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SanatanWeb.com > Blog > गीतकाव्य > स्तोत्र > श्री गणेश स्तोत्र > गजानन स्तोत्र देवर्षय ऊचुः
श्री गणेश स्तोत्रस्तोत्र

गजानन स्तोत्र देवर्षय ऊचुः

Sanatani
Last updated: जनवरी 29, 2026 6:45 अपराह्न
Sanatani
Published: जनवरी 29, 2026
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गजानन स्तोत्र देवर्षय ऊचुः

गजानन स्तोत्र(Gajanan Stotra) हिंदू धर्म में भगवान गणेश की स्तुति के लिए प्रसिद्ध है। यह स्तोत्र भगवान गणेश की महिमा का वर्णन करता है और उनके प्रति श्रद्धा प्रकट करता है। गजानन का अर्थ है ‘गज (हाथी) के समान मुख वाले,’ जो कि भगवान गणेश का प्रमुख स्वरूप है। वे बुद्धि, समृद्धि, और शुभता के देवता माने जाते हैं।

Contents
  • गजानन स्तोत्र देवर्षय ऊचुः
  • गजानन स्तोत्र के लाभ:
  • गजानन स्तोत्र की रचना:
  • गजानन स्तोत्र – Gajanan Stotra

गजानन स्तोत्र का पाठ करने से भगवान गणेश का आशीर्वाद प्राप्त होता है। यह माना जाता है कि गणपति की आराधना जीवन में आने वाली हर प्रकार की बाधाओं को दूर करती है और सफलता की ओर अग्रसर करती है। ‘देवर्षय ऊचुः’ का अर्थ है कि यह स्तोत्र देवर्षियों द्वारा बोला गया है, जो कि दिव्य ऋषियों का समूह है। इस स्तोत्र के माध्यम से वे भगवान गणेश की महानता का गुणगान कर रहे हैं और उनके आशीर्वाद की प्रार्थना कर रहे हैं।

देवर्षि वे ऋषि होते हैं जिन्होंने अत्यधिक तप और साधना के बल पर दिव्य ज्ञान प्राप्त किया होता है। देवर्षियों का कार्य देवताओं और मनुष्यों के बीच सेतु का निर्माण करना होता है। ‘देवर्षय ऊचुः’ का संदर्भ यह बताता है कि यह स्तोत्र सीधे उन ऋषियों द्वारा उच्चारित हुआ, जिनका गणेशजी के प्रति अत्यधिक श्रद्धा और समर्पण था। इस प्रकार, यह स्तोत्र न केवल सामान्य जन के लिए बल्कि साधकों और ऋषियों के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

गजानन स्तोत्र के लाभ:

  1. बुद्धि और विवेक का विकास: गजानन स्तोत्र का नियमित पाठ करने से बुद्धि का विकास होता है, क्योंकि भगवान गणेश बुद्धि और विवेक के देवता हैं।
  2. विघ्नों का नाश: गणपति विघ्नहर्ता माने जाते हैं। इसलिए, यह स्तोत्र सभी प्रकार के विघ्नों और बाधाओं को दूर करने में सहायक होता है।
  3. सफलता प्राप्ति: इस स्तोत्र के नियमित जाप से कार्यों में सफलता मिलती है। खासकर विद्यार्थियों और विद्वानों के लिए यह अत्यधिक लाभकारी माना जाता है।
  4. धन-धान्य की प्राप्ति: भगवान गणेश की कृपा से जीवन में धन और धान्य की कमी नहीं रहती। समृद्धि और सुख की प्राप्ति होती है।

गजानन स्तोत्र की रचना:

इस स्तोत्र की रचना की उत्पत्ति प्राचीन काल से मानी जाती है। ऋषि-मुनियों और साधकों ने इस स्तोत्र का पालन कर भगवान गणेश की कृपा प्राप्त की। यह संस्कृत में रचित है, जो कि प्राचीन काल से ही ज्ञान और भक्ति के आदान-प्रदान का माध्यम रहा है।

यह स्तोत्र मानसिक शांति प्रदान करता है। जिन व्यक्तियों का मन अशांत रहता है, वे इसका नियमित जाप करके मानसिक स्थिरता प्राप्त कर सकते हैं। इसके साथ ही, भक्तों का विश्वास है कि यह स्तोत्र गणेशजी की कृपा से जीवन के हर क्षेत्र में सफलता और समृद्धि का द्वार खोलता है।

गजानन स्तोत्र – Gajanan Stotra

नमस्ते गजवक्त्राय गजाननसुरूपिणे ।
पराशरसुतायैव वत्सलासूनवे नमः ॥१॥

व्यासभ्रात्रे शुकस्यैव पितृव्याय नमो नमः ।
अनादिगणनाथाय स्वानन्दावासिने नमः ॥२॥

रजसा सृष्टिकर्ते ते सत्त्वतः पालकाय वै ।
तमसा सर्वसंहर्त्रे गणेशाय नमो नमः ॥३॥

सुकृतेः पुरुषस्यापि रूपिणे परमात्मने ।
बोधाकाराय वै तुभ्यं केवलाय नमो नमः ॥४॥

स्वसंवेद्याय देवाय योगाय गणपाय च ।
शान्तिरूपाय तुभ्यं वै नमस्ते ब्रह्मनायक ॥५॥

विनायकाय वीराय गजदैत्यस्य शत्रवे ।
मुनिमानसनिष्ठाय मुनीनां पालकाय च ॥६॥

देवरक्षकरायैव विघ्नेशाय नमो नमः ।
वक्रतुण्डाय धीराय चैकदन्ताय ते नमः ॥७॥

त्वयाऽयं निहतो दैत्यो गजनामा महाबलः ।
ब्रह्माण्डे मृत्यु संहीनो महाश्चर्यं कृतं विभो! ॥८॥

हते दैत्येऽधुना कृत्स्नं जगत्सन्तोषमेष्यति ।
स्वाहा-स्वधा युतं पूर्णं स्वधर्मस्थं भविष्यति ॥९॥

एवमुक्त्वा गणाधीश सर्वे देवर्षयस्ततः ।
प्रणम्य तूष्णीभावं ते सम्प्राप्ता विगतज्वराः ॥१०॥

कर्णौ सम्पीड्य गणप-चरणे शिरसो ध्वनिः ।
मधुरः प्रकृतस्तैस्तु तेन तुष्टो गजाननः ॥११॥

तानुवाच मदीया ये भक्ताः परमभाविताः ।
तैश्च नित्यं प्रकर्तव्यं भवद्भिर्नमनं यथा ॥१२॥

तेभ्योऽहं प्ररमप्रीतो दास्यामि मनसीप्सिताम् ।
एतादृशं प्रियं मे च मननं नाऽत्र संशयः ॥१३॥

एवमुक्त्वा स तान् सर्वान् सिद्धि-बुद्ध्यादि-संयुतः ।
अन्तर्दधे ततो देवा मनुयः स्वस्थलं ययुः ॥१४॥

॥इति श्रीमदान्त्ये मौद्गले द्वितीयखण्डे गजासुरवधे गजाननस्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥

श्री राम स्तोत्रम्
श्री रामरक्षास्तोत्रं पद्ममहापुराणान्तर्गतम्
नृसिंह मंगल पंचकम
अर्गला स्तोत्रम्
सरस्वती स्तव
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