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दुर्गा स्तोत्रस्तोत्र

नव दुर्गा स्तोत्रम्

Sanatani
Last updated: जनवरी 25, 2026 3:37 अपराह्न
Sanatani
Published: जनवरी 25, 2026
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नव दुर्गा स्तोत्रम्

नव दुर्गा स्तोत्रम्(Nava Durga Stotram) देवी के इन नौ रूपों की महिमा का वर्णन करता है। इसमें हर देवी के गुण, उनकी शक्ति, और उनके प्रभाव की चर्चा की गई है। इसका पाठ सुबह या शाम को किया जा सकता है। यह स्तोत्रम् संस्कृत में लिखा गया है और इसे पढ़ने से मानसिक शांति, आध्यात्मिक उन्नति, और बाधाओं से मुक्ति मिलती है।

Contents
  • नव दुर्गा स्तोत्रम्
  • नव दुर्गा स्तोत्रम् के लाभ
  • नव दुर्गा स्तोत्रम्
  • नव दुर्गा स्तोत्रम् के पाठ करने की विधि
  • नव दुर्गा स्तोत्रम् के ऊपर पूछे जाने वाल प्रश्न और उनके उत्तर
    • नव दुर्गा स्तोत्रम् क्या है?
    • नव दुर्गा स्तोत्रम् का पाठ कब करना चाहिए?
    • नव दुर्गा के नौ रूप कौन-कौन से हैं?
    • नव दुर्गा स्तोत्रम् का महत्व क्या है?
    • क्या नव दुर्गा स्तोत्रम् का पाठ किसी विशेष विधि से करना चाहिए?

नव दुर्गा स्तोत्रम् के लाभ

  1. मानसिक तनाव और नकारात्मक ऊर्जा से छुटकारा।
  2. आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच में वृद्धि।
  3. जीवन की कठिनाइयों और चुनौतियों से लड़ने की शक्ति।
  4. आध्यात्मिक उन्नति और मोक्ष की प्राप्ति।
  5. पारिवारिक कल्याण और समृद्धि।

नव दुर्गा स्तोत्रम्

चन्द्रार्धधारकतनूं च वरां चराणां
वाचालवाङ्मयकरां च विभवां विभूषाम्।
विद्याज्ञवन्दितवरां व्रतपर्वपुण्यां
वन्दे शुभां शिवसखीं हिमशैलपुत्रीम्।
ॐ शैलपुत्र्यै नमः।
दोर्भ्यां कमण्डलुसितस्फटिके दधानां
ब्रह्मप्रचारनियुतां सुरसेव्यमानाम्।
वेदेषु वर्णितवरां विकटस्वरूपां
वन्दे हि चोत्तमगुणां श्रुतिवादिनीं ताम्।
ॐ ब्रह्मचारिण्यै नमः।
कोपप्रतापशरमौर्वियुतां पुराणां
चन्द्रप्रकाशसदृशानलभालयुक्ताम्।
वीराभिवाञ्छितसमस्तवरप्रदां तां
वन्दे विशालवसनां श्रुतचन्द्रघण्टाम्।
ॐ चन्द्रघण्टायै नमः।
सत्त्वां सुवर्णवदनां सततं सुतप्तां
यज्ञक्रियासु वरदां वितनूं विवन्द्याम्।
कालां कुशाग्रसमबुद्धिमतीं हिरण्याम्।
वन्दे कुशां कुवलयां गणदेवतां ताम्।
ॐ कूष्माण्डायै नमः।
शम्भोः सुपत्निपरमां स्मृतिवर्णितेशां
देवीं शराग्रदहनां शतसूर्यदीप्ताम्।
ईप्साधिकप्रफलदां परमामृतज्ञां
वन्दे सुशब्दजननीं गुहमातृकां ताम्।
ॐ स्कन्दमात्रे नमः।
कामेश्वरीं कुमुदमालिकमालिनीं तां
कल्पं दिनार्धमितमात्रकदैवताख्याम्।
कात्यायनीं दिविजकन्यकुमारिकां कां
वन्दे तपोधननिभां कतपुत्रिकां ताम्।
ॐ कात्यायन्यै नमः।
कल्याणकर्तृवरदां च सुखार्थदात्रीं
काव्यामृताकलितकालकलाप्रवीणाम्।
पापापनोदनकरां परमस्वरूपां
वन्दे सदा हि सकलां निजकालरात्रिम्।
ॐ कालरात्र्यै नमः।
इन्दीवरेन्द्रवदनामभयां प्रसन्नां
प्राणप्रदां प्रवरपर्वतपुत्रिकां ताम्।
देवीं सुभक्तवरदां परमेड्यमानां
वन्दे प्रियां प्रवदनां पृथुगौरवर्णाम्।
ॐ महागौर्यै नमः।
संवृत्तसंयमधनां स्मितभावदृश्यां
शुद्धां सुरक्तवरभक्तनुतिप्रकामाम्।
सिद्धादिदेववरयोनिभिरर्चितां तां
वन्दे सुरोद्भवकरां समसिद्धिदात्रीम्।
ॐ सिद्धिदात्र्यै नमः।

नव दुर्गा स्तोत्रम् के पाठ करने की विधि

  1. स्वच्छ स्थान पर सुबह स्नान करके बैठें।
  2. नव दुर्गा की मूर्ति या चित्र के सामने दीप जलाएं।
  3. मन में श्रद्धा और विश्वास के साथ स्तोत्र का पाठ करें।
  4. पाठ के अंत में देवी से प्रार्थना करें और उनका आशीर्वाद प्राप्त करें।

नव दुर्गा स्तोत्रम् के ऊपर पूछे जाने वाल प्रश्न और उनके उत्तर

  1. नव दुर्गा स्तोत्रम् क्या है?

    नव दुर्गा स्तोत्रम् एक धार्मिक स्तुति है, जिसमें नव दुर्गा के नौ रूपों की महिमा और उनकी पूजा का महत्व वर्णित है।

  2. नव दुर्गा स्तोत्रम् का पाठ कब करना चाहिए?

    नव दुर्गा स्तोत्रम् का पाठ विशेष रूप से नवरात्रि के दौरान सुबह और शाम को करना शुभ माना जाता है।

  3. नव दुर्गा के नौ रूप कौन-कौन से हैं?

    नव दुर्गा के नौ रूप हैं: शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री।

  4. नव दुर्गा स्तोत्रम् का महत्व क्या है?

    नव दुर्गा स्तोत्रम् का पाठ जीवन में शांति, समृद्धि, और शक्ति प्राप्त करने में सहायक माना जाता है। यह आध्यात्मिक जागृति और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा करता है।

  5. क्या नव दुर्गा स्तोत्रम् का पाठ किसी विशेष विधि से करना चाहिए?

    हां, पाठ करने से पहले पवित्र स्थान पर स्नान करके साफ वस्त्र धारण करें। दीपक जलाएं और नव दुर्गा का ध्यान करते हुए स्तोत्रम् का पाठ करें।u003cbru003eu003cbru003e

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