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आरती

गिरिराज जी की आरती

Sanatani
Last updated: मार्च 21, 2026 6:55 अपराह्न
Sanatani
Published: मार्च 21, 2026
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गिरिराज जी की आरती

ॐ जय जय जय गिरिराज, स्वामी जय जय जय गिरिराज।
संकट में तुम राखौ, निज भक्तन की लाज ॥ ॐ जय ॥

इन्द्रादिक सब सुर मिल तुम्हरौं ध्यान धरें।
रिषि मुनिजन यश गावें, ते भवसिन्धु तरें ॥ ॐ जय ॥

सुन्दर रूप तुम्हारौ श्याम सिला सोहें।
वन उपवन लखि-लखि के भक्तन मन मोहें ॥ ॐ जय ॥

मध्य मानसी गङ्गा कलि के मल तापै दीप जलावें।
उत्तरें हरनी वैतरनी ॥ ॐ जय ॥

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नवल अप्सरा कुण्ड सुहावन-पावन सुखकारी।
बायें राधा-कुण्ड नहावें महा पापहारी ॥ ॐ जय ॥

तुम्ही मुक्ति के दाता कलियुग के स्वामी।
दीनन के हो रक्षक प्रभु अन्तरयामी ॥ ॐ जय ॥

हम हैं शरण तुम्हारी, गिरिवर गिरधारी।
देवकीनंदन कृपा करो, हे भक्तन हितकारी ॥ ॐ जय ॥

जो नर दे परिकम्मा पूजन पाठ करें।
गावें नित्य आरती पुनि नहिं जनम धरें ॥ ॐ जय ॥

 

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