27.6 C
Gujarat
शनिवार, मार्च 7, 2026

भीषण तम परिपूर्ण निशीथिनि – Bheeshan Tamapariporn Nishethini

Post Date:

भीषण तम परिपूर्ण निशीथिनि

भीषण तमपरिपूर्ण निशीथिनि, निविड निरर्गल झंझावात ।

नम घनघोर महारव पूरित, विकट, विघाती विद्युत्पात ।।

सागर-बक्ष क्षुब्ध-उल्लोलित, क्षित-क्षितिधर क्षत, कंपितगात ।

प्रलय-शिखा पावक अप्रतिहत त्रिभुवन त्रस्त, सहत अभिघात ||

कैसा यह भीषण वेश ! काँपता जगत्, न कोई शेष !

बचा, हुआ निर्भय, जिसने उस प्रियतमको पहचान लिया’ ।

धन्य वेशधारिन् ! बस, मैंने छिपे हुएको जान लिया’ ।। १ ।।

‘ विस्तृत भति दारिद्रय, रोग- पीड़ित, अपमानित दुःसहनीय ।

त्यक्त-बंधु, जग-हसित, श्रमिततनु, अमित, वेदना दुर्दमनीय ।।

एकमात्र सुत-शव निपतित संमुख प्राणोपम अति कमनीय ।

हा ! हा ! रव रत, विगत शांति-सुख, शोकसरित-गत, नहिं कथनीय ।।

नहिं सुख-स्वप्नका लेश ! निदारुण महाभयानक क्लेश !

आवृत वदन निरखकर जिसने ‘प्रियतमको पहचान लिया’ ।

धन्य बेशधारिन् ! बस, मैंने ‘छिपे हुएको जान लिया’ ।॥ २ ॥

अन्नहीन तन, मृतप्राय मन, वस्त्रामाव अनावृत देह ।

अबला अवलंबनविहीन, नित घृणा, दोषदर्शन, संदेह ।।

स्वजनहीन, अति दीन छीन, जग वैरभावयुत विगतस्नेह ।

दलित, स्खलित, पतित, निष्कासित, देश-जाति-धन-जन-सुत-गेह ।।

रह गया निपट अकेला शेष ! दिगम्बर शुष्क अस्थि अवशेष !

रुद्ररूप दर्शनकर जिसने ‘प्रियतमको पहचान लिया’ ।

रुद्ररूप धन्य वेशधारिन् ! बस, मैंने ‘छिपे हुएको जान लिया ॥ ३ ॥

Share post:

Subscribe

Popular

More like this
Related

सरस्वती मां की आरती

सरस्वती मां(Saraswati Mata Aarti) को ज्ञान, संगीत, कला और...

गोकुल अष्टकं

गोकुल अष्टकं - Shri Gokul Ashtakamश्रीमद्गोकुलसर्वस्वं श्रीमद्गोकुलमंडनम् ।श्रीमद्गोकुलदृक्तारा श्रीमद्गोकुलजीवनम्...

अष्टादश शक्तिपीठ स्तोत्रम्

अष्टादश शक्तिपीठ स्तोत्रम्अष्टादश शक्तिपीठ स्तोत्रम् एक अत्यंत पवित्र...

लक्ष्मी शरणागति स्तोत्रम्

लक्ष्मी शरणागति स्तोत्रम्लक्ष्मी शरणागति स्तोत्रम् (Lakshmi Sharanagati Stotram) एक...
error: Content is protected !!