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SanatanWeb.com > Blog > गीतकाव्य > कवचम् > जगन्मंगल राधा कवच
कवचम्कृष्ण स्तोत्रस्तोत्र

जगन्मंगल राधा कवच

Sanatani
Last updated: जनवरी 25, 2026 2:44 अपराह्न
Sanatani
Published: जनवरी 25, 2026
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जगन्मंगल राधा कवच

जगन्मंगल राधा कवच(Jaganmangala Radha Kavacham) एक आध्यात्मिक और धार्मिक ग्रंथ है, जिसमें भगवान श्रीकृष्ण और उनकी परमप्रिय भक्त श्री राधा रानी की महिमा का वर्णन किया गया है। इस कवच का पाठ भक्तों के जीवन में सुख-शांति, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति लाने का माध्यम माना जाता है। इसे भगवान श्रीकृष्ण के भक्तों द्वारा विशेष रूप से आदर और श्रद्धा के साथ पढ़ा और सुना जाता है।

Contents
  • जगन्मंगल राधा कवच
  • जगन्मंगल राधा कवच का महत्व
  • जगन्मंगल राधा कवच के लाभ
  • श्लोकों की संरचना
  • जगन्मंगल राधा कवच
  • जगन्मंगल राधा कवच पर पूछे जाने वाले प्रश्न FAQs for Jaganmangala Radha Kavacham
    • जगन्मंगल राधा कवच क्या है?
    • जगन्मंगल राधा कवच का पाठ कैसे करना चाहिए?
    • जगन्मंगल राधा कवच का पाठ करने के क्या लाभ हैं?
    • क्या जगन्मंगल राधा कवच को किसी विशेष दिन पर पढ़ना चाहिए?
    • जगन्मंगल राधा कवच को कौन-कौन पढ़ सकता है?

जगन्मंगल राधा कवच का महत्व

जगन्मंगल राधा कवच का उद्देश्य है, भक्तों को नकारात्मक ऊर्जा और बाधाओं से बचाना। यह कवच श्री राधा रानी की कृपा को प्राप्त करने का माध्यम है। श्री राधा रानी को प्रेम, करुणा और भक्ति का प्रतीक माना गया है। यह कवच भक्तों को उनके प्रति समर्पित होने और भगवान श्रीकृष्ण के प्रति अटूट विश्वास रखने का मार्ग दिखाता है।

इस कवच को पढ़ने के लिए भक्तों को निम्नलिखित विधि का पालन करना चाहिए:

  1. प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  2. शांत और पवित्र स्थान पर बैठें।
  3. श्री राधा रानी और श्रीकृष्ण की मूर्ति या चित्र के सामने दीप जलाएं।
  4. पूरे मनोयोग और श्रद्धा के साथ इस कवच का पाठ करें।

जगन्मंगल राधा कवच के लाभ

  1. नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा: यह कवच जीवन में आने वाली हर प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है।
  2. भक्ति और प्रेम का विकास: यह कवच भक्त के हृदय में भक्ति और प्रेम को जागृत करता है।
  3. आध्यात्मिक उन्नति: इसके नियमित पाठ से आत्मा की शुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति होती है।
  4. सुख-शांति और समृद्धि: यह कवच जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का संचार करता है।
  5. स्वास्थ्य और मन की शांति: इस कवच का पाठ मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य में भी सुधार करता है।

श्लोकों की संरचना

जगन्मंगल राधा कवच में मुख्यतः श्री राधा और श्रीकृष्ण के गुणों, उनके स्वरूप और उनकी महिमा का वर्णन किया गया है। श्लोकों की भाषा सरल और काव्यात्मक होती है, जिससे इसे पढ़ने और समझने में आसानी होती है।

जगन्मंगल राधा कवच

ॐ अस्य श्रीजगन्मङ्गलकवचस्य।
प्रजापतिर्ऋषिः। गायत्री छन्दः। स्वयं रासेश्वरी देवता।
श्रीकृष्णभक्तिसंप्राप्तौ विनियोगः।
ओं राधेति चतुर्थ्यन्तं वह्निजायान्तमेव च।
कृष्णेनोपासितो मन्त्रः कल्पवृक्षः शिरोऽवतु।
ओं ह्रीं श्रीं राधिकाङेन्तं वह्निजायान्तमेव च।
कपालं नेत्रयुग्मं च श्रोत्रयुग्मं सदाऽवतु।
ओं रां ह्रीं श्रीं राधिकेति ङेन्तं स्वाहान्तमेव च।
मस्तकं केशसङ्घांश्च मन्त्रराजः सदाऽवतु।
ओं रां राधेति चतुर्थ्यन्तं वह्निजायान्तमेव च।
सर्वसिद्धिप्रदः पातु कपोलं नासिकां मुखम्।
क्लीं श्रीं कृष्णप्रियाङेन्तं कण्ठं पातु नमोऽन्तकम्।
ओं रां रासेश्वरी ङेन्तं स्कन्धं पातु नमोऽन्तकम्।
ओं रां रासविलासिन्यै स्वाहा पृष्ठं सदाऽवतु।
वृन्दावनविलासिन्यै स्वाहा वक्षः सदाऽवतु।
तुलसीवनवासिन्यै स्वाहा पातु नितम्बकम्।
कृष्णप्राणाधिकाङेन्तं स्वाहान्तं प्रणवादिकम्।
पादयुग्मं च सर्वाङ्गं सन्ततं पातु सर्वतः।
राधा रक्षतु प्राच्यां च वह्नौ कृष्णप्रियाऽवतु।
दक्षे रासेश्वरी पातु गोपीशा नैर्ऋतेऽवतु।
पश्चिमे निर्गुणा पातु वायव्ये कृष्णपूजिता।
उत्तरे सन्ततं पातु मूलप्रकृतिरीश्वरी।
सर्वेश्वरी सदैशान्यां पातु मां सर्वपूजिता।
जले स्थले चान्तरिक्षे स्वप्ने जागरणे तथा।
महाविष्णोश्च जननी सर्वतः पातु सन्ततम्।
कवचं कथितं दुर्गे श्रीजगन्मङ्गलं परम्।
यस्मै कस्मै न दातव्यं गूढाद्गूढतरं परम्।
तव स्नेहान्मयाख्यातं प्रवक्तव्यं न कस्यचित्।
गुरुमभ्यर्च्य विधिवद् वस्त्रालङ्कारचन्दनैः।
कण्ठे वा दक्षिणे बाहौ धृत्वा विष्णुसमो भवेत्।
शतलक्षजपेनैव सिद्धं च कवचं भवेत्।
यदि स्यात् सिद्धकवचो न दग्धो वह्निना भवेत्।
एतस्मात् कवचाद् दुर्गे राजा दुर्योधनः पुरा।
विशारदो जलस्तम्भे वह्निस्तम्भे च निश्चितम्।
मया सनत्कुमाराय पुरा दत्तं च पुष्करे।
सूर्यपर्वणि मेरौ च स सान्दीपनये ददौ।
बलाय तेन दत्तं च ददौ दुर्योधनाय सः।
कवचस्य प्रसादेन जीवन्मुक्तो भवेन्नरः।

जगन्मंगल राधा कवच पर पूछे जाने वाले प्रश्न FAQs for Jaganmangala Radha Kavacham

  1. जगन्मंगल राधा कवच क्या है?

    जगन्मंगल राधा कवच एक आध्यात्मिक और धार्मिक कवच है, जो भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी की कृपा प्राप्त करने के उद्देश्य से रचा गया है। यह कवच भक्ति और आत्मिक शांति के लिए प्रयोग किया जाता है। इसमें मंत्र और श्लोक शामिल होते हैं जो सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करते हैं और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा करते हैं।

  2. जगन्मंगल राधा कवच का पाठ कैसे करना चाहिए?

    इस कवच का पाठ करने के लिए सबसे पहले स्नान करके शुद्ध हो जाना चाहिए। एक शांत और पवित्र स्थान पर बैठकर भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी का ध्यान करें। तत्पश्चात, श्रद्धा और समर्पण के साथ कवच का पाठ करें। इसे सुबह के समय करना अधिक शुभ माना जाता है।

  3. जगन्मंगल राधा कवच का पाठ करने के क्या लाभ हैं?

    इस कवच का पाठ करने से मन की शांति, सकारात्मक ऊर्जा और आत्मिक बल की प्राप्ति होती है। यह जीवन की कठिनाइयों को दूर करने में सहायता करता है और भक्त को भगवान की कृपा प्राप्त होती है। साथ ही, यह कवच नकारात्मक शक्तियों और बुरी नजर से बचाव प्रदान करता है।

  4. क्या जगन्मंगल राधा कवच को किसी विशेष दिन पर पढ़ना चाहिए?

    हालांकि, इसे किसी भी दिन पढ़ा जा सकता है, लेकिन पूर्णिमा, एकादशी, और राधाष्टमी जैसे शुभ दिनों पर इसका पाठ करना अधिक फलदायी माना जाता है। इन दिनों में भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी की पूजा का विशेष महत्व होता है।

  5. जगन्मंगल राधा कवच को कौन-कौन पढ़ सकता है?

    जगन्मंगल राधा कवच को कोई भी व्यक्ति पढ़ सकता है, चाहे वह किसी भी आयु, लिंग या जाति का हो। यह कवच सभी भक्तों के लिए खुला है, बशर्ते वे इसे श्रद्धा और भक्ति के साथ पढ़ें।

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