22.3 C
Gujarat
शनिवार, मार्च 7, 2026

पतित नहीं जो होते जगमें कौन पतितपावन कहता – Patit Nahin Jo Hote Jagamen Kaun Patitapaavan Kahata

Post Date:

पतित नहीं जो होते जगमें कौन पतितपावन कहता लीरिक्स

Patit Nahin Jo Hote Jagamen Kaun Patitapaavan Lyrics

पतित नहीं जो होते जगमें, कौन पतितपावन कहता । अधमोंके अस्तित्व बिना अधमोद्धारण कैसे कहता  ॥ १ ॥

होते नहीं पातकी, ‘पातकि-तारण’ तुमको कहता दीन हुए बिन, दीनदयालो ! कौन ? दीनबंधु फिर कहता कौन  ॥ २ ॥

पतित, अधम, पापी, दीनोंको क्योंकर तुम बिसार सकते । जिनसे नाम कमाया तुमने, क्योंकर उन्हें टाल सकते ॥ ३ ॥

चारों गुण मुझमें पूरे, मैं तो विशेष अधिकारी हूँ। नाम बचानेका साधन हूँ। यों भी तो उपकारी हूँ ॥ ४ ॥

इतनेपर भी नाथ ! तुम्हें यदि मेरा स्मरण नहीं होगा। दोष क्षमा हो, इन नामोंका रक्षण फिर क्योंकर होगा ? ॥ ५ ॥

सुन प्रलापयुत पुकार, अब तो करिये नाथ ! शीघ्र उद्धार । नहीं, छोड़िये नामोंको, यों कहनेको होता लाचार ॥ ६ ॥

जिसके कोई नहीं, तुम्हीं उसके रक्षक कहलाते हो। मुझे नाथ अपनानेमें फिर क्यों इतना सकुचाते हो ? ॥ ७ ॥

नाम तुम्हारे चिर सार्थक हैं मेरा दृढ़ विश्वास यही । इसी हेतु, पावन कीजै प्रभु ! मुझे कहींसे आस नहीं ॥ ८॥

चरणोंको दृढ़ पकड़े हूँ, अब नहीं हहूँगा किसी तरह । भले, फेंक दो, नहीं सुहाता अगर पड़ा भी इसी तरह ॥ ९ ॥

पर यह रखना स्मरण नाथ ! जो यों दुतकारोगे हमको । अशरणशरण, अनाथनाथ, प्रभु कौन कहेगा फिर तुमको ॥१०॥

Share post:

Subscribe

Popular

More like this
Related

सरस्वती मां की आरती

सरस्वती मां(Saraswati Mata Aarti) को ज्ञान, संगीत, कला और...

गोकुल अष्टकं

गोकुल अष्टकं - Shri Gokul Ashtakamश्रीमद्गोकुलसर्वस्वं श्रीमद्गोकुलमंडनम् ।श्रीमद्गोकुलदृक्तारा श्रीमद्गोकुलजीवनम्...

अष्टादश शक्तिपीठ स्तोत्रम्

अष्टादश शक्तिपीठ स्तोत्रम्अष्टादश शक्तिपीठ स्तोत्रम् एक अत्यंत पवित्र...

लक्ष्मी शरणागति स्तोत्रम्

लक्ष्मी शरणागति स्तोत्रम्लक्ष्मी शरणागति स्तोत्रम् (Lakshmi Sharanagati Stotram) एक...
error: Content is protected !!