श्री नृसिंह द्वादशनाम स्तोत्रम्
श्री नृसिंह द्वादशनाम स्तोत्रम्(Narasimha Dwadasa Nama Stotram) भगवान नृसिंह को समर्पित एक महत्वपूर्ण स्तोत्र है। इसे भगवान विष्णु के उग्र और रक्षक स्वरूप नृसिंह की महिमा का वर्णन करने के लिए रचा गया है। यह स्तोत्र उन भक्तों के लिए अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है जो भय, संकट, शत्रुओं, और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा चाहते हैं।
- श्री नृसिंह द्वादशनाम स्तोत्रम्
- श्री नृसिंह द्वादशनाम स्तोत्रम् रचना और महत्व
- श्री नृसिंह द्वादशनाम स्तोत्रम् पाठ विधि
- श्री नृसिंह द्वादशनाम स्तोत्रम् फल और लाभ
- श्री नृसिंह द्वादशनाम स्तोत्रम्
- श्री नृसिंह द्वादशनाम स्तोत्रम् से संबंधित सामान्य पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs for Narasimha Dwadasa Nama Stotram)
- u003cstrongu003eश्री नृसिंह द्वादशनाम स्तोत्रम् क्या है?u003c/strongu003e
- u003cstrongu003eइस स्तोत्र का पाठ कैसे किया जाता है?u003c/strongu003e
- u003cstrongu003eश्री नृसिंह द्वादशनाम स्तोत्रम् के पाठ से क्या लाभ होते हैं?u003c/strongu003e
- u003cstrongu003eक्या यह स्तोत्र किसी विशेष अवसर पर पढ़ा जाता है?u003c/strongu003e
- u003cstrongu003eक्या इस स्तोत्र का उच्चारण कठिन है?u003c/strongu003e
- u003cstrongu003eक्या श्री नृसिंह द्वादशनाम स्तोत्रम् का कोई विशिष्ट समय है पढने के लिए?u003c/strongu003e
- u003cstrongu003eक्या मैं इसे अकेले भी पढ़ सकता हूँ?u003c/strongu003e
- u003cstrongu003eयदि ध्यान करते समय परेशानी हो, तो क्या करना चाहिए?u003c/strongu003e
- u003cstrongu003eश्री नृसिंह द्वादशनाम स्तोत्रम् का महत्व क्या है?u003c/strongu003e
- u003cstrongu003eकौन सी अन्य स्तुति या भजन भगवान नृसिंह को समर्पित हैं?u003c/strongu003e
श्री नृसिंह द्वादशनाम स्तोत्रम् रचना और महत्व
यह स्तोत्र भगवान नृसिंह के बारह नामों को सम्मिलित करता है। प्रत्येक नाम उनके दिव्य गुणों, कृत्यों और स्वरूप को व्यक्त करता है। इन नामों का स्मरण करने से भक्त को आत्मविश्वास, साहस, और भगवान की कृपा प्राप्त होती है।
- नृसिंहः – जो मनुष्यों और सिंह का स्वरूप धारण करते हैं।
- महासिंहः – महान सिंह स्वरूप।
- दिव्यसिंहः – दिव्य सिंह स्वरूप।
- महाबलः – महान शक्ति के स्वामी।
- उग्रसिंहः – उग्र और पराक्रमी।
- महादेवः – देवों के देव।
- स्तंभजः – खंभे से प्रकट होने वाले।
- भीषणः – जो भयावह और रक्षक हैं।
- भवोभवः – सृष्टि और संहार के कारण।
- ज्वालामुखः – जिनका मुख ज्वाला जैसा प्रखर है।
- महाज्वालः – जो महाज्वालास्वरूप हैं।
- करालः – जिनका स्वरूप अति विकराल है।
पद्म पुराण, नारद पुराण, और अन्य धार्मिक ग्रंथों में श्री नृसिंह स्तोत्रों का वर्णन मिलता है। द्वादशनाम स्तोत्र का पाठ सुबह और शाम के समय विशेष फलदायी माना जाता है। यह न केवल मानसिक शांति प्रदान करता है, बल्कि भक्त को नकारात्मक ऊर्जाओं से भी बचाता है।
श्री नृसिंह द्वादशनाम स्तोत्रम् पाठ विधि
- इस स्तोत्र का पाठ प्रातःकाल या सूर्यास्त के समय करें।
- पाठ से पहले भगवान विष्णु और नृसिंह की पूजा करें।
- आसन पर शुद्ध होकर बैठें और मन को एकाग्र करें।
- श्री नृसिंह द्वादशनाम स्तोत्र का उच्चारण श्रद्धा और भक्ति भाव से करें।
श्री नृसिंह द्वादशनाम स्तोत्रम् फल और लाभ
- भय से मुक्ति: भगवान नृसिंह का स्मरण शत्रु भय, भूत-प्रेत बाधा, और दुर्घटनाओं से रक्षा करता है।
- धन और समृद्धि: यह स्तोत्र धन, वैभव और समृद्धि प्रदान करता है।
- संकट निवारण: जीवन के कठिन समय में यह स्तोत्र मानसिक और आध्यात्मिक बल प्रदान करता है।
- शत्रु नाशक: यह शत्रुओं के दुष्प्रभाव से बचाता है और विजय प्राप्त कराता है।
- रोग निवारण: शरीर और मन की बीमारियों से राहत मिलती है।
श्री नृसिंह द्वादशनाम स्तोत्रम्
अस्य श्रीनृसिंह द्वादशनाम स्तोत्रमहामन्त्रस्य
वेदव्यासो भगवान् ऋषिः
अनुष्टुप् छन्दः
लक्ष्मीनृसिंहो देवता
श्रीनृसिंहप्रीत्यर्थे विनियोगः
स्वपक्षपक्षपातेन तद्विपक्षविदारणम्।
नृसिंहमद्भुतं वन्दे परमानन्दविग्रहम्॥
प्रथमं तु महाज्वालो द्वितीयं तूग्रकेसरी।
तृतीयं वज्रदंष्ट्रश्च चतुर्थं तु विशारदः।
पञ्चमं नारसिंहश्च षष्ठः कश्यपमर्दनः।
सप्तमो यातुहन्ता चाष्टमो देववल्लभः।
नवमं प्रह्लादवरदो दशमोऽनन्तहस्तकः।
एकादशो महारुद्रो द्वादशो दारुणस्तथा॥
द्वादशैतानि नामानि नृसिंहस्य महात्मनः।
मन्त्रराजेति विख्यातं सर्वपापविनाशनम्।
क्षयापस्मारकुष्ठादि- तापज्वरनिवारणम्।
राजद्वारे महाघोरे सङ्ग्रामे च जलान्तरे।
गिरिगह्वार आरण्ये व्याघ्रचोरामयादिषु।
रणे च मरणे चैव शर्मदं परमं शुभम्।
शतमावर्तयेद्यस्तु मुच्यते व्याधिबन्धनात्।
आवर्तयेत् सहस्रं तु लभते वाञ्छितं फलम्।
श्री नृसिंह द्वादशनाम स्तोत्रम् से संबंधित सामान्य पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs for Narasimha Dwadasa Nama Stotram)
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u003cstrongu003eश्री नृसिंह द्वादशनाम स्तोत्रम् क्या है?u003c/strongu003e
श्री नृसिंह द्वादशनाम स्तोत्रम् भगवान नृसिंह के बारह नामों का स्तोत्र है, जो उनकी भक्ति एवं महिमा का वर्णन करता है। इसे पाठ करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं
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u003cstrongu003eइस स्तोत्र का पाठ कैसे किया जाता है?u003c/strongu003e
इस स्तोत्र का पाठ करने से पूर्व भक्तों को गायत्री पूजन के साथ भगवान नरसिंह और माता लक्ष्मी का पूजन करना चाहिए। इसके बाद स्तोत्र का पाठ करना आवश्यक है
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u003cstrongu003eश्री नृसिंह द्वादशनाम स्तोत्रम् के पाठ से क्या लाभ होते हैं?u003c/strongu003e
इस स्तोत्र के एक हजार पाठ करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं, और यह भक्तों को संकटों से मुक्त करने में सहायक होता है
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u003cstrongu003eक्या यह स्तोत्र किसी विशेष अवसर पर पढ़ा जाता है?u003c/strongu003e
हाँ, यह स्तोत्र विशेष रूप से नृसिंह जयंती के दिन और अन्य धार्मिक अवसरों पर पढ़ा जाता है
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u003cstrongu003eक्या इस स्तोत्र का उच्चारण कठिन है?u003c/strongu003e
इसका उच्चारण भारत के भक्तों द्वारा भक्ति भाव से किया जाता है, और यदि कोई इसे नियमित रूप से पाठ करता है, तो उच्चारण में कुशलता प्राप्त कर सकता है
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u003cstrongu003eक्या श्री नृसिंह द्वादशनाम स्तोत्रम् का कोई विशिष्ट समय है पढने के लिए?u003c/strongu003e
यह स्तोत्र सुबह या शाम के समय पढ़ने की सलाह दी जाती है, खासकर पूजा के समय
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u003cstrongu003eक्या मैं इसे अकेले भी पढ़ सकता हूँ?u003c/strongu003e
हाँ, कोई भी व्यक्ति इस स्तोत्र को अकेले में भी पढ़ सकता है। यह भक्तिपूर्वक करने पर विशेष फल देता है
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u003cstrongu003eयदि ध्यान करते समय परेशानी हो, तो क्या करना चाहिए?u003c/strongu003e
ध्यान के समय ध्यान को स्थिर करने का प्रयास करें, और यदि परेशानियाँ जारी रही, तो स्वयं को शांत रहने का प्रयास करें या शांति मंत्रों का जप करें
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u003cstrongu003eश्री नृसिंह द्वादशनाम स्तोत्रम् का महत्व क्या है?u003c/strongu003e
यह स्तोत्र भगवान नृसिंह के सभी गुणों और शक्तियों को दर्शाता है, जो भक्तों को बुराई और संकटों से बचाने में मदद करता है
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u003cstrongu003eकौन सी अन्य स्तुति या भजन भगवान नृसिंह को समर्पित हैं?u003c/strongu003e
u0022नरसिंह स्तोत्रu0022 और u0022नरसिंह नमस्कार स्तोत्रम्u0022 भी भगवान नृसिंह को समर्पित भक्ति ग्रंथ हैं, जिन्हें भक्तों द्वारा सुनने और पढ़ने के लिए किया जाता है



