श्री राणीसती की आरती
श्री राणीसती की आरती राजस्थान और भारत के कई हिस्सों में बड़े श्रद्धा और भक्ति के साथ गाई जाती है। श्री राणीसती देवी को शक्ति और साहस की प्रतीक माना जाता है, और उनकी पूजा में आरती का विशेष महत्व है। आरती उस समय गाई जाती है जब भक्त देवी की स्तुति करते हुए उन्हें दीपक दिखाते हैं, यह एक बहुत ही शुभ और भक्तिपूर्ण कार्य होता है।
श्री राणीसती की कथा
राणीसती, जिन्हें नारायणी देवी के नाम से भी जाना जाता है, भारतीय इतिहास में सती प्रथा से जुड़ी एक महत्वपूर्ण देवी हैं। उनकी कथा के अनुसार, नारायणी देवी ने अपने पति के निधन के बाद सती हो जाने का संकल्प लिया था। उनके अद्वितीय साहस और भक्ति के कारण उन्हें देवी का दर्जा प्राप्त हुआ, और उनकी पूजा खासकर मारवाड़ी और राजस्थान की जनजातियों में विशेष रूप से की जाती है।
श्री राणीसती की आरती का महत्व: Importance of Shri Ranisati Aarti:
आरती भगवान या देवी की पूजा का अंतिम और सबसे शुभ अंग माना जाता है। इसमें भक्त दीपक जलाकर देवी की स्तुति करते हैं और उन्हें अपनी श्रद्धा और भक्ति अर्पित करते हैं। आरती के समय भजन, शंख, घंटियां और ढोलक बजाए जाते हैं, जिससे वातावरण पूरी तरह से भक्तिमय हो जाता है।
श्री राणीसती की आरती पूजा के अंतिम चरण में की जाती है। यह दीपक जलाकर देवी की प्रतिमा या फोटो के सामने घुमाते हुए की जाती है। आरती के समय शंख, घंटियां और शास्त्रीय संगीत वाद्ययंत्र बजाए जाते हैं, जो वातावरण को पवित्र और भक्तिपूर्ण बनाते हैं।
- दीपक प्रज्वलित करना: आरती के समय पंचमुखी दीपक या एकल दीपक का प्रयोग होता है। इसे घी या तेल से जलाया जाता है।
- फूल चढ़ाना: आरती के साथ-साथ देवी को फूल चढ़ाए जाते हैं।
- शंख बजाना: शंख बजाने से पूजा स्थल की ऊर्जा सकारात्मक होती है।
- घंटियां बजाना: आरती के समय भक्त घंटियां बजाकर देवी की स्तुति करते हैं।
- प्रसाद वितरण: आरती समाप्त होने के बाद प्रसाद का वितरण होता है, जिसे सभी भक्त ग्रहण करते हैं।
आरती के दौरान सावधानियाँ:
- आरती करते समय ध्यान और एकाग्रता जरूरी है।
- सफाई और शुद्धता का विशेष ध्यान रखा जाता है।
- आरती के समय मोबाइल या अन्य विचलित करने वाली चीजों से दूर रहना चाहिए।
राणीसती मंदिर झुंझुनू, राजस्थान में स्थित है। यह मंदिर राणीसती की भक्ति का प्रमुख केंद्र है, और यहाँ हर साल हजारों भक्त दर्शन करने आते हैं। मंदिर में प्रतिदिन सुबह और शाम आरती होती है, जिसमें बड़ी संख्या में भक्त शामिल होते हैं।
श्री राणीसती की आरती
जय श्री राणी सती मैया, जय जगदम्ब सती जी।
अपने भक्तजनों की दूर करो विपती ॥ जय.
अपनि अनन्तर ज्योति अखण्डित मंडित चहुँककुंभा।
दुरजन दलन खडग की, विद्युतसम प्रतिभा ॥ जय.
मरकत मणि मन्दिर अति मंजुल, शोभा लखि न बड़े ।
ललित ध्वजा चहुँ ओर, कंचन कलश धरे ॥ जय.
घण्टा घनन घड़ावल बाजत, शंख मृदंग घुरे।
किन्नर गायन करते, वेद ध्वनि उचरे ॥ जय.
संप्त मातृका करें आरती, सुरगम ध्यान धरे ।
विविध प्रकार के व्यंजन, श्री फल भेंट धरे ॥ जय.
संकट विकट विदारणी, नाशनी हो कुमति।
सेवक जन हृदय पटले, मृदुल करन सुमति ॥ जय.
अमल कमल दल लोचनी, मोचनी त्रय तापा।
दास आयो शरण आपकी, लाज रखो माता ॥ जय.
श्री राणीसती मैयाजी की आरती, जो कोई नर गावे।
सदनसिद्धि नवनिधि, मनवांछित फल पावे ॥ जय.

