite.

  5. How can one benefit from chanting Krishna Chaurashtakam?

    Chanting Krishna Chaurashtakam with devotion and focus can provide several spiritual benefits. It helps calm the mind, enhances concentration, and instills a sense of divine connection. Additionally, it promotes a positive outlook, reduces stress, and is believed to attract the blessings and protection of Lord Krishna. Devotees often chant it during meditation or as part of their daily prayer routine.

पार्वती वल्लभ अष्टकम्
सुदर्शन अष्टकम्
गोकुल अष्टकं
जगन्नाथाष्टकम्
तोटकाष्टकम्
TAGGED:Bilvamangala Thakur StotraChaurashtakam BenefitsChaurashtakam English TranslationKrishna Chaurashtakam LyricsKrishna Chaurashtakam PDFMost Powerful Krishna MantraVraje Prasiddham Navanita Chauramकृष्ण चौराष्टकम हिंदी अर्थपुरुषोत्तम मास स्तोत्रश्री कृष्ण चौराष्टकम
Share This Article
Facebook Whatsapp Whatsapp Telegram Email Print
कोई टिप्पणी नहीं

प्रातिक्रिया दे जवाब रद्द करें

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Follow US

Find US on Social Medias
1.8kLike
PinterestPin
1.3kFollow
YoutubeSubscribe
TelegramFollow
WhatsAppFollow

Newsletter

Subscribe to our newsletter to get our newest articles instantly!

Popular News
भजनविष्णु भजन

मोहन राखु पद रजतरै

Sanatani
Sanatani
जनवरी 24, 2026
रंगनाथ अष्टकं
प्रेममुदित मनसे कहो राम राम राम
प्रज्ञा संवर्धन सरस्वती स्तोत्रम्
ताम्रपर्णी स्तोत्रम्
- Advertisement -
Ad imageAd image

Categories

About US

SanatanWeb सनातन धर्म, वेदांत और भारतीय संस्कृति का विश्वसनीय मंच है। यहाँ शास्त्रों का सार, पूजा विधि, मंत्र, आध्यात्मिक मार्गदर्शन और परंपराओं से जुड़ी प्रामाणिक जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध कराई जाती है।
सनातानवेब
  • हमारे बारे में
  • हमसे संपर्क करें
क़ानूनी
  • अस्वीकरण
  • नियम और शर्तें
  • Privacy Policy

Subscribe US

Subscribe to our newsletter to get our newest articles instantly!

© 2026 Sanatanweb.com - Proudly made with ♥︎ in india.
sanatanweb-logo Sanatanweb logo
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?