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SanatanWeb.com > Blog > गीतकाव्य > अष्टकम् > अरुणाचल अष्टकम्
अष्टकम्शिव स्तोत्र

अरुणाचल अष्टकम्

Sanatani
Last updated: जनवरी 2, 2026 7:34 अपराह्न
Sanatani
Published: जनवरी 2, 2026
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Arunachala Ashtakam In Hindi

अरुणाचल अष्टकम् आदि शंकराचार्य द्वारा रचित एक प्रसिद्ध स्तोत्र है। यह स्तोत्र भगवान शिव के अरुणाचलेश्वर रूप को समर्पित है। अरुणाचल पर्वत, जिसे “तिरुवन्नामलाई” भी कहा जाता है, तमिलनाडु में स्थित है और इसे शिव के अग्नि स्वरूप का प्रतीक माना जाता है। अरुणाचल अष्टकम् का पाठ भगवान शिव के प्रति भक्ति, श्रद्धा और आत्मज्ञान के लिए किया जाता है।

Contents
  • Arunachala Ashtakam In Hindi
  • अरुणाचल अष्टकम् का महत्त्व
  • अरुणाचल का प्रतीकात्मक अर्थ
  • अरुणाचल अष्टकम् स्त्रोत्र की विशेषताएँ
  • अरुणाचल अष्टकम्
  • अरुणाचल अष्टकम् का पाठ करने के लाभ Arunachala Ashtakam Benifits
  • तिरुवन्नामलाई का महत्व

अरुणाचल अष्टकम् का महत्त्व

अरुणाचल अष्टकम् आत्म-ज्ञान, आध्यात्मिकता और परम सत्य की ओर ले जाने वाले गहन विचारों से भरपूर है। इसमें मानव जीवन के सार, ब्रह्मांड के रहस्य और आत्मा के परमात्मा से मिलन के विचार को विस्तार से समझाया गया है। यह अष्टकम् आठ श्लोकों का एक संग्रह है, जिसमें अरुणाचल पर्वत को अद्वितीय और दिव्य स्वरूप में वर्णित किया गया है।

अरुणाचल का प्रतीकात्मक अर्थ

अरुणाचल का शाब्दिक अर्थ है “लाल पहाड़”। यह भगवान शिव के अग्नि लिंग की कहानी से जुड़ा हुआ है, जिसमें शिव ने ब्रह्मा और विष्णु को उनके अहंकार से मुक्त करने के लिए अग्नि स्तंभ का रूप धारण किया। अरुणाचल पर्वत को भगवान शिव के रूप में पूजा जाता है, और तिरुवन्नामलाई इस धार्मिक स्थल के लिए प्रसिद्ध है।

अरुणाचल अष्टकम् स्त्रोत्र की विशेषताएँ

  1. आत्मज्ञान का मार्ग: अरुणाचल अष्टकम् आत्मा और परमात्मा के बीच के संबंध की गहराई को दर्शाता है। इसमें यह समझाया गया है कि आत्मा को स्वयं के भीतर के सत्य को पहचानना चाहिए।
  2. अद्वैत दर्शन: यह स्तोत्र शंकराचार्य के अद्वैत दर्शन को प्रतिबिंबित करता है, जिसमें बताया गया है कि आत्मा और ब्रह्म एक ही हैं।
  3. भक्ति और ज्ञान का समन्वय: यह स्तोत्र भक्ति और ज्ञान को एक साथ प्रस्तुत करता है, जिससे साधक को आत्मिक शांति और मुक्ति प्राप्त होती है।

अरुणाचल अष्टकम्

दर्शनादभ्रसदसि जननात्कमलालये ।
काश्यां तु मरणान्मुक्तिः स्मरणादरुणाचले ॥ १ ॥

करुणापूरितापाङ्गं शरणागतवत्सलम् ।
तरुणेन्दुजटामौलिं स्मरणादरुणाचलम् ॥ २ ॥

समस्तजगदाधारं सच्चिदानन्दविग्रहम् ।
सहस्ररथसोपेतं स्मरणादरुणाचलम् ॥ ३ ॥

काञ्चनप्रतिमाभासं वाञ्छितार्थफलप्रदम् ।
मां च रक्ष सुराध्यक्षं स्मरणादरुणाचलम् ॥ ४ ॥

बद्धचन्द्रजटाजूटमर्धनारीकलेबरम् ।
वर्धमानदयाम्भोधिं स्मरणादरुणाचलम् ॥ ५ ॥

काञ्चनप्रतिमाभासं सूर्यकोटिसमप्रभम् ।
बद्धव्याघ्रपुरीध्यानं स्मरणादरुणाचलम् ॥ ६ ॥

शिक्षयाखिलदेवारि भक्षितक्ष्वेलकन्धरम् ।
रक्षयाखिलभक्तानां स्मरणादरुणाचलम् ॥ ७ ॥

अष्टभूतिसमायुक्तमिष्टकामफलप्रदम् ।
शिष्टभक्तिसमायुक्तान् स्मरणादरुणाचलम् ॥ ८ ॥

विनायकसुराध्यक्षं विष्णुब्रह्मेन्द्रसेवितम् ।
विमलारुणपादाब्जं स्मरणादरुणाचलम् ॥ ९ ॥

मन्दारमल्लिकाजातिकुन्दचम्पकपङ्कजैः ।
इन्द्रादिपूजितां देवीं स्मरणादरुणाचलम् ॥ १० ॥

सम्पत्करं पार्वतीशं सूर्यचन्द्राग्निलोचनम् ।
मन्दस्मितमुखाम्भोजं स्मरणादरुणाचलम् ॥ ११ ॥

इति श्रीअरुणाचलाष्टकम् ॥

अरुणाचल अष्टकम् का पाठ करने के लाभ Arunachala Ashtakam Benifits

  1. आत्मा और परमात्मा के बीच के गहरे संबंध को समझने में सहायता।
  2. मन की शांति और ध्यान के माध्यम से आत्मिक उन्नति।
  3. भक्ति और श्रद्धा का विकास।
  4. अहंकार और सांसारिक मोह से मुक्ति।

तिरुवन्नामलाई का महत्व


तिरुवन्नामलाई, जहाँ यह अरुणाचल पर्वत स्थित है, भगवान शिव के भक्तों के लिए प्रमुख तीर्थ स्थान है। हर वर्ष कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर यहाँ “दीपम” उत्सव मनाया जाता है, जिसमें पर्वत के शिखर पर दीप जलाया जाता है। इसे शिव के अग्नि स्वरूप का प्रतीक माना जाता है।

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