25.9 C
Gujarat
बुधवार, मार्च 4, 2026

प्रार्थना – माया तेरी अपार

Post Date:

माया तेरी अपार

माया है तेरी अपार माया पार नहीं कोई पाता है।
राई को पर्वत पर्वत को राई देय बनाय ।
नीचे को ऊंचा ऊंचे को नीचे देय गिराय ॥
जो चाहे कर दिखलाता है । माया० ॥

नादानों को दाना करदे दाना को नादान ।
पलभर भी नहीं लगे बनादे निर्धन को धनवान ॥
इसी से नाम विधाता है । माया० ॥

बीरानों को बस्ती करदे बस्ती को बीरान ।
सुलतानों को चोर बनादे चोरों को सुलतान ॥
दनि बन्धु कहलाता है । माया० ॥

व्यापक जीव चराचर सबमें निराकार साकार ।
बिना तेरी मरजी के हरगिज पत्ता हिलेन डार ॥
तुही घट घट में पाता है । माया० ॥

Share post:

Subscribe

Popular

More like this
Related

सरस्वती मां की आरती

सरस्वती मां(Saraswati Mata Aarti) को ज्ञान, संगीत, कला और...

गोकुल अष्टकं

गोकुल अष्टकं - Shri Gokul Ashtakamश्रीमद्गोकुलसर्वस्वं श्रीमद्गोकुलमंडनम् ।श्रीमद्गोकुलदृक्तारा श्रीमद्गोकुलजीवनम्...

अष्टादश शक्तिपीठ स्तोत्रम्

अष्टादश शक्तिपीठ स्तोत्रम्अष्टादश शक्तिपीठ स्तोत्रम् एक अत्यंत पवित्र...

लक्ष्मी शरणागति स्तोत्रम्

लक्ष्मी शरणागति स्तोत्रम्लक्ष्मी शरणागति स्तोत्रम् (Lakshmi Sharanagati Stotram) एक...
error: Content is protected !!