दिवाकर पंचक स्तोत्रम्
दिवाकर पंचक स्तोत्रम्(Diwakara Panchaka Stotram) भगवान सूर्य की स्तुति में रचित एक दिव्य स्तोत्र है। यह स्तोत्र सूर्यदेव के प्रति भक्ति और समर्पण का उत्कृष्ट उदाहरण है। हिंदू धर्म में भगवान सूर्य को “प्रकाश का स्रोत”, “जीवनदाता”, और “स्वास्थ्य व ऊर्जा के अधिष्ठाता” के रूप में पूजा जाता है। दिवाकर पंचक स्तोत्रम् भगवान सूर्य की महिमा, शक्ति और उनके कृपापूर्ण स्वभाव को वर्णित करता है।
दिवाकर पंचक स्तोत्रम् का महत्व
- आध्यात्मिक लाभ:
- यह स्तोत्र व्यक्ति को आध्यात्मिक ऊंचाई प्रदान करता है। इसे पाठ करने से मन की शुद्धि और आत्मा की प्रबलता होती है।
- स्वास्थ्य लाभ:
- भगवान सूर्य को स्वास्थ्य और ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। इस स्तोत्र के नियमित पाठ से स्वास्थ्य में सुधार और मानसिक शांति मिलती है।
- धार्मिक दृष्टिकोण:
- भगवान सूर्य की आराधना से नवग्रह दोष दूर होते हैं। इसे पाठ करने से विशेष रूप से शनि, राहु और केतु के अशुभ प्रभावों से मुक्ति मिलती है।
- जीवन में सकारात्मकता:
- यह स्तोत्र जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है और व्यक्ति को उसकी दैनिक समस्याओं से लड़ने की शक्ति प्रदान करता है।
दिवाकर पंचक स्तोत्रम् का पाठ कब और कैसे करें?
- समय:
- सूर्योदय के समय इस स्तोत्र का पाठ करना सबसे शुभ माना जाता है। इस समय वातावरण शुद्ध और शांत रहता है।
- स्थान:
- किसी पवित्र स्थान पर या सूर्य की ओर मुख करके पाठ करना अधिक प्रभावशाली होता है।
- विधि:
- सुबह स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- सूर्य को जल अर्पित करें।
- कुश के आसन पर बैठकर शांत मन से इस स्तोत्र का पाठ करें।
- संख्या:
- इसे कम से कम 5 बार पाठ करना शुभ माना जाता है। विशेष अवसरों पर 11 बार या 21 बार पाठ करना लाभकारी हो सकता है।
दिवाकर पंचक स्तोत्रम् के लाभ
- मानसिक तनाव से मुक्ति।
- आत्मविश्वास और साहस में वृद्धि।
- समाज में मान-सम्मान की प्राप्ति।
- ग्रह दोषों से राहत।
- आध्यात्मिक उन्नति और ध्यान की शक्ति में सुधार।
दिवाकर पंचक स्तोत्रम्
अतुल्यवीर्यंमुग्रतेजसं सुरं
सुकान्तिमिन्द्रियप्रदं सुकान्तिदम्।
कृपारसैक- पूर्णमादिरूपिणं
दिवाकरं सदा भजे सुभास्वरम्।
इनं महीपतिं च नित्यसंस्तुतं
कलासुवर्णभूषणं रथस्थितम्।
अचिन्त्यमात्मरूपिणं ग्रहाश्रयं
दिवाकरं सदा भजे सुभास्वरम्।
उषोदयं वसुप्रदं सुवर्चसं
विदिक्प्रकाशकं कविं कृपाकरम्।
सुशान्तमूर्तिमूर्ध्वगं जगज्ज्वलं
दिवाकरं सदा भजे सुभास्वरम्।
ऋषिप्रपूजितं वरं वियच्चरं
परं प्रभुं सरोरुहस्य वल्लभम्।
समस्तभूमिपं च तारकापतिं
दिवाकरं सदा भजे सुभास्वरम्।
ग्रहाधिपं गुणान्वितं च निर्जरं
सुखप्रदं शुभाशयं भयापहम्।
हिरण्यगर्भमुत्तमं च भास्करं
दिवाकरं सदा भजे सुभास्वरम्।
दिवाकर पंचक स्तोत्रम् पर पूछे जाने वाले प्रश्न
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दिवाकर पंचक स्तोत्रम् क्या है?
दिवाकर पंचक स्तोत्रम् एक धार्मिक स्तोत्र है जो भगवान सूर्य को समर्पित है। यह स्तोत्र भगवान सूर्य के पंचमुख रूप को ध्यान में रखकर उनकी महिमा का वर्णन करता है। इसका पाठ श्रद्धालु अपने जीवन में स्वास्थ्य, ऊर्जा और समृद्धि के लिए करते हैं।
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दिवाकर पंचक स्तोत्रम् का पाठ करने के क्या लाभ हैं?
इस स्तोत्र के पाठ से मानसिक शांति, शारीरिक ऊर्जा और सकारात्मकता प्राप्त होती है। यह सूर्य देव की कृपा से रोगों को दूर करने, आत्मविश्वास बढ़ाने और सफलता पाने में सहायक माना जाता है।
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दिवाकर पंचक स्तोत्रम् कब और कैसे पढ़ा जाना चाहिए?
इस स्तोत्र का पाठ सूर्योदय के समय, स्नान के बाद, पूर्व दिशा की ओर मुख करके किया जाना चाहिए। इसे साफ और शुद्ध स्थान पर बैठकर पूरे ध्यान और श्रद्धा के साथ पढ़ना चाहिए।
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क्या दिवाकर पंचक स्तोत्रम् का पाठ किसी विशेष नियम का पालन करते हुए करना चाहिए?
हाँ, इस स्तोत्र का पाठ करते समय पवित्रता और शुद्धता का ध्यान रखना चाहिए। पाठ के दौरान मन को एकाग्र रखना और सूर्य देव की कृपा का ध्यान करना आवश्यक है। यदि संभव हो, तो पाठ के समय सूर्य मंत्र u0022ॐ सूर्याय नमःu0022 का जाप भी करें।
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दिवाकर पंचक स्तोत्रम् कहां से प्राप्त किया जा सकता है?
यह स्तोत्र धार्मिक पुस्तकों, मंदिरों में उपलब्ध साहित्य या ऑनलाइन स्रोतों से प्राप्त किया जा सकता है। इसके साथ ही, कई प्रामाणिक वेबसाइटों और यूट्यूब चैनलों पर भी इसका पाठ और अर्थ उपलब्ध है।



