By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
SanatanWeb.comSanatanWeb.comSanatanWeb.com
Notification Show More
Font ResizerAa
  • सनातनज्ञान
    • वेद
    • उपनिषद
    • शास्त्र
      • धर्मशास्त्र
      • कामशास्त्र
      • रसायनशास्त्र
      • संगीतशास्त्र
      • ज्योतिषशास्त्र
      • अर्थशास्त्र
    • पुराण
    • उपपुराण
    • सूत्र
  • गीतकाव्य
    • अष्टकम्
    • आरती
    • स्तोत्र
    • कथाए
    • कवचम्
    • कविताये और प्राथनाए
    • गरबा
    • चालीसा
    • भजन
    • भारत माता
    • मंत्र
    • शाबर मंत्र
    • शतकम्
    • संस्कृत श्लोक अर्थ सहित
    • सूक्तम्
  • आरोग्य
    • आयुर्वेद
    • घरेलू उपचार
    • योग और योगासन
  • ज्योतिष
    • ज्योतिष उपाय
    • राशि चिन्‍ह
    • राशिफल
    • हस्तरेखा
  • त्यौहार
  • धार्मिक पुस्तके
  • प्राचीन मंदिर
  • व्यक्तिपरिचय
  • हिन्दी
    • हिन्दी
    • English
    • ગુજરાતી
Reading: श्री कृष्णाष्टकम्
Share
Font ResizerAa
SanatanWeb.comSanatanWeb.com
  • अस्वीकरण
  • नियम और शर्तें
  • Privacy Policy
Search
  • सनातनज्ञान
    • वेद
    • उपनिषद
    • शास्त्र
    • पुराण
    • उपपुराण
    • सूत्र
  • गीतकाव्य
    • अष्टकम्
    • आरती
    • स्तोत्र
    • कथाए
    • कवचम्
    • कविताये और प्राथनाए
    • गरबा
    • चालीसा
    • भजन
    • भारत माता
    • मंत्र
    • शाबर मंत्र
    • शतकम्
    • संस्कृत श्लोक अर्थ सहित
    • सूक्तम्
  • आरोग्य
    • आयुर्वेद
    • घरेलू उपचार
    • योग और योगासन
  • ज्योतिष
    • ज्योतिष उपाय
    • राशि चिन्‍ह
    • राशिफल
    • हस्तरेखा
  • त्यौहार
  • धार्मिक पुस्तके
  • प्राचीन मंदिर
  • व्यक्तिपरिचय
  • हिन्दी
    • हिन्दी
    • English
    • ગુજરાતી
Have an existing account? Sign In
Follow US
SanatanWeb.com > Blog > गीतकाव्य > अष्टकम् > श्री कृष्णाष्टकम्
अष्टकम्कृष्ण स्तोत्र

श्री कृष्णाष्टकम्

Sanatani
Last updated: जनवरी 3, 2026 5:04 अपराह्न
Sanatani
Published: जनवरी 3, 2026
Share
SHARE

श्री कृष्णाष्टकम् भगवान श्रीकृष्ण की स्तुति और उपासना के लिए एक अति लोकप्रिय और प्रभावशाली स्तोत्र है। यह आठ श्लोकों का एक संग्रह है, जिसमें भगवान श्रीकृष्ण के स्वरूप, लीलाओं और दिव्य गुणों का वर्णन किया गया है। यह स्तोत्र भक्तों के बीच भगवान श्रीकृष्ण के प्रति प्रेम और भक्ति को जाग्रत करने के लिए प्रसिद्ध है।

Contents
  • श्री कृष्णाष्टकम् का महत्व
  • श्री कृष्णाष्टकम् का रचनाकार
  • श्री कृष्णाष्टकम् का पाठ और फल
  • श्री कृष्णाष्टकम्
  • कैसे करें श्री कृष्णाष्टकम् का पाठ
  • श्री कृष्णाष्टकम् पर पूछे जाने वाले प्रश्न FAQs for Krishna Ashtakam
    • श्री कृष्णाष्टकम् क्या है?
    • श्री कृष्णाष्टकम् की रचना किसने की थी?
    • श्री कृष्णाष्टकम् का पाठ कब और कैसे करना चाहिए?
    • श्री कृष्णाष्टकम् के पाठ से क्या लाभ होते हैं?
    • क्या श्री कृष्णाष्टकम् का पाठ केवल संस्कृत में ही किया जा सकता है?

श्री कृष्णाष्टकम् का महत्व

श्री कृष्णाष्टकम् का पाठ करने से भगवान श्रीकृष्ण की कृपा प्राप्त होती है। इसे भक्तिभाव से पढ़ने वाले को भगवान के प्रेम और आशीर्वाद की अनुभूति होती है। यह स्तोत्र विशेष रूप से उन लोगों के लिए उपयुक्त है जो श्रीकृष्ण के प्रति अपनी श्रद्धा और भक्ति को व्यक्त करना चाहते हैं।

इसका पाठ करते समय भगवान की बाल लीलाओं, माखन चोरी और गोपियों के साथ की गई रासलीला का ध्यान करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। यह स्तोत्र मन को शुद्ध करता है और व्यक्ति को आध्यात्मिक शांति प्रदान करता है।

श्री कृष्णाष्टकम् का रचनाकार

श्री कृष्णाष्टकम् के रचयिता का नाम निश्चित रूप से ज्ञात नहीं है, लेकिन यह संस्कृत साहित्य में भक्ति रस की प्रमुख रचनाओं में से एक है। इसे किसी प्राचीन संत या भक्त कवि द्वारा लिखा गया माना जाता है।

श्री कृष्णाष्टकम् का पाठ और फल

श्री कृष्णाष्टकम् का पाठ प्रतिदिन सुबह और शाम किया जा सकता है। इसे श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, गोवर्धन पूजा या अन्य धार्मिक अवसरों पर पढ़ना अत्यधिक शुभ माना जाता है।

श्री कृष्णाष्टकम् के नियमित पाठ के लाभ:

  1. भगवान श्रीकृष्ण की कृपा और आशीर्वाद मिलता है।
  2. मन की शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है।
  3. जीवन में आने वाली बाधाएं और कष्ट दूर होते हैं।
  4. भक्त को भक्ति, प्रेम और समर्पण का मार्ग मिलता है।

श्री कृष्णाष्टकम्

वसुदेवसुतं देवं कंसचाणूरमर्दनम्।
देवकीपरमानन्दं कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम्।
अतसीपुष्पसङ्काशं हारनूपुरशोभितम्।
रत्नकङ्कणकेयूरं कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम्।
कुटिलालकसंयुक्तं पूर्णचन्द्रनिभाननम्।
विलसत्कुन्डलधरं कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम्।
मन्दारगन्धसंयुक्तं चारुहासं चतुर्भुजम्।
बर्हिपिञ्छावचूडाङ्गं कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम्।
उत्फुल्लपद्मपत्राक्षं नीलजीमूतसन्निभम्।
यादवानां शिरोरत्नं कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम्।
रुक्मिणीकेलिसंयुक्तं पीताम्बरसुशोभितम्।
अवाप्ततुलसीगन्धं कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम्।
गोपिकानां कुचद्वन्द्वकुङ्कुमाङ्कितवक्षसम्।
श्रीनिकेतं महेष्वासं कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम्।
श्रीवत्साङ्कं महोरस्कं वनमालाविराजितम्।
शङ्खचक्रधरं देवं कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम्।
कृष्णाष्टकमिदं पुण्यं प्रातरुत्थाय यः पठेत्।
कोटिजन्मकृतं पापं स्मरणेन विनश्यति।

कैसे करें श्री कृष्णाष्टकम् का पाठ

  1. सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें।
  2. पूजा स्थल पर भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति या चित्र के सामने दीप जलाएं।
  3. शांत चित्त से श्री कृष्णाष्टकम् का पाठ करें।
  4. पाठ के बाद भगवान से अपने मन की प्रार्थना करें।

श्री कृष्णाष्टकम् पर पूछे जाने वाले प्रश्न FAQs for Krishna Ashtakam

  1. श्री कृष्णाष्टकम् क्या है?

    u003cstrongu003eउत्तर:u003c/strongu003eu003cbru003eश्री कृष्णाष्टकम् एक प्रसिद्ध संस्कृत स्तोत्र है जो भगवान श्रीकृष्ण की महिमा का वर्णन करता है। यह आठ श्लोकों का संग्रह है जिसमें भगवान कृष्ण के दिव्य गुण, स्वरूप, और उनकी कृपा का वर्णन किया गया है। इसे भक्तिमार्गी साधक भगवान कृष्ण की आराधना के लिए गाते हैं।

  2. श्री कृष्णाष्टकम् की रचना किसने की थी?

    u003cstrongu003eउत्तर:u003c/strongu003eu003cbru003eश्री कृष्णाष्टकम् की रचना आद्य शंकराचार्य जी ने की थी। उन्होंने इसे भगवान श्रीकृष्ण की महिमा गाने और भक्तों को उनके प्रति भक्ति उत्पन्न करने के उद्देश्य से लिखा था।

  3. श्री कृष्णाष्टकम् का पाठ कब और कैसे करना चाहिए?

    u003cstrongu003eउत्तर:u003c/strongu003eu003cbru003eश्री कृष्णाष्टकम् का पाठ प्रातःकाल और संध्याकाल में किया जाना शुभ माना जाता है। इसे शांत मन से, भगवान कृष्ण की मूर्ति या चित्र के सामने, दीप जलाकर किया जा सकता है। पाठ करते समय भगवान के दिव्य स्वरूप का ध्यान करना अत्यंत फलदायी होता है।

  4. श्री कृष्णाष्टकम् के पाठ से क्या लाभ होते हैं?

    u003cstrongu003eउत्तर:u003c/strongu003eu003cbru003eश्री कृष्णाष्टकम् के पाठ से भगवान श्रीकृष्ण की कृपा प्राप्त होती है। यह मन को शांति, भक्ति, और स्थिरता प्रदान करता है। यह पाठ जीवन की कठिनाइयों से मुक्ति दिलाने, आध्यात्मिक उन्नति और भक्ति की भावना को जाग्रत करने में सहायक होता है।

  5. क्या श्री कृष्णाष्टकम् का पाठ केवल संस्कृत में ही किया जा सकता है?

    u003cstrongu003eउत्तर:u003c/strongu003eu003cbru003eश्री कृष्णाष्टकम् का मूल पाठ संस्कृत में है, लेकिन इसे हिंदी, अंग्रेजी, या अन्य भाषाओं में भी अनुवादित रूप में पढ़ा जा सकता है। भक्त की भावना और भक्ति ही मुख्य है, भाषा माध्यम मात्र है।

संकटमोचन हनुमानाष्टक
गोकुलनायक अष्टकम
बाला मुकुंद पंचक स्तोत्रम्
मुरारी स्तुति
कालभैरवाष्टकम् 
TAGGED:Hindu spiritual chantsIndian devotional poetryKrishna bhakti stotraKrishna devotional songKrishna mantraKrishna StotraKrishna worship IndiaLord Krishna hymnSanskrit versesShri Krishnashtakamकृष्ण पूजाकृष्ण मंत्रभगवान कृष्ण भजनश्री कृष्णाष्टकमश्रीकृष्ण स्तोत्रसंस्कृत स्तोत्र
Share This Article
Facebook Email Print
कोई टिप्पणी नहीं

प्रातिक्रिया दे जवाब रद्द करें

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Follow US

Find US on Social Medias
1.8kLike
PinterestPin
1.3kFollow
YoutubeSubscribe
TelegramFollow
WhatsAppFollow

Weekly Newsletter

Subscribe to our newsletter to get our newest articles instantly!
[mc4wp_form]
Popular News
आरती

सरस्वती मां की आरती

Sanatani
Sanatani
जनवरी 21, 2026
बाला मुकुंद पंचक स्तोत्रम्
ललिता पंचकम् – லலிதா பஞ்சகம்
शुद्ध सच्चिदानंद सनातन अज अक्षर आनंद
महालक्ष्मी स्तुति
- Advertisement -
Ad imageAd image

Categories

About US

SanatanWeb सनातन धर्म, वेदांत और भारतीय संस्कृति का विश्वसनीय मंच है। यहाँ शास्त्रों का सार, पूजा विधि, मंत्र, आध्यात्मिक मार्गदर्शन और परंपराओं से जुड़ी प्रामाणिक जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध कराई जाती है।
सनातानवेब
  • हमारे बारे में
  • हमसे संपर्क करें
क़ानूनी
  • अस्वीकरण
  • नियम और शर्तें
  • Privacy Policy

Subscribe US

Subscribe to our newsletter to get our newest articles instantly!

[mc4wp_form]

© 2026 Sanatanweb.com - Proudly made with ♥︎ in india.
sanatanweb-logo Sanatanweb logo
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?