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भजनविष्णु भजन

स्याम तव मूरति हृदय समानी – Syam Tav Murti Hriday Samani

Sanatani
Last updated: जनवरी 24, 2026 4:42 अपराह्न
Sanatani
Published: जनवरी 24, 2026
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स्याम तव मूरति हृदय समानी – Syam Tav Murti Hriday Samani

स्याम तव मूरति हृदय समानी ।

अंग-अंग व्यापी, रग-रग राँची, रोम-रोम उरझानी ||

जित देखौं तित तू ही दीखत, दृष्टि कहा बौरानो ।

स्रवन सुनत नित ही बंसी-धुनि, देह रही लपटानी ।।

स्याम-अंग सुचि सौरभ मीठी, नासा तेहि रति मानी ।

जिभ्या सरस मनोहर मधुमय, हरि-जूठन रस-स्वानी ।।

ऊधौ कहत संदेस तिहारो, हमहिं बनावत ग्यानी ।

कहु थल जहाँ ग्यानकों राखें, कहा मसखरी ठानी ।।

निकसत नाहिं हृदयतें हमरे बैठ्यो रहत लुकानी ।

ऊषौ ! स्याम न छाड़त हमकों, करत सदा मनमानी ।।

परम गुरु राम मिलावनहार
छोड मन तू मेरा मेरा अंतमें कोई नहीं तेरा – Chhod Man Too Mera Mera Antamen Koee Nahin Tera
सुन्यो तेरो पतितपावन नाम
बन्दौं विष्णु विश्वाधार
करत नहिं क्यों प्रभुपर विस्वास – Karat Nahin Kyon Prabhupar Visvaas
TAGGED:राग जैमिनी कल्याण ( Raag Jaimini Kalyan )श्री विष्णु चरण वन्दन ( Shree Vishnu Charan Vandan )श्री विष्णु भजन ( Shree Vishnu Bhajan )
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