38.6 C
Gujarat
रविवार, मार्च 8, 2026

हे दयामय दीनबन्धो दीनको अपनाइये – He Dayamay Dinabandho Dinako Apanaiye

Post Date:

हे दयामय दीनबन्धो दीनको अपनाइये – He Dayamay Dinabandho Dinako Apanaiye

हे दयामय ! दीनबन्धो !! दीनको अपनाइये ।

डूबता बेड़ा मेरा मझधार पार लँधाइये ॥

नाथ ! तुम तो पतितपावन, मैं पतित सबसे बड़ा ।

कीजिये पावन मुझे, मैं शरणमें हूँ आ पड़ा ।।

तुम गरीबनिवाज हो, यों जगत साख कह रहा ।

मैं गरीब अनाथ दुःख-प्रवाहमें नित बह रहा ।।

इस गरीबीसे छुड़ाकर कीजिये मुझको सनाथ ।

तुम सरीखे नाथ पा, फिर क्यों कहाऊँ मैं अनाथ ।।

हो तृषित आकुल अमित प्रभु! चाहता जो बूँद नीर ।

तुम तृषाहारी अनोखे उसे देते सुधा-क्षीर ।।

यह तुम्हारी अमित महिमा सत्य सारी है प्रभो ! ।

किस लिये मैं रहा बंचित फिर अभीतक हे बिभो ! ।।

अब नहीं ऐसा उचित, प्रभु ! कृपा मुझपर कीजिये ।

पापका बन्धन छुड़ा नित-शान्ति मुझको दीजिये ।।

Share post:

Subscribe

Popular

More like this
Related

सरस्वती मां की आरती

सरस्वती मां(Saraswati Mata Aarti) को ज्ञान, संगीत, कला और...

गोकुल अष्टकं

गोकुल अष्टकं - Shri Gokul Ashtakamश्रीमद्गोकुलसर्वस्वं श्रीमद्गोकुलमंडनम् ।श्रीमद्गोकुलदृक्तारा श्रीमद्गोकुलजीवनम्...

अष्टादश शक्तिपीठ स्तोत्रम्

अष्टादश शक्तिपीठ स्तोत्रम्अष्टादश शक्तिपीठ स्तोत्रम् एक अत्यंत पवित्र...

लक्ष्मी शरणागति स्तोत्रम्

लक्ष्मी शरणागति स्तोत्रम्लक्ष्मी शरणागति स्तोत्रम् (Lakshmi Sharanagati Stotram) एक...
error: Content is protected !!