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Reading: श्री वेङ्कटेश्वर अष्टोत्तर शत नामावलि
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SanatanWeb.com > Blog > गीतकाव्य > स्तोत्र > श्री वेङ्कटेश्वर स्वामि स्तोत्राणि > श्री वेङ्कटेश्वर अष्टोत्तर शत नामावलि
श्री वेङ्कटेश्वर स्वामि स्तोत्राणिस्तोत्र

श्री वेङ्कटेश्वर अष्टोत्तर शत नामावलि

Sanatani
Last updated: फ़रवरी 11, 2026 6:55 अपराह्न
Sanatani
Published: फ़रवरी 11, 2026
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श्री वेङ्कटेश्वर अष्टोत्तर शत नामावलि

श्री वेङ्कटेश्वर अष्टोत्तर शतनामावलि (Sri Venkateshwara Ashtottara Shatanamavali) भगवान विष्णु के श्री वेंकटेश्वर स्वरूप के 108 पवित्र नामों की श्रृंखला है। यह नामावली विशेष रूप से तिरुपति बालाजी के भक्तों के बीच अत्यंत लोकप्रिय है और इसे नित्य पाठ करने से भक्त को आध्यात्मिक शांति, सुख-समृद्धि, मोक्ष एवं भगवान वेंकटेश्वर की कृपा प्राप्त होती है।

Contents
  • श्री वेङ्कटेश्वर अष्टोत्तर शत नामावलि
  • श्री वेङ्कटेश्वर अष्टोत्तर शतनामावलि का महत्व
  • Sri Venkateshwara Ashtottara Shatanamavali
  • इस नामावली का पाठ करने की विधि

श्री वेङ्कटेश्वर अष्टोत्तर शतनामावलि का महत्व

  1. आध्यात्मिक उन्नति – इस नामावली का नित्य जाप करने से मन को शांति मिलती है और भक्त आध्यात्मिक रूप से उन्नत होता है।
  2. मनोकामना पूर्ति – ऐसा माना जाता है कि जो भी श्रद्धालु इस नामावली का भक्तिपूर्वक जाप करता है, उसकी समस्त इच्छाएँ पूर्ण होती हैं।
  3. सकारात्मक ऊर्जा – इस नामावली के उच्चारण से वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और नकारात्मक शक्तियाँ दूर होती हैं।
  4. कर्मों का शुद्धिकरण – भगवान वेंकटेश्वर के 108 नामों के जाप से पापों का नाश होता है और व्यक्ति को सद्गति प्राप्त होती है।
  5. मोक्ष प्राप्ति – विष्णु भक्तों के लिए इस नामावली का जाप मोक्ष प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करता है।

Sri Venkateshwara Ashtottara Shatanamavali

ॐ श्री वेङ्कटेशाय नमः
ॐ श्रीनिवासाय नमः
ॐ लक्ष्मीपतये नमः
ॐ अनामयाय नमः
ॐ अमृताशाय नमः
ॐ जगद्वन्द्याय नमः
ॐ गोविन्दाय नमः
ॐ शाश्वताय नमः
ॐ प्रभवे नमः
ॐ शेषाद्रिनिलयाय नमः

ॐ देवाय नमः
ॐ केशवाय नमः
ॐ मधुसूदनाय नमः
ॐ अमृताय नमः
ॐ माधवाय नमः
ॐ कृष्णाय नमः
ॐ श्रीहरये नमः
ॐ ज्ञानपञ्जराय नमः
ॐ श्रीवत्सवक्षसे नमः
ॐ सर्वेशाय नमः

ॐ गोपालाय नमः
ॐ पुरुषोत्तमाय नमः
ॐ गोपीश्वराय नमः
ॐ परस्मै ज्योतिषे नमः
ॐ व्तॆकुण्ठ पतये नमः
ॐ अव्ययाय नमः
ॐ सुधातनवे नमः
ॐ यादवेन्द्राय नमः
ॐ नित्य यौवनरूपवते नमः
ॐ चतुर्वेदात्मकाय नमः

ॐ विष्णवे नमः
ॐ अच्युताय नमः
ॐ पद्मिनीप्रियाय नमः
ॐ धरापतये नमः
ॐ सुरपतये नमः
ॐ निर्मलाय नमः
ॐ देवपूजिताय नमः
ॐ चतुर्भुजाय नमः
ॐ चक्रधराय नमः
ॐ त्रिधाम्ने नमः

ॐ त्रिगुणाश्रयाय नमः
ॐ निर्विकल्पाय नमः
ॐ निष्कलङ्काय नमः
ॐ निरान्तकाय नमः
ॐ निरञ्जनाय नमः
ॐ विराभासाय नमः
ॐ नित्यतृप्ताय नमः
ॐ निर्गुणाय नमः
ॐ निरुपद्रवाय नमः
ॐ गदाधराय नमः

ॐ शार्-ङ्गपाणये नमः
ॐ नन्दकिने नमः
ॐ शङ्खधारकाय नमः
ॐ अनेकमूर्तये नमः
ॐ अव्यक्ताय नमः
ॐ कटिहस्ताय नमः
ॐ वरप्रदाय नमः
ॐ अनेकात्मने नमः
ॐ दीनबन्धवे नमः
ॐ आर्तलोकाभयप्रदाय नमः

ॐ आकाशराजवरदाय नमः
ॐ योगिहृत्पद्ममन्दिराय नमः
ॐ दामोदराय नमः
ॐ जगत्पालाय नमः
ॐ पापघ्नाय नमः
ॐ भक्तवत्सलाय नमः
ॐ त्रिविक्रमाय नमः
ॐ शिंशुमाराय नमः
ॐ जटामकुट शोभिताय नमः
ॐ शङ्खमद्योल्लस-न्मञ्जुकिङ्किण्याढ्यकरण्डकाय नमः

ॐ नीलमोघश्याम तनवे नमः
ॐ बिल्वपत्रार्चन प्रियाय नमः
ॐ जगद्व्यापिने नमः
ॐ जगत्कर्त्रे नमः
ॐ जगत्साक्षिणे नमः
ॐ जगत्पतये नमः
ॐ चिन्तितार्थप्रदाय नमः
ॐ जिष्णवे नमः
ॐ दाशार्हाय नमः
ॐ दशरूपवते नमः

ॐ देवकी नन्दनाय नमः
ॐ शौरये नमः
ॐ हयग्रीवाय नमः
ॐ जनार्दनाय नमः
ॐ कन्याश्रवणतारेज्याय नमः
ॐ पीताम्बरधराय नमः
ॐ अनघाय नमः
ॐ वनमालिने नमः
ॐ पद्मनाभाय नमः
ॐ मृगयासक्त मानसाय नमः

ॐ अश्वारूढाय नमः
ॐ खड्गधारिणे नमः
ॐ धनार्जन समुत्सुकाय नमः
ॐ घनसार लसन्मध्यकस्तूरी तिलकोज्ज्वलाय नमः
ॐ सच्चितानन्दरूपाय नमः
ॐ जगन्मङ्गल दायकाय नमः
ॐ यज्ञरूपाय नमः
ॐ यज्ञभोक्त्रे नमः
ॐ चिन्मयाय नमः
ॐ परमेश्वराय नमः

ॐ परमार्थप्रदायकाय नमः
ॐ शान्ताय नमः
ॐ श्रीमते नमः
ॐ दोर्दण्ड विक्रमाय नमः
ॐ परात्पराय नमः
ॐ परस्मै ब्रह्मणे नमः
ॐ श्रीविभवे नमः
ॐ जगदीश्वराय नमः (108)

इति श्रीवेङ्कटेश्वराष्टोत्तर शतनामावलिः सम्पूर्णः

इस नामावली का पाठ करने की विधि

  • प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • भगवान वेंकटेश्वर के चित्र अथवा मूर्ति के सामने दीप जलाकर पुष्प अर्पित करें।
  • श्री वेङ्कटेश्वर अष्टोत्तर शतनामावलिः का श्रद्धापूर्वक उच्चारण करें।
  • अंत में भगवान वेंकटेश्वर से प्रार्थना कर प्रसाद वितरण करें।

श्री वेङ्कटेश्वर अष्टोत्तर शतनामावलिः का जाप करने से भक्त को भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है। यह नामावली सांसारिक दुखों से मुक्ति दिलाकर आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करती है। तिरुपति बालाजी के भक्त इस नामावली का विशेष रूप से जाप करते हैं जिससे उनके जीवन में सुख-समृद्धि आती है।

सूर्य आरती
गणेशमन्त्र स्तोत्रम्
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कालभैरवाष्टकम्
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