कृष्ण लहरी स्तोत्रम
कृष्ण लहरी स्तोत्रम(Krishna Lahari Stotram) भगवान श्रीकृष्ण की स्तुति में रचित एक अत्यंत पवित्र और आध्यात्मिक स्तुति है। यह स्तोत्रम अद्वितीय भक्ति और प्रेम का प्रतीक है, जो भगवान श्रीकृष्ण के अद्वितीय स्वरूप, लीलाओं और दिव्य गुणों का वर्णन करता है। इस स्तोत्रम का पाठ भक्तों को मानसिक शांति, आध्यात्मिक शक्ति और जीवन में आनंद प्राप्ति का साधन प्रदान करता है।
कृष्ण लहरी स्तोत्रम की रचना और महत्व
कृष्ण लहरी स्तोत्रम को प्राचीन काल के किसी महर्षि या भक्त कवि ने रचा होगा। इसमें श्रीकृष्ण की महिमा, उनकी लीलाओं, उनके करुणामय स्वभाव और उनके भक्तों के प्रति उनकी अनुकंपा का विस्तृत वर्णन मिलता है। “लहरी” का अर्थ होता है तरंग, और इस स्तोत्रम के माध्यम से भगवान कृष्ण की दिव्य तरंगों को अनुभव किया जा सकता है।
कृष्ण लहरी स्तोत्रम के मुख्य विषय:
- श्रीकृष्ण का स्वरूप:
इस स्तोत्रम में भगवान श्रीकृष्ण के श्यामवर्ण, पीतांबर धारण किए हुए, मुरली बजाते हुए, और उनके मोहक मुखमंडल का सुंदर वर्णन किया गया है। - लीलाओं का वर्णन:
- बाल रूप में उनकी माखन चोरी और गोपियों के साथ की गई लीलाएं।
- गोकुलवासियों की रक्षा के लिए गोवर्धन पर्वत उठाने का प्रसंग।
- रासलीला और भक्तों के प्रति उनकी करुणा।
- भक्ति का महत्व:
कृष्ण लहरी स्तोत्रम में यह दर्शाया गया है कि केवल भक्ति और समर्पण से ही भगवान कृष्ण की कृपा प्राप्त की जा सकती है। - शरणागत वत्सलता:
श्रीकृष्ण को शरणागत वत्सल माना गया है। जो भी भक्त उनके चरणों में समर्पित होता है, उसे वे निश्चय ही सुख, शांति और मोक्ष प्रदान करते हैं।
कृष्ण लहरी स्तोत्रम का लाभ और फल
कृष्ण लहरी स्तोत्रम के पाठ से अनेक आध्यात्मिक और सांसारिक लाभ प्राप्त होते हैं:
- मानसिक शांति और तनावमुक्ति।
- भक्त के जीवन में सकारात्मकता और ऊर्जा का संचार।
- सभी प्रकार की बाधाओं और संकटों का नाश।
- श्रीकृष्ण की कृपा से मोक्ष प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।
कृष्ण लहरी स्तोत्रम के पाठ की विधि
- प्रातःकाल या संध्या समय, स्वच्छ अवस्था में इस स्तोत्रम का पाठ करें।
- पाठ के समय भगवान श्रीकृष्ण के स्वरूप का ध्यान करें।
- यदि संभव हो, तो मुरली और तुलसी अर्पण करें।
कृष्ण लहरी स्तोत्रम
कदा वृन्दारण्ये विपुलयमुनातीरपुलिने
चरन्तं गोविन्दं हलधरसुदामादिसहितम्।
अहो कृष्ण स्वामिन् मधुरमुरलीमोहन विभो
प्रसीदेति क्रोशन्निमिषमिव नेष्यामि दिवसान्।
कदा कालिन्दीयैर्हरिचरणमुद्राङ्किततटैः
स्मरन्गोपीनाथं कमलनयनं सस्मितमुखम्।
अहो पूर्णानन्दाम्बुजवदन भक्तैकललन
प्रसीदेति क्रोशन्निमिषमिव नेष्यामि दिवसान्।
कदाचित्खेलन्तं व्रजपरिसरे गोपतनयैः
कुतश्चित्सम्प्राप्तं किमपि लसितं गोपललनम्।
अये राधे किं वा हरसि रसिके कञ्चुकयुगं
प्रसीदेति क्रोशन्निमिषमिव नेष्यामि दिवसान्।
कदाचिद्गोपीनां हसितचकितस्निग्धनयनं
स्थितं गोपीवृन्दे नटमिव नटन्तं सुललितम्।
सुराधीशैः सर्वैः स्तुतपदमिदं श्रीहरिमिति
प्रसीदेति क्रोशन्निमिषमिव नेष्यामि दिवसान्।
कदाचित्सच्छायाश्रितमभिमहान्तं यदुपतिं
समाधिस्वच्छायाञ्चल इव विलोलैकमकरम्।
अये भक्तोदाराम्बुजवदन नन्दस्य तनय
प्रसीदेति क्रोशन्निमिषमिव नेष्यामि दिवसान्।
कदाचित्कालिन्द्यास्तटतरुकदम्बे स्थितममुं
स्मयन्तं साकूतं हृतवसनगोपीसुतपदम्।
अहो शक्रानन्दाम्बुजवदन गोवर्धनधर
प्रसीदेति क्रोशन्निमिषमिव नेष्यामि दिवसान्।
कदाचित्कान्तारे विजयसखमिष्टं नृपसुतं
वदन्तं पार्थेति नृपसुत सखे बन्धुरिति च।
भ्रमन्तं विश्रान्तं श्रितमुरलिमास्यं हरिममी
प्रसीदेति क्रोशन्निमिषमिव नेष्यामि दिवसान्।
कदा द्रक्ष्ये पूर्णं पुरुषममलं पङ्कजदृशं
अहो विष्णो योगिन् रसिकमुरलीमोहन विभो।
दयां कर्तुं दीने परमकरुणाब्धे समुचितं
प्रसीदेति क्रोशन्निमिषमिव नेष्यामि दिवसान्।
FAQs for Krishna Lahari Stotram
कृष्ण लहरी स्तोत्रम् क्या है?
कृष्ण लहरी स्तोत्रम् एक पवित्र और भक्तिमय स्तुति है जो भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित है। यह स्तोत्रम् उनकी महिमा, लीलाओं और दिव्य गुणों का वर्णन करता है। इसे पढ़ने से भक्तों को मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है।
कृष्ण लहरी स्तोत्रम् का पाठ कब और कैसे करना चाहिए?
कृष्ण लहरी स्तोत्रम् का पाठ प्रातःकाल या सायंकाल में शुद्ध मन और शांत वातावरण में करना शुभ माना जाता है। इसे पढ़ते समय ध्यान और श्रद्धा का होना बहुत महत्वपूर्ण है। भक्त पूजा के दौरान दीप जलाकर और भगवान कृष्ण की मूर्ति या तस्वीर के सामने पाठ कर सकते हैं।
कृष्ण लहरी स्तोत्रम् का पाठ करने से क्या लाभ होता है?
इस स्तोत्रम् का पाठ करने से भक्तों को मानसिक शांति, आत्मविश्वास, और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। यह भगवान श्रीकृष्ण की कृपा प्राप्त करने और जीवन के कष्टों से मुक्ति पाने में सहायक है। यह आध्यात्मिक जागृति और भक्ति की गहराई को बढ़ाने में भी मदद करता है।
कृष्ण लहरी स्तोत्रम् की रचना किसने की है?
कृष्ण लहरी स्तोत्रम् की रचना महान संत और भक्त कवि श्रीमद आदि शंकराचार्य ने की थी। उन्होंने इसे भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति और महिमा का वर्णन करने के लिए लिखा था।
क्या कृष्ण लहरी स्तोत्रम् केवल संस्कृत भाषा में ही उपलब्ध है?
कृष्ण लहरी स्तोत्रम् मूल रूप से संस्कृत में लिखा गया है, लेकिन इसे विभिन्न भाषाओं में अनुवादित किया गया है। आज यह हिंदी, अंग्रेजी, तेलुगु, तमिल और अन्य भाषाओं में भी उपलब्ध है, जिससे हर भाषा के भक्त इसे समझ और गा सकते हैं।u003cbru003eu003cbru003e



