By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
SanatanWeb.comSanatanWeb.comSanatanWeb.com
Notification Show More
Font ResizerAa
  • सनातनज्ञान
    • वेद
    • उपनिषद
    • शास्त्र
      • धर्मशास्त्र
      • कामशास्त्र
      • रसायनशास्त्र
      • संगीतशास्त्र
      • ज्योतिषशास्त्र
      • अर्थशास्त्र
    • पुराण
    • उपपुराण
    • सूत्र
  • गीतकाव्य
    • अष्टकम्
    • आरती
    • स्तोत्र
    • कथाए
    • कवचम्
    • कविताये और प्राथनाए
    • गरबा
    • चालीसा
    • भजन
    • भारत माता
    • मंत्र
    • शाबर मंत्र
    • शतकम्
    • संस्कृत श्लोक अर्थ सहित
    • सूक्तम्
  • आरोग्य
    • आयुर्वेद
    • घरेलू उपचार
    • योग और योगासन
  • ज्योतिष
    • ज्योतिष उपाय
    • राशि चिन्‍ह
    • राशिफल
    • हस्तरेखा
  • त्यौहार
  • धार्मिक पुस्तके
  • प्राचीन मंदिर
  • व्यक्तिपरिचय
  • हिन्दी
    • हिन्दी
    • English
    • ગુજરાતી
Reading: प्रियतम न छिप सकोगे
Share
Font ResizerAa
SanatanWeb.comSanatanWeb.com
  • अस्वीकरण
  • नियम और शर्तें
  • Privacy Policy
Search
  • सनातनज्ञान
    • वेद
    • उपनिषद
    • शास्त्र
    • पुराण
    • उपपुराण
    • सूत्र
  • गीतकाव्य
    • अष्टकम्
    • आरती
    • स्तोत्र
    • कथाए
    • कवचम्
    • कविताये और प्राथनाए
    • गरबा
    • चालीसा
    • भजन
    • भारत माता
    • मंत्र
    • शाबर मंत्र
    • शतकम्
    • संस्कृत श्लोक अर्थ सहित
    • सूक्तम्
  • आरोग्य
    • आयुर्वेद
    • घरेलू उपचार
    • योग और योगासन
  • ज्योतिष
    • ज्योतिष उपाय
    • राशि चिन्‍ह
    • राशिफल
    • हस्तरेखा
  • त्यौहार
  • धार्मिक पुस्तके
  • प्राचीन मंदिर
  • व्यक्तिपरिचय
  • हिन्दी
    • हिन्दी
    • English
    • ગુજરાતી
Follow US
SanatanWeb.com > Blog > गीतकाव्य > भजन > विष्णु भजन > प्रियतम न छिप सकोगे
भजनविष्णु भजन

प्रियतम न छिप सकोगे

Sanatani
Last updated: जनवरी 24, 2026 4:45 अपराह्न
Sanatani
Published: जनवरी 24, 2026
Share
SHARE

प्रियतम न छिप सकोगे

प्रियतम ! न छिप सकोगे, चाहे सो वेष घर लो ।

अब हो चुकी है मुझको, पहचान वह तुम्हारी ।।

हूँदा तुम्हें अभीतक, मंदिर या मस्जिदोंमें ।

पर देख तौ न पाया वह माधुरी पियारी ।।

जिसने बताया जैसे, वैसे ही ढूँदा मैंने ।

भटका, कहीं न दीखे, चैतन्य ! चित्तहारी ।।

बस, बेतरह हराया, आया जो पास मेरे ।

तुमको बता-बताकर, शब्दोंकी मार मारी ॥

पर, देखकर न तुमको, था सोचता यों मनमें ।

है वा नहीं है जगमें सत्ता कहीं तुम्हारी ।।

संदेह जब यों होता, झाँकी-सी सार जाते ।

तिरछी नज़रसे हँसकर, छिपते तुरत बिहारी ! ॥

चिजली-सी दौड़ जाती, सन्-सन् शरीर करता ।

होतीं थीं इन्द्रियाँ सब, प्रखर प्रकाशकारी ।।

तब दीखता था मुझको, फैला प्रकाश सबमें ।

प्राणेश ! बस, तुम्हारा, वह दिव्य मोदकारी ॥

आँधी-सी एक आती, धन-कीर्ति-कामिनीकी ।

सारा प्रकाश ढकता, उस तमसे अंधकारी ।।

आ-आके इस तरह तुम, यों बार-बार जाते ।

मुझको न थी तुम्हारी पहचान पुण्यकारी ॥

आँखोंमें बैठ करके, तुम देखते हो सबको ।

कानोंमें बैठ सुनते तुम शब्द सौख्यकारी ॥

नाकोंसे गंध लेते, रसनासे चालते तुम ।

हो स्पर्श तुम ही करते, लीला विचित्र-कारी ॥

प्राणौमें, चित्त-मनमें, मसिमें, अहंमें, तूमें।

सबमें पसार करके तुम खेलते खिलारी ॥

बेढब नकाबपोशी रक्खी है सीख तुमने ।

अंदर समाके सबके छिपते, अजीब यारी ॥

जिसको दिखाया तुमने परदा हटाके अपना ।

वह रूप-रंग अनोखा, प्रेमोन्मन्त-कारी ॥

फिर भूलता नहीं वह, औ भूल भी न सकता ।

पहचान नित्य होती पारस्परिक तुम्हारी ॥

आँधी कभी न आती, आँखें न चौंधियातीं ।

वह दिव्य दृष्टि पाकर, होता सदा सुखारी ॥

सुख-दुःख, जय-पर। जय, तम-तेज, यश-अयशमें ।

दिखती उसे सभीमें छर्छाच मोहिनी तुम्हारी ॥

फिर देखता वह तुमसे सारा जगत भरा है।

अपनी जरा-सी सत्ता वह देखता, न न्यारी ॥

तुम हो समाये सबमें, वह है समाया तुममें ।

भय-भेद-भ्रांति मिटतो उस एक छनमें सारी ॥

राग गज़ल(Gazal)
रचनाश्री विष्णु चरण वन्दन ( Shree Vishnu Charan Vandan )
भजनश्री विष्णु भजन ( Shree Vishnu Bhajan )
प्रभु तव चरन किमि परिहरौं
स्याम मोरे ढिगतें कबहुँ न जावै – Syam More Dhigaten Kabahun Na Javai
बस गये नैनन माँहि बिहारी
नाचत गौर प्रेम अधीर – Nachat Gaur Prem Adher
नाथ मैं धारोजी थारो
TAGGED:गज़ल ( Gazal )श्री विष्णु चरण वन्दन ( Shree Vishnu Charan Vandan )श्री विष्णु भजन ( Shree Vishnu Bhajan )
Share This Article
Facebook Whatsapp Whatsapp Telegram Email Print
कोई टिप्पणी नहीं

प्रातिक्रिया दे जवाब रद्द करें

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Follow US

Find US on Social Medias
1.8kLike
PinterestPin
1.3kFollow
YoutubeSubscribe
TelegramFollow
WhatsAppFollow

Newsletter

Subscribe to our newsletter to get our newest articles instantly!

Popular News
नवग्रह स्तोत्रसूर्य स्तोत्रस्तोत्र

दिवाकर पंचक स्तोत्रम्

Sanatani
Sanatani
जनवरी 26, 2026
ॐ जय जगदीश हरे आरती
बन्दौं विष्णु विश्वाधार
नारायण कवचम्
बना दो बुद्धिहीन भगवान
- Advertisement -
Ad imageAd image

Categories

About US

SanatanWeb सनातन धर्म, वेदांत और भारतीय संस्कृति का विश्वसनीय मंच है। यहाँ शास्त्रों का सार, पूजा विधि, मंत्र, आध्यात्मिक मार्गदर्शन और परंपराओं से जुड़ी प्रामाणिक जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध कराई जाती है।
सनातानवेब
  • हमारे बारे में
  • हमसे संपर्क करें
क़ानूनी
  • अस्वीकरण
  • नियम और शर्तें
  • Privacy Policy

Subscribe US

Subscribe to our newsletter to get our newest articles instantly!

© 2026 Sanatanweb.com - Proudly made with ♥︎ in india.
sanatanweb-logo Sanatanweb logo
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?