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मंगलवार, फ़रवरी 10, 2026

शारदा स्तोत्रम्

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Sharada Stotram In Hindi

शारदा स्तोत्रम्(Sharada Stotram) एक प्राचीन हिंदू भक्ति गीत है जो देवी शारदा की पूजा और उनके प्रति भक्ति को व्यक्त करने के लिए रचा गया है। देवी शारदा, जिन्हें ज्ञान और विद्या की देवी माना जाता है, वे ब्रह्मा, विष्णु और महेश्वरी के समान महत्वपूर्ण हैं। शारदा स्तोत्रम् विशेष रूप से उनके शिष्यगणों द्वारा देवी से विद्या, बुद्धि, और कल्याण की प्राप्ति हेतु किया जाता है।

शारदा स्तोत्रम् का महत्व Sharada Stotram Importance

  1. देवी शारदा का वंदन: शारदा स्तोत्रम् में देवी शारदा की महिमा का वर्णन किया गया है। देवी शारदा को ज्ञान, विद्या, संगीत, और कला की देवी माना जाता है। यह स्तोत्र उन्हें प्रसन्न करने के लिए और उनसे ज्ञान की प्राप्ति के लिए किया जाता है।
  2. शुद्धता और पवित्रता की देवी: देवी शारदा का स्वरूप अत्यंत पवित्र और शुद्ध माना जाता है। इस स्तोत्र में उनकी दिव्यता और शक्ति का गुणगान किया जाता है। यह स्तोत्र उन भक्तों के लिए है जो देवी से आध्यात्मिक उन्नति और मानसिक शांति की कामना करते हैं।
  3. विद्या की देवी: शारदा स्तोत्रम् का पाठ विशेष रूप से विद्यार्थियों और शिक्षा में रुचि रखने वालों द्वारा किया जाता है, क्योंकि देवी शारदा विद्या और ज्ञान की देवी हैं। उनके आशीर्वाद से विद्या और बुद्धि में वृद्ध‍ि होती है।
  4. साधना और साधक: यह स्तोत्र साधक के लिए एक प्रकार की साधना है, जो अपनी मानसिक शांति और बौद्धिक शक्ति को बढ़ाने के लिए इस स्तोत्र का पाठ करता है। शारदा स्तोत्रम् का नियमित जाप करने से आत्मविश्वास बढ़ता है और बुरे समय में आशीर्वाद की प्राप्ति होती है।

शारदा स्तोत्रम् का शास्त्रीय स्थान

शारदा स्तोत्रम् को संस्कृत में लिखा गया है और यह अधिकांशतः शास्त्रों में विद्यमान है। यह स्तोत्र विशेष रूप से कश्मीरी शैव संप्रदाय में बहुत प्रसिद्ध है, जहां इसे दिनचर्या का हिस्सा माना जाता है। इसका जाप करने से मनुष्य को जीवन में सफलता, सुख और समृद्धि की प्राप्ति होती है।

शारदा स्तोत्रम् का पाठ Sharada Stotram

नमस्ते शारदे देवि काश्मीरपुरवासिनि।
त्वामहं प्रार्थये नित्यं विद्यादानं च दहि मे।
या श्रद्धा धारणा मेधा वाग्देवी विधिवल्लभा।
भक्तजिह्वाग्रसदना शमादिगुणदायिनी।
नमामि यामिनीं नाथलेखालङ्कृतकुन्तलाम्।
भवानीं भवसन्तापनिर्वापणसुधानदीम्।
भद्रकाल्यै नमो नित्यं सरस्वत्यै नमो नमः।
वेदवेदाङ्गवेदान्तविद्यास्थानेभ्य एव च।
ब्रह्मस्वरूपा परमा ज्योतिरूपा सनातनी।
सर्वविद्याधिदेवी या तस्यै वाण्यै नमो नमः।
यया विना जगत् सर्वं शश्वज्जीवन्मृतं भवेत्।
ज्ञानाधिदेवी या तस्यै सरस्वत्यै नमो नमः।
यया विना जगत् सर्वं मूकमुन्मत्तवत् सदा।
या देवी वागधिष्ठात्री तस्यै वाण्यै नमो नमः।

शारदा स्तोत्रम् न केवल एक भक्ति गीत है, बल्कि यह जीवन में सफलता, ज्ञान, और शांति प्राप्त करने का मार्ग भी है। इस स्तोत्र के माध्यम से देवी शारदा से आशीर्वाद प्राप्त किया जा सकता है, जिससे जीवन में कठिनाइयों का सामना करना आसान हो जाता है और व्यक्तित्व में सुधार होता है।

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