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Reading: ललिता त्रिशती – லலிதா திரிசதி
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SanatanWeb.com > Blog > गीतकाव्य > स्तोत्र > ललिता स्तोत्र > ललिता त्रिशती – லலிதா திரிசதி
ललिता स्तोत्रस्तोत्र

ललिता त्रिशती – லலிதா திரிசதி

Sanatani
Last updated: जनवरी 29, 2026 4:41 अपराह्न
Sanatani
Published: जनवरी 29, 2026
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ललिता त्रिशती – லலிதா திரிசதி

ललिता त्रिशती(Lalita Trishati) देवी ललिता त्रिपुरसुंदरी के 300 नामों का संग्रह है। यह स्तोत्र अद्वैत वेदांत और श्रीविद्या उपासना के अनुयायियों के लिए अत्यधिक पवित्र और पूजनीय है। इसका उल्लेख प्रमुख रूप से ब्रह्मांड पुराण में मिलता है, और यह देवी के सौंदर्य, शक्ति, कृपा और अनुग्रह का वर्णन करता है। ललिता त्रिशती स्तोत्र देवी महात्रिपुरसुंदरी की महिमा का गुणगान है, जो ब्रह्मांड की सृजन, पालन और संहार शक्ति की अभिव्यक्ति हैं। ललिता त्रिशती का उल्लेख ललिता सहस्रनाम के साथ जुड़ा हुआ है। यह देवी ललिता की स्तुति में लिखे गए दो मुख्य ग्रंथों में से एक है। ललिता त्रिशती का वर्णन हयग्रीव और अगस्त्य मुनि के संवाद में हुआ है। जब अगस्त्य मुनि ने हयग्रीव से ज्ञान प्राप्त किया, तब उन्होंने यह स्तोत्र सुना। हयग्रीव ने उन्हें देवी उपासना की गुप्त विधि और महत्व के बारे में बताया।

Contents
  • ललिता त्रिशती – லலிதா திரிசதி
  • श्रीविद्या और ललिता त्रिशती का महत्व
  • स्तोत्र की संरचना
  • ललिता त्रिशती के पाठ के लाभ
  • ललिता त्रिशती का पाठ करने की विधि
  • ललिता त्रिशती – Lalita Trishati – லலிதா திரிசதி
  • ललिता त्रिशती पर पूछे जाने वाले प्रश्न
    • ललिता त्रिशती क्या है?
    • ललिता त्रिशती का पाठ क्यों किया जाता है?
    • ललिता त्रिशती का पाठ कैसे किया जाता है?
    • क्या ललिता त्रिशती का पाठ किसी विशेष समय पर किया जाना चाहिए?
    • क्या ललिता त्रिशती का पाठ करने के लिए किसी गुरु से दीक्षा लेना आवश्यक है?

ललिता त्रिशती की संरचना में प्रत्येक नाम में देवी की महिमा और शक्ति का वर्णन है। इसे श्रीविद्या उपासकों के लिए एक गुप्त और विशेष ग्रंथ माना जाता है।

श्रीविद्या और ललिता त्रिशती का महत्व

श्रीविद्या साधना में ललिता त्रिशती का विशेष स्थान है। इसे साधक के लिए आत्मज्ञान, आध्यात्मिक उन्नति और अंततः मोक्ष प्राप्ति का साधन माना जाता है। श्रीविद्या उपासना का उद्देश्य शरीर, मन और आत्मा को देवी ललिता की कृपा से शुद्ध करना है।

ललिता त्रिशती के नामों में देवी के तीन प्रमुख रूपों को दर्शाया गया है:

  1. सृजन शक्ति (सृष्टि)
  2. पालन शक्ति (स्थिति)
  3. संहार शक्ति (संहार)

स्तोत्र की संरचना

ललिता त्रिशती में कुल 300 नाम हैं, जो 15 खंडों में विभाजित हैं। प्रत्येक खंड में 20 नाम हैं। इन नामों का उच्चारण मंत्रों की तरह किया जाता है, और इन्हें विशेष रूप से साधना या पूजा के दौरान पढ़ा जाता है।

कुछ प्रमुख नाम:

  • श्रीमती (जो समृद्धि की देवी हैं)
  • शिवान्करी (जो शिव के साथ संयुक्त हैं)
  • कामेश्वरी (जो कामना और इच्छाओं को पूर्ण करती हैं)
  • चिद्गगनकुसुमांता (जिनका निवास चिदाकाश में है)

ललिता त्रिशती के पाठ के लाभ

ललिता त्रिशती का नियमित पाठ साधक के लिए कई लाभकारी प्रभाव लाता है, जैसे:

  1. आध्यात्मिक उन्नति: यह साधक को आत्मिक शांति और ज्ञान प्राप्त करने में सहायता करता है।
  2. आर्थिक समृद्धि: देवी की कृपा से जीवन में धन और वैभव का आगमन होता है।
  3. स्वास्थ्य और कल्याण: इसका पाठ मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार करता है।
  4. आंतरिक शुद्धि: यह साधक को नकारात्मकता से मुक्त कर सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है।
  5. संकट निवारण: जीवन के कठिन समय में देवी की कृपा से सभी समस्याएं दूर होती हैं।

ललिता त्रिशती का पाठ करने की विधि

  1. शुद्धता: पाठ से पहले शारीरिक और मानसिक शुद्धता का ध्यान रखें।
  2. संकल्प: पाठ से पहले संकल्प लें और देवी से प्रार्थना करें।
  3. दीप और पुष्प: पूजा स्थान पर दीप जलाएं और देवी को पुष्प अर्पित करें।
  4. त्रिशती का पाठ: पूरे ध्यान और श्रद्धा से पाठ करें।
  5. अर्घ्य और प्रसाद: पाठ के बाद देवी को अर्घ्य दें और प्रसाद ग्रहण करें।

ललिता त्रिशती – Lalita Trishati – லலிதா திரிசதி

अस्य श्रीललितात्रिशतीस्तोत्रनामावलिमहामन्त्रस्य। भगवान् हयग्रीवो ऋषिः।
अनुष्टुप् छन्दः। श्रीललितामहात्रिपुरसुन्दरी देवता।
ऐं बीजम्। सौः शक्तिः। क्लीं कीलकम्।
मम चतुर्विधफलपुरुषार्थसिद्ध्यर्थे परायणे विनियोगः।
ऐं अङ्गुष्ठाभ्यां नमः।
क्लीं तर्जनीभ्यां नमः।
सौः मध्यमाभ्यां नमः।
ऐं अनामिकाभ्यां नमः।
क्लीं कनिष्ठिकाभ्यां नमः।
सौः करतलकरपृष्ठाभ्यां नमः।
ऐं हृदयाय नमः।
क्लीं शिरसे स्वाहा।
सौः शिखायै वषट्।
ऐं कवचाय हुम्।
क्लीं नेत्रत्रयाय वौषट्।
सौः अस्त्राय फट्।
भूर्भुवस्सुवरोमिति दिग्बन्धः।
।ध्यानम्।
अतिमधुरचापहस्तां परिमितामोदसौभाग्याम्।
अरुणामतिशयकरुणामभिनवकुलसुन्दरीं वन्दे।
लं पृथिव्यात्मिकायै श्रीललिताम्बिकायै गन्धं समर्पयामि।
हम् आकाशात्मिकायै श्रीललिताम्बिकायै पुष्पैः पूजयामि।
यं वाय्वात्मिकायै श्रीललिताम्बिकायै कुङ्कुमम् आवाहयामि।
रं वह्यात्मिकायै श्रीललिताम्बिकायै दीपं दर्शयामि।
वम् अमृतात्मिकायै श्रीललिताम्बिकायै अमृतं महानैवेद्यं निवेदयामि।
सं सर्वात्मिकायै श्रीललिताम्बिकायै सर्वोपचारपूजां समर्पयामि।
।अथ श्रीललितात्रिशतीनामावलिः।
ॐ ऐं ह्रीं श्रीम्।
ॐ ककाररूपायै नमः।
ॐ कल्याण्यै नमः।
ॐ कल्याणगुणशालिन्यै नमः।
ॐ कल्याणशैलनिलयायै नमः।
ॐ कमनीयायै नमः।
ॐ कलावत्यै नमः।
ॐ कमलाक्ष्यै नमः।
ॐ कल्मषघ्न्यै नमः।
ॐ करुणामृतसागरायै नमः।
ॐ कदम्बकाननावासायै नमः।
ॐ कदम्बकुसुमप्रियायै नमः।
ॐ कन्दर्पविद्यायै नमः।
ॐ कन्दर्पजनकापाङ्गवीक्षणायै नमः।
ॐ कर्पूरवीटीसौरभ्यकल्लोलितककुप्तटायै नमः।
ॐ कलिदोषहरायै नमः।
ॐ कञ्जलोचनायै नमः।
ॐ कम्रविग्रहायै नमः।
ॐ कर्मादिसाक्षिण्यै नमः।
ॐ कारयित्र्यै नमः।
ॐ कर्मफलप्रदायै नमः।
ॐ एकाररूपायै नमः।
ॐ एकाक्षर्यै नमः।
ॐ एकानेकाक्षराकृत्यै नमः।
ॐ एतत्तदित्यनिर्देश्यायै नमः।
ॐ एकानन्दचिदाकृत्यै नमः।
ॐ एवमित्यागमाबोध्यायै नमः।
ॐ एकभक्तिमदर्चितायै नमः।
ॐ एकाग्रचित्तनिर्ध्यातायै नमः।
ॐ एषणारहितादृतायै नमः।
ॐ एलासुगन्धिचिकुरायै नमः।
ॐ एनःकूटविनाशिन्यै नमः।
ॐ एकभोगायै नमः।
ॐ एकरसायै नमः।
ॐ एकैश्वर्यप्रदायिन्यै नमः।
ॐ एकातपत्रसाम्राज्यप्रदायै नमः।
ॐ एकान्तपूजितायै नमः।
ॐ एधमानप्रभायै नमः।
ॐ एजदनेकजगदीश्वर्यै नमः।
ॐ एकवीरादिसंसेव्यायै नमः।
ॐ एकप्राभवशालिन्यै नमः।
ॐ ईकाररूपायै नमः।
ॐ ईशित्र्यै नमः।
ॐ ईप्सितार्थप्रदायिन्यै नमः।
ॐ ईदृगित्यविनिर्देश्यायै नमः।
ॐ ईश्वरत्वविधायिन्यै नमः।
ॐ ईशानादिब्रह्ममय्यै नमः।
ॐ ईशित्वाद्यष्टसिद्धिदायै नमः।
ॐ ईक्षित्र्यै नमः।
ॐ ईक्षणसृष्टाण्डकोट्यै नमः।
ॐ ईश्वरवल्लभायै नमः।
ॐ ईडितायै नमः।
ॐ ईश्वरार्धाङ्गशरीरायै नमः।
ॐ ईशाधिदेवतायै नमः।
ॐ ईश्वरप्रेरणकर्यै नमः।
ॐ ईशताण्डवसाक्षिण्यै नमः।
ॐ ईश्वरोत्सङ्गनिलयायै नमः।
ॐ ईतिबाधाविनाशिन्यै नमः।
ॐ ईहाविरहितायै नमः।
ॐ ईशशक्त्यै नमः।
ॐ ईषत्स्मिताननायै नमः।
ॐ लकाररूपायै नमः।
ॐ ललितायै नमः।
ॐ लक्ष्मीवाणीनिषेवितायै नमः।
ॐ लाकिन्यै नमः।
ॐ ललनारूपायै नमः।
ॐ लसद्दाडिमपाटलायै नमः।
ॐ ललन्तिकालसत्फालायै नमः।
ॐ ललाटनयनार्चितायै नमः।
ॐ लक्षणोज्ज्वलदिव्याङ्ग्यै नमः।
ॐ लक्षकोट्यण्डनायिकायै नमः।
ॐ लक्ष्यार्थायै नमः।
ॐ लक्षणागम्यायै नमः।
ॐ लब्धकामायै नमः।
ॐ लतातनवे नमः।
ॐ ललामराजदलिकायै नमः।
ॐ लम्बिमुक्तालताञ्चितायै नमः।
ॐ लम्बोदरप्रसवे नमः।
ॐ लभ्यायै नमः।
ॐ लज्जाढ्यायै नमः।
ॐ लयवर्जितायै नमः।
ॐ ह्रीङ्काररूपायै नमः।
ॐ ह्रीङ्कारनिलयायै नमः।
ॐ ह्रींपदप्रियायै नमः।
ॐ ह्रीङ्कारबीजायै नमः।
ॐ ह्रीङ्कारमन्त्रायै नमः।
ॐ ह्रीङ्कारलक्षणायै नमः।
ॐ ह्रीङ्कारजपसुप्रीतायै नमः।
ॐ ह्रींमत्यै नमः।
ॐ ह्रींविभूषणायै नमः।
ॐ ह्रींशीलायै नमः।
ॐ ह्रींपदाराध्यायै नमः।
ॐ ह्रीङ्गर्भायै नमः।
ॐ ह्रींपदाभिधायै नमः।
ॐ ह्रीङ्कारवाच्यायै नमः।
ॐ ह्रीङ्कारपूज्यायै नमः।
ॐ ह्रीङ्कारपीठिकायै नमः।
ॐ ह्रीङ्कारवेद्यायै नमः।
ॐ ह्रीङ्कारचिन्त्यायै नमः।
ॐ ह्रीं नमः।
ॐ ह्रींशरीरिण्यै नमः।
ॐ हकाररूपायै नमः।
ॐ हलधृक्पूजितायै नमः।
ॐ हरिणेक्षणायै नमः।
ॐ हरप्रियायै नमः।
ॐ हराराध्यायै नमः।
ॐ हरिब्रह्मेन्द्रवन्दितायै नमः।
ॐ हयारूढासेविताङ्घ्र्यै नमः।
ॐ हयमेधसमर्चितायै नमः।
ॐ हर्यक्षवाहनायै नमः ।
ॐ हंसवाहनायै नमः।
ॐ हतदानवायै नमः।
ॐ हत्यादिपापशमन्यै नमः।
ॐ हरिदश्वादिसेवितायै नमः।
ॐ हस्तिकुम्भोत्तुङ्गकुचायै नमः।
ॐ हस्तिकृत्तिप्रियाङ्गनायै नमः।
ॐ हरिद्राकुङ्कुमादिग्धायै नमः।
ॐ हर्यश्वाद्यमरार्चितायै नमः।
ॐ हरिकेशसख्यै नमः।
ॐ हादिविद्यायै नमः।
ॐ हालामदोल्लसायै नमः।
ॐ सकाररूपायै नमः।
ॐ सर्वज्ञायै नमः।
ॐ सर्वेश्यै नमः।
ॐ सर्वमङ्गलायै नमः।
ॐ सर्वकर्त्र्यै नमः।
ॐ सर्वभर्त्र्यै नमः।
ॐ सर्वहन्त्र्यै नमः।
ॐ सनातन्यै नमः।
ॐ सर्वानवद्यायै नमः।
ॐ सर्वाङ्गसुन्दर्यै नमः।
ॐ सर्वसाक्षिण्यै नमः।
ॐ सर्वात्मिकायै नमः।
ॐ सर्वसौख्यदात्र्यै नमः।
ॐ सर्वविमोहिन्यै नमः।
ॐ सर्वाधारायै नमः।
ॐ सर्वगतायै नमः।
ॐ सर्वावगुणवर्जितायै नमः।
ॐ सर्वारुणायै नमः।
ॐ सर्वमात्रे नमः।
ॐ सर्वभूषणभूषितायै नमः।
ॐ ककारार्थायै नमः।
ॐ कालहन्त्र्यै नमः।
ॐ कामेश्वर्यै नमः।
ॐ कामितार्थदायै नमः।
ॐ कामसञ्जीविन्यै नमः।
ॐ कल्यायै नमः।
ॐ कठिनस्तनमण्डलायै नमः।
ॐ करभोरवे नमः।
ॐ कलानाथमुख्यै नमः।
ॐ कचजिताम्बुदायै नमः।
ॐ कटाक्षस्यन्दिकरुणायै नमः।
ॐ कपालिप्राणनायिकायै नमः।
ॐ कारुण्यविग्रहायै नमः।
ॐ कान्तायै नमः।
ॐ कान्तिधूतजपावल्यै नमः ।
ॐ कलालापायै नमः ।
ॐ कम्बुकण्ठ्यै नमः ।
ॐ करनिर्जितपल्लवायै नमः।
ॐ कल्पवल्लीसमभुजायै नमः।
ॐ कस्तूरीतिलकाञ्चितायै नमः।
ॐ हकारार्थायै नमः।
ॐ हंसगत्यै नमः।
ॐ हाटकाभरणोज्ज्वलायै नमः।
ॐ हारहारिकुचाभोगायै नमः।
ॐ हाकिन्यै नमः।
ॐ हल्यवर्जितायै नमः।
ॐ हरित्पतिसमाराध्यायै नमः।
ॐ हठात्कारहतासुरायै नमः।
ॐ हर्षप्रदायै नमः।
ॐ हविर्भोक्त्र्यै नमः।
ॐ हार्दसन्तमसापहायै नमः।
ॐ हल्लीसलास्यसन्तुष्टायै नमः।
ॐ हंसमन्त्रार्थरूपिण्यै नमः।
ॐ हानोपादाननिर्मुक्तायै नमः।
ॐ हर्षिण्यै नमः।
ॐ हरिसोदर्यै नमः।
ॐ हाहाहूहूमुखस्तुत्यायै नमः।
ॐ हानिवृद्धिविवर्जितायै नमः।
ॐ हय्यङ्गवीनहृदयायै नमः।
ॐ हरिगोपारुणांशुकायै नमः।
ॐ लकाराख्यायै नमः।
ॐ लतापूज्यायै नमः।
ॐ लयस्थित्युद्भवेश्वर्यै नमः।
ॐ लास्यदर्शनसन्तुष्टायै नमः।
ॐ लाभालाभविवर्जितायै नमः।
ॐ लङ्घ्येतराज्ञायै नमः।
ॐ लावण्यशालिन्यै नमः।
ॐ लघुसिद्धदायै नमः।
ॐ लाक्षारससवर्णाभायै नमः।
ॐ लक्ष्मणाग्रजपूजितायै नमः।
ॐ लभ्येतरायै नमः।
ॐ लब्धभक्तिसुलभायै नमः।
ॐ लाङ्गलायुधायै नमः।
ॐ लग्नचामरहस्तश्रीशारदापरिवीजितायै नमः।
ॐ लज्जापदसमाराध्यायै नमः।
ॐ लम्पटायै नमः।
ॐ लकुलेश्वर्यै नमः।
ॐ लब्धमानायै नमः।
ॐ लब्धरसायै नमः।
ॐ लब्धसम्पत्समुन्नत्यै नमः।
ॐ ह्रीङ्कारिण्यै नमः।
ॐ ह्रीङ्कार्यै नमः।
ॐ ह्रींमध्यायै नमः।
ॐ ह्रींशिखामणये नमः।
ॐ ह्रीङ्कारकुण्डाग्निशिखायै नमः।
ॐ ह्रीङ्कारशशिचन्द्रिकायै नमः।
ॐ ह्रीङ्कारभास्कररुच्यै नमः।
ॐ ह्रीङ्काराम्भोदचञ्चलायै नमः।
ॐ ह्रीङ्कारकन्दाङ्कुरिकायै नमः।
ॐ ह्रीङ्कारैकपरायणायै नमः।
ॐ ह्रीङ्कारदीर्घिकाहंस्यै नमः।
ॐ ह्रीङ्कारोद्यानकेकिन्यै नमः।
ॐ ह्रीङ्कारारण्यहरिण्यै नमः।
ॐ ह्रीङ्कारावालवल्लर्यै नमः।
ॐ ह्रीङ्कारपञ्जरशुक्यै नमः।
ॐ ह्रीङ्काराङ्गणदीपिकायै नमः।
ॐ ह्रीङ्कारकन्दरासिंह्यै नमः।
ॐ ह्रीङ्काराम्भोजभृङ्गिकायै नमः।
ॐ ह्रीङ्कारसुमनोमाध्व्यै नमः।
ॐ ह्रीङ्कारतरुमञ्जर्यै नमः।
ॐ सकाराख्यायै नमः।
ॐ समरसायै नमः।
ॐ सकलागमसंस्तुतायै नमः।
ॐ सर्ववेदान्ततात्पर्यभूम्यै नमः।
ॐ सदसदाश्रयायै नमः।
ॐ सकलायै नमः।
ॐ सच्चिदानन्दायै नमः।
ॐ साध्यायै नमः।
ॐ सद्गतिदायिन्यै नमः।
ॐ सनकादिमुनिध्येयायै नमः।
ॐ सदाशिवकुटुम्बिन्यै नमः।
ॐ सकलाधिष्ठानरूपायै नमः।
ॐ सत्यरूपायै नमः।
ॐ समाकृत्यै नमः।
ॐ सर्वप्रपञ्चनिर्मात्र्यै नमः।
ॐ समानाधिकवर्जितायै नमः।
ॐ सर्वोत्तुङ्गायै नमः।
ॐ सङ्गहीनायै नमः।
ॐ सगुणायै नमः।
ॐ सकलेश्वर्यै नमः।
ॐ ककारिण्यै नमः।
ॐ काव्यलोलायै नमः।
ॐ कामेश्वरमनोहरायै नमः।
ॐ कामेश्वरप्राणनाड्यै नमः।
ॐ कामेशोत्सङ्गवासिन्यै नमः ।
ॐ कामेश्वरालिङ्गिताङ्ग्यै नमः।
ॐ कामेश्वरसुखप्रदायै नमः।
ॐ कामेश्वरप्रणयिन्यै नमः।
ॐ कामेश्वरविलासिन्यै नमः।
ॐ कामेश्वरतपःसिद्ध्यै नमः।
ॐ कामेश्वरमनःप्रियायै नमः ।
ॐ कामेश्वरप्राणनाथायै नमः।
ॐ कामेश्वरविमोहिन्यै नमः।
ॐ कामेश्वरब्रह्मविद्यायै नमः।
ॐ कामेश्वरगृहेश्वर्यै नमः।
ॐ कामेश्वराह्लादकर्यै नमः।
ॐ कामेश्वरमहेश्वर्यै नमः।
ॐ कामेश्वर्यै नमः।
ॐ कामकोटिनिलयायै नमः।
ॐ काङ्क्षितार्थदायै नमः।
ॐ लकारिण्यै नमः।
ॐ लब्धरूपायै नमः।
ॐ लब्धधिये नमः।
ॐ लब्धवाञ्छितायै नमः।
ॐ लब्धपापमनोदूरायै नमः।
ॐ लब्धाहङ्कारदुर्गमायै नमः।
ॐ लब्धशक्त्यै नमः।
ॐ लब्धदेहायै नमः।
ॐ लब्धैश्वर्यसमुन्नत्यै नमः।
ॐ लब्धवृद्धये नमः।
ॐ लब्धलीलायै नमः।
ॐ लब्धयौवनशालिन्यै नमः।
ॐ लब्धातिशयसर्वाङ्गसौन्दर्यायै नमः।
ॐ लब्धविभ्रमायै नमः।
ॐ लब्धरागायै नमः।
ॐ लब्धपत्यै नमः।
ॐ लब्धनानागमस्थित्यै नमः।
ॐ लब्धभोगायै नमः।
ॐ लब्धसुखायै नमः।
ॐ लब्धहर्षाभिपूरितायै नमः।
ॐ ह्रीङ्कारमूर्तये नमः।
ॐ ह्रीङ्कारसौधश‍ृङ्गकपोतिकायै नमः।
ॐ ह्रीङ्कारदुग्धाब्धिसुधायै नमः।
ॐ ह्रीङ्कारकमलेन्दिरायै नमः।
ॐ ह्रीङ्करमणिदीपार्चिषे नमः।
ॐ ह्रीङ्कारतरुशारिकायै नमः।
ॐ ह्रीङ्कारपेटकमणये नमः।
ॐ ह्रीङ्कारादर्शबिम्बितायै नमः।
ॐ ह्रीङ्कारकोशासिलतायै नमः।
ॐ ह्रीङ्कारास्थाननर्तक्यै नमः।
ॐ ह्रीङ्कारशुक्तिकामुक्तामणये नमः।
ॐ ह्रीङ्कारबोधितायै नमः।
ॐ ह्रीङ्कारमयसौवर्णस्तम्भविद्रुमपुत्रिकायै नमः।
ॐ ह्रीङ्कारवेदोपनिषदे नमः।
ॐ ह्रीङ्काराध्वरदक्षिणायै नमः।
ॐ ह्रीङ्कारनन्दनारामनवकल्पकवल्लर्यै नमः।
ॐ ह्रीङ्कारहिमवद्गङ्गायै नमः।
ॐ ह्रीङ्कारार्णवकौस्तुभायै नमः।
ॐ ह्रीङ्कारमन्त्रसर्वस्वायै नमः।
ॐ ह्रीङ्कारपरसौख्यदायै नमः।

ललिता त्रिशती पर पूछे जाने वाले प्रश्न

  1. ललिता त्रिशती क्या है?

    u003cstrongu003eललिता त्रिशतीu003c/strongu003e एक पवित्र हिंदू ग्रंथ है जिसमें देवी ललिता की महिमा और गुणों का वर्णन 300 नामों के माध्यम से किया गया है। यह ग्रंथ मुख्यतः श्रीविद्या परंपरा में पूजा और ध्यान के लिए प्रयोग होता है। इसमें देवी के प्रत्येक नाम के पीछे गहरी आध्यात्मिक और दार्शनिक व्याख्या होती है।

  2. ललिता त्रिशती का पाठ क्यों किया जाता है?

    ललिता त्रिशती का पाठ देवी ललिता की कृपा और आशीर्वाद पाने के लिए किया जाता है। यह पाठ व्यक्ति के जीवन से नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है, मानसिक शांति प्रदान करता है, और आध्यात्मिक उन्नति में सहायता करता है। साथ ही, यह भक्त के मन और आत्मा को शुद्ध करता है।

  3. ललिता त्रिशती का पाठ कैसे किया जाता है?

    ललिता त्रिशती का पाठ शांत और पवित्र स्थान पर किया जाता है। इसे आरंभ करने से पहले देवी ललिता का ध्यान और प्रार्थना की जाती है। पाठ के दौरान प्रत्येक नाम को श्रद्धा और भक्ति से उच्चारित करना चाहिए। श्रीचक्र या देवी की मूर्ति के सामने बैठकर पाठ करना अधिक फलदायी माना जाता है।

  4. क्या ललिता त्रिशती का पाठ किसी विशेष समय पर किया जाना चाहिए?

    ललिता त्रिशती का पाठ किसी भी समय किया जा सकता है, लेकिन ब्रह्ममुहूर्त (सुबह 4 से 6 बजे) या शाम के समय इसे करना विशेष शुभ माना जाता है। नवरात्रि, पूर्णिमा, और शुक्रवार जैसे विशेष दिनों पर पाठ करने से इसका प्रभाव और भी बढ़ जाता है।

  5. क्या ललिता त्रिशती का पाठ करने के लिए किसी गुरु से दीक्षा लेना आवश्यक है?

    आमतौर पर ललिता त्रिशती का पाठ करने के लिए गुरु से दीक्षा लेना आवश्यक नहीं है। हालांकि, यदि आप श्रीविद्या परंपरा का गहन अध्ययन या साधना करना चाहते हैं, तो गुरु का मार्गदर्शन लेना लाभदायक होता है। यह दीक्षा साधक को सही विधि और उच्च आध्यात्मिक स्तर पर ले जाने में सहायता करती है।

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