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भजनविष्णु भजन

हरि को हरि जन अतिहि पियारे

Sanatani
Last updated: जनवरी 24, 2026 2:23 अपराह्न
Sanatani
Published: जनवरी 24, 2026
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हरि को हरि जन अतिहि पियारे – Hariko Hari Jan Atihi Piyaare

हरिको हरि जन अतिहि पियारे ।

हरि हरि-जनतें भेद न राखें, अपने सम करि डारें ।।

जाति-पाँति, कुल-धाम, घरम-धन, नहि कछु बात विचारें।

जेहि मन हरि-पद-प्रेम अद्वैतुक, तेहि ढिग नेम बिसारें ।।

व्याध, निषाद, अजामिल, गनिका, केते अधम उधारे।

करि खग-बानर-भालु-निसाचर, प्रेम-बिवस, सब तारे ।।

परस्ति प्रेम, हिय हरखि राम मिलनीके भवन पधारे।

बारहि बार खात जूठे फल, रहे सराहत हारे ।।

विदुर-घरनि सुधि बिसरी तनकी, स्याम जवहिं पगु ध. रे।

कदली-फलके छिलका खाये, प्रेममगन मन भारे ।।

रे मन ! ऐसे परम प्रेममय हरिको मत बिसरा रे ।

प्रभुके पद-सरोज-रस चाखन, तू मधुकर बनि जा रे ।।

इधर उधर क्यों भटक रहा मन
अच्युतम केशवं कृष्ण दामोदरं
और सब भूल भलेही श्रीहरिनाम न भूल
स्याम मोरे ढिगतें कबहुँ न जावै – Syam More Dhigaten Kabahun Na Javai
प्रभु तुम अपनो बिरद सँभारो
TAGGED:राग सारंग ( Raag Saarang )श्री विष्णु चरण वन्दन ( Shree Vishnu Charan Vandan )श्री विष्णु भजन ( Shree Vishnu Bhajan )
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