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बुधवार, फ़रवरी 11, 2026

द्वादशज्योतिर्लिङ्गानि

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द्वादशज्योतिर्लिङ्गानि   Dwasdash Jyotirlingani

सौराष्ट्रे सोमनाथं च श्रीशैले मल्लिकार्जुनम्‌।
उज्जयिन्यां महाकाल्मोङ्कारमसलेश्वरम्‌॥ १ ॥

सौराषट्रप्रदेश (काठियावाड़) में श्रीसोमनाथ,’ श्रीशैलपरः
श्रीमल्लिकार्जुन, उज्जयिनी (उज्जैन) में श्रीमहाकाळरे,
ॐकारेधर* अथवा अमलेश्वर॥ १॥

परल्यां वैद्यनाथं च डाकिन्यां भीमशङ्करम्‌।
सेतुबन्धे तु रामेशं नागेश दारुकावने ॥ २॥

परलीमें वैद्यनाथ”,
डाकिनी नामक स्थानमें श्रीभीमशङ्कर’, सेतुबन्धपर
श्रीरामेश्वर, दारुकावनमें श्रीनागेश्वरः॥ २॥

बाराणस्यां तु विश्वेशं त्र्यम्बकं गौतमीतटे ।
हिमालये तु केदारं घुइमेशं च शिवालये ॥ ३॥

वाराणसी (काझी) में श्रीकिश्चताथ), गौतमी (गोदावरी) के तटपर श्रीत्र्यम्बकेश्वर, * हिमाल्यपर केदारखण्डमें श्रीकेदारनाथ और शिवाल्यमें श्ी्ुरमेश्वसको’ ‘ स्मरण करे॥ ३॥

एतानि ज्योतिर्लिङ्गानि सायं प्रातः पठेन्नरः ।
सप्तजन्मकृतं पापं स्मरणेन विनश्यति॥ ४ ॥

जो मनुष्य प्रतिदिन प्रातःकाल और सन्ध्याके समय इन बारह ज्योतिर्लिङ्गोंका नाम लेता है, उसके सात जन्मोंका किया हुआ पाप इन लिङ्गोकि स्मरणमात्रसे मिट जाता है ॥ ४ ॥

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