By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
SanatanWeb.comSanatanWeb.comSanatanWeb.com
Notification Show More
Font ResizerAa
  • सनातनज्ञान
    • वेद
    • उपनिषद
    • शास्त्र
      • धर्मशास्त्र
      • कामशास्त्र
      • रसायनशास्त्र
      • संगीतशास्त्र
      • ज्योतिषशास्त्र
      • अर्थशास्त्र
    • पुराण
    • उपपुराण
    • सूत्र
  • गीतकाव्य
    • अष्टकम्
    • आरती
    • स्तोत्र
    • कथाए
    • कवचम्
    • कविताये और प्राथनाए
    • गरबा
    • चालीसा
    • भजन
    • भारत माता
    • मंत्र
    • शाबर मंत्र
    • शतकम्
    • संस्कृत श्लोक अर्थ सहित
    • सूक्तम्
  • आरोग्य
    • आयुर्वेद
    • घरेलू उपचार
    • योग और योगासन
  • ज्योतिष
    • ज्योतिष उपाय
    • राशि चिन्‍ह
    • राशिफल
    • हस्तरेखा
  • त्यौहार
  • धार्मिक पुस्तके
  • प्राचीन मंदिर
  • व्यक्तिपरिचय
  • हिन्दी
    • हिन्दी
    • English
    • ગુજરાતી
Reading: उमा अक्षरमाला स्तोत्रम्
Share
Font ResizerAa
SanatanWeb.comSanatanWeb.com
  • अस्वीकरण
  • नियम और शर्तें
  • Privacy Policy
Search
  • सनातनज्ञान
    • वेद
    • उपनिषद
    • शास्त्र
    • पुराण
    • उपपुराण
    • सूत्र
  • गीतकाव्य
    • अष्टकम्
    • आरती
    • स्तोत्र
    • कथाए
    • कवचम्
    • कविताये और प्राथनाए
    • गरबा
    • चालीसा
    • भजन
    • भारत माता
    • मंत्र
    • शाबर मंत्र
    • शतकम्
    • संस्कृत श्लोक अर्थ सहित
    • सूक्तम्
  • आरोग्य
    • आयुर्वेद
    • घरेलू उपचार
    • योग और योगासन
  • ज्योतिष
    • ज्योतिष उपाय
    • राशि चिन्‍ह
    • राशिफल
    • हस्तरेखा
  • त्यौहार
  • धार्मिक पुस्तके
  • प्राचीन मंदिर
  • व्यक्तिपरिचय
  • हिन्दी
    • हिन्दी
    • English
    • ગુજરાતી
Follow US
SanatanWeb.com > Blog > गीतकाव्य > स्तोत्र > पार्वती स्तोत्र > उमा अक्षरमाला स्तोत्रम्
पार्वती स्तोत्रस्तोत्र

उमा अक्षरमाला स्तोत्रम्

Sanatani
Last updated: जनवरी 27, 2026 4:25 अपराह्न
Sanatani
Published: जनवरी 27, 2026
Share
SHARE

उमा अक्षरमाला स्तोत्रम्

उमा अक्षरमाला स्तोत्रम् एक अत्यंत दिव्य और दुर्लभ स्तोत्र है जो देवी पार्वती (उमा) की स्तुति में रचित है। यह स्तोत्र संस्कृत वर्णमाला के क्रम (अ से क्ष तक) में प्रत्येक अक्षर से शुरू होने वाले एक-एक श्लोक से बना है, जिसमें देवी उमा की महिमा, रूप, शक्ति, करुणा और भक्तों पर उनकी कृपा का सुंदर वर्णन किया गया है।

Contents
  • उमा अक्षरमाला स्तोत्रम्
  • उमा अक्षरमाला स्तोत्रम्
  • उमा अक्षरमाला स्तोत्रम् का महत्व
  • उमा अक्षरमाला स्तोत्र के पाठ का फल

इस स्तोत्र को पारंपरिक रूप से देवी उपासना, विशेषतः शक्तिपूजा, नवरात्रि, या उमा महेश्वर व्रत के समय पढ़ा जाता है। यह स्तोत्र भक्त के ह्रदय में श्रद्धा, भक्ति और ऊर्जा का संचार करता है।

उमा अक्षरमाला स्तोत्रम्

अक्षरं वाक्पथातीतं ऋक्षराजनिभाननम्।
रक्षताद्वाम नः किञ्चिदुक्षवाहनमोहनम्।
आकाशकेशमहिषीं आकारविजितोर्वशीम्।
आशाहिनजनध्येयां आशापालार्चितां नुमः।
इन्द्रप्रभृतिगीर्वाणवन्दिताङ्घ्रिकुशेशया।
चन्द्रस्तनन्धयापीडजाया विजयतेतराम्।
ईश्वरीं सर्वभूतानां कः शिवां स्तोतुमीश्वरः।
चतुर्भिरसमेतो ना वदनैरुतबाहुभिः।
उमा नामादिमा भामा वामा श्यामा विमानमा।
विमानमान्यमाया मा भिमा रामानुमातु मा।
ऊरुं तं दक्षिणं मातुः स्मरामि निजमासनम्।
यस्मादहं परिभ्रष्टः कल्की भूभुवनं गतः।
ऋषीणां चक्षुषो ज्योतिः बाला शैलस्य चक्षुषः।
हरस्य चक्षुषः कान्ता मातोमा मम चक्षुषः।
ॠकारं वेष्टितं द्वाभ्यां नाभ्यामुभयतो दिशम्।
आकारो वा क्षमः पातुं स चन्द्रेण वतंसितः।
लृकारः शीतलापाङ्गि ककारेणेव सर्वदा।
श्लिष्ट एव त्वया गौरि मेरुधन्वा प्रयुज्यये।
लॄकारोऽम्ब त्वया बाल्ये कलभाषिणि भाषितः।
नचेदयमसन्वर्णो गृह्यते कथमागमे।
एणस्तनन्धयालोकं एकान्तालोचनामृतम्।
एकाम्रनायकदृशोर्भाग्यं विजयतेतराम्।
ऐश्वर्यं कः पुमानीष्टे गिरिजायाः प्रभाषितुम्।
चामरग्राहिणी यस्याः स्वयमम्भोजवासिनी।
ओङ्कार इव शर्वस्य ह्रीङ्कारस्तव वाचकः।
अनयोरम्बिके भेदं यो न वेद स वेद ना।
औदार्ये देवता धेनुः सौन्दर्ये मणिपुत्रिका ।
स्वयं शक्तिर्नगसुता त्रिलोकी राज्यमर्हति।
अंसयोर्विनतं सम्यगुन्नतं कुचकुम्भयोः।
अमृतं शङ्करदृशोः परं जयति दैवतम्।
अः कुण्ठित्तोऽभवद्येषु तेषु दर्शितविक्रमा।
यातुधानेषु भीमेषु पातु वो भीमभामिनी।
कमलासुतेन यत्रात् कृतानि श‍ृङ्गारतन्त्रसूत्राणि।
स्तोकान्यपि बहुलार्थान्यगजाहसितानि पान्तु त्वाम्।
खं भवती भूर्भवती पवनो भवती हुताशनो भवती।
सलिलं च देवि भवती भवतीं हित्वा न किञ्चिदपि।
गणपतये स्तनघटयोः पदकमले सप्तलोकभक्तेभ्यः।
अधरमणौ त्रिपुरजिते दधासि पीयूषमम्ब त्वम्।
घनमतिदायकवेणी वाणीपतिमुख्यदेवताविनुता।
पुररिपुपाणिगृहीती पूर्णं विदधातु मे कामम्।
ङत्वं वादस्य लिपौ मातः केनापि लिङ्गभेदेन।
त्वद्रूपता पुरारेस्तदभावे तु द्वयोरैक्यम्।
चञ्चलविशालनयना तुङ्गकुचा चञ्चरीकनीलकचा।
पञ्चमुखस्य पुरन्ध्री जगतोंऽहःसञ्चयं हरतु।
छत्रग्रहणनियोज्या दशशतनेत्रस्य भामिनी यस्याः।
तस्याश्चरणमुमाया भवातपे क्लिश्यतां छत्रम्।
जम्बुकनायकनयनज्योत्स्नेयं रङ्गशायिनो भगिनी।
अखिलानामण्डानामधिराज्ञी विजयते चण्डी।
झङ्कृतिं करोति चेन्नमत्तषट्पदावली
यन्मुखाम्बुजन्मना सुगन्धिना निमन्त्रिता।
कर्णकुन्तलभ्रमाद्भवेन नैव वार्यते
शैलशक्रपुत्रिका धुनोतु सा मम भ्रमम्।
ञमङणनाः सम्प्रोक्त्ता चपकटताख्येषु गौरि वर्गेषु।
उत्तमसंज्ञाः प्राज्ञैः नरवर्गे तु त्वदङ्घ्रिरताः।
टङ्कृतिमुखरितदिक्कं सज्यं बाणासनं करे दधती।
ध्येया माया शबरी शत्रुभयं तर्तुकामेन।
ठङ्कमपूर्वं लक्ष्म्या प्रहसन्प्रवदस्यलं तु वदनस्य।
परितो मुनिभिर्गीतः परिग्रहो धूर्जटेर्जयति।
डमरुधरो भगवानपि गायति यस्याः शुभं गुणव्रातम्।
तस्याः शिखरिसुताया नाकृतपुण्यो भवेद्वन्दी।
ढक्कादिवाद्यहस्तप्रमथसमाराधितश्रवणयुग्मा।
शुभ्रकिरणार्धमौलेः शुद्धान्तविलासिनी जयती।
णटधात्वर्थे चतुरो नाथो यस्यास्तरङ्गिणीधारी।
अगपुरुहूतसुता सा करोतु मे मानसे नटनम्।
तनुकान्तिविजितकनका तरणिः संसारधोरजलराशेः।
तरुणारुणाभचरणा तनोतु मे गिरिसुता क्षेमम्।
थस्येव यस्य नास्ति प्रारम्भो येन न द्वितीयत्वम्।
तस्य गृणन्त्यक्षरता यस्मिन्नपि तन्महो जयति।
दरहसितद्विगुणीकृतमुखकान्तिर्जयति पुरजितः कान्ता।
नयनोन्मेषविलासो यस्याः सकलानि भुवनानि।
धरणीधरस्य दुहिता धरणीधरवासिनो वधूर्दयिता।
धरणीविटस्य भगिनी धरणीमेतामुमा पातु।
नगजे पायं पायं लावण्यसुधां त्वदीयगात्रस्य।
नयनाञ्जलिना शूली बभूव मृत्युञ्जयो मन्ये।
पतिरुग्रदृष्टिरुग्रो युवराजोऽयं सदा मदोपेतः।
तव राज्ञि न करुणा चेद् भुवनस्य कथं शुभं भवतु।
फलितं ममाम्ब सुकृतं कालेनैतावता न सन्देहः।
यद् भवदीयं स्तोत्रं पवित्रमीशानि रचयामि।
बलिभिर्निपीड्यमानानबलान् पातुं गृहीतजननाय।
बलमम्ब देहि मह्यं बलिमेतत्कल्पयामि मनः।
भवदीयस्य महेश्वरि कटाक्षनाम्नो नवस्य मेधस्य।
प्रावृषमहमाशङ्के करुणां कल्याणतोयमुचः।
मतिरहितः स्तुवसि त्वं यं कञ्चन धनपिशाचिकाविष्टम्।
इष्टं च नैव लभसे पश्य जगन्मातरं स्तुत्वा।
यमिनां स्मर्तुं योग्यं निगमागमवाक्यसञ्चयैर्मृग्यम्।
मूर्तं लोचनभाग्यं पुरामरेर्जयति नीपवने।
रथचरणपाणिभगिनी दानवदमनी नमद्विपच्छमनी।
भुवनत्रयस्य जननी विन्ध्ये धरणीधरे जयति।
ललनाजनप्रकाण्डं कलनादपरास्तबालकलकण्ठम्।
पुरवैरिणः कलत्रं मुरवैरि समर्चितं भज रे।
वन्द्यमुमापदकमलं निन्द्यमिदं सङ्गकारणसदनम्।
वयसि सकलेऽप्यतीते नयसि मुधा मुग्ध किं कालम्।
शम्बरशात्रवशात्रवकलत्रपदमित्रमहमहो धन्यः।
भूमण्डले विशाले सदृशः पुरुषो मया कोऽन्यः।
षड्वदनस्य सवित्री षण्णां हन्त्री मनः सपत्रानाम्।
षड्भिर्गम्यं मार्गैर्भर्गस्य पुरन्ध्रिकास्थानम्।
सर्वत्र सङ्गमुक्तो गर्ववियुक्तः स्वतन्त्रसञ्चारः।
निर्वर्णयन् कदा वा शर्ववधूधाम विहरामि।
हरिमुखवन्दितचरणा हरिणाङ्कमदापहास्यरजीवा।
हरिणस्तनन्धयाक्षि हरिनायकवाहना जयति।
क्षत्रियान्तकारिणः प्रसूत्वमेव केवलं
नाप काऽपि यत्कला ममापि मातृतामगात्।
दुष्टलोकमारिणी नृसिंहशक्तिरूपिणी
धूर्जटेर्वधूटिका धुनोतु सा मदापदम्।

उमा अक्षरमाला स्तोत्रम् का महत्व

  1. अक्षरमाला शैली: यह स्तोत्र वर्णानुक्रम (Alphabetic Order) में है, जिससे यह एक अद्भुत काव्य-रचना बनती है।
  2. देवी-भक्ति: स्तोत्र के माध्यम से उमा (पार्वती) की कृपा प्राप्त होती है, जो भक्त के जीवन में बाधाओं को दूर करती हैं।
  3. स्मरण शक्ति व उच्चारण सुधार: संस्कृत के प्रत्येक अक्षर से आरंभ होने वाले श्लोकों के अभ्यास से उच्चारण व स्मरण शक्ति में सुधार होता है।
  4. संतान, विवाह, सुख-शांति: इसे पढ़ने से गृहस्थ सुख, विवाह में बाधा, संतान की प्राप्ति आदि में लाभ मिलता है।
  5. मंत्रात्मक प्रभाव: स्तोत्र में वर्णित हर अक्षर शक्ति का प्रतीक माना गया है, जिससे यह मंत्रोपम प्रभाव पैदा करता है।

उमा अक्षरमाला स्तोत्र के पाठ का फल

  • जो भक्त इसे श्रद्धा से पढ़ता है, उसकी सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।
  • रोग, भय, चिंता, और दुर्भाग्य समाप्त होते हैं।
  • देवी उमा की विशेष कृपा प्राप्त होती है, जिससे जीवन में आनंद और सफलता मिलती है।
ललिता पुष्पांजलि स्तोत्रम्
विष्णु पादादि केशांत वर्णन स्तोत्रं
देवी क्षमापण स्तोत्रम्
लक्ष्मी द्वादश नाम स्तोत्रम्
दुर्गा पंचक स्तोत्रम्
TAGGED:Uma Aksharamala Stotram
Share This Article
Facebook Whatsapp Whatsapp Telegram Email Print
कोई टिप्पणी नहीं

प्रातिक्रिया दे जवाब रद्द करें

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Follow US

Find US on Social Medias
1.8kLike
PinterestPin
1.3kFollow
YoutubeSubscribe
TelegramFollow
WhatsAppFollow

Newsletter

Subscribe to our newsletter to get our newest articles instantly!

Popular News
आरती

भगवान महावीर की आरती

Sanatani
Sanatani
जनवरी 20, 2026
बस गये नैनन माँहि बिहारी
नाथ थारै सरणे आयोजी
नाथ थारै सरण पड़ी दासी – Naath Thaarai Saran Padee Daase
महालक्ष्मी कवचम्
- Advertisement -
Ad imageAd image

Categories

About US

SanatanWeb सनातन धर्म, वेदांत और भारतीय संस्कृति का विश्वसनीय मंच है। यहाँ शास्त्रों का सार, पूजा विधि, मंत्र, आध्यात्मिक मार्गदर्शन और परंपराओं से जुड़ी प्रामाणिक जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध कराई जाती है।
सनातानवेब
  • हमारे बारे में
  • हमसे संपर्क करें
क़ानूनी
  • अस्वीकरण
  • नियम और शर्तें
  • Privacy Policy

Subscribe US

Subscribe to our newsletter to get our newest articles instantly!

© 2026 Sanatanweb.com - Proudly made with ♥︎ in india.
sanatanweb-logo Sanatanweb logo
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?