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SanatanWeb.com > Blog > गीतकाव्य > भजन > कृष्ण भजन > दृग तुम चपलता तजि देहु
कृष्ण भजनभजन

दृग तुम चपलता तजि देहु

Sanatani
Last updated: जनवरी 22, 2026 7:37 अपराह्न
Sanatani
Published: जनवरी 22, 2026
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दृग तुम चपलता तजि देहु – राग हंसधुन – ताल रूपक

दृग तुम चपलता तजि देहु ।

गुंजरहु चरनारबिन्दनि, होय मधुप सनेहु ॥

दसहुँ दिसि जित तित फिरहु, किन सकल जगरस लेहु ।

पै न मिलिहै अमित सुख कहुँ, जो मिले या गेहु ||

गहों प्रीति प्रतीत दृढ़ ज्यों, रटत चातक मेहु ।

बनो चारु चकोर पियमुख, चंद्र छबि रस एहू ।।

 

Contents
  • दृग तुम चपलता तजि देहु – राग हंसधुन – ताल रूपक
  • Drg Tum Chapalata Taji Dehu – Raag Hansadhun – Taal Roopak

Drg Tum Chapalata Taji Dehu – Raag Hansadhun – Taal Roopak

Drg Tum Chapalata Taji Dehu .

Gunjarahu Charanaarabindani, Hoy Madhup Sanehu .

Dasahun Disi Jit Tit Phirahu, Kin Sakal Jagaras Lehu .

Pai Na Milihai Amit Sukh Kahun, Jo Mile Ya Gehu ||

Gahon Preeti Prateet Drdh Jyon, Ratat Chaatak Mehu .

Bano Chaaru Chakor Piyamukh, Chandr Chhabi Ras Ehoo ..

हरि अवतरे कारागार
बन्दौं विष्णु विश्वाधार
सुन्यो तेरो पतितपावन नाम
दीनबन्धो कृपासिन्धो कृपाबिन्दू दो प्रभो
नाचत गौर प्रेम अधीर – Nachat Gaur Prem Adher
TAGGED:ताल रूपक ( Taal Roopak )युगलप्रियाजी ( Yugalpriya ji )राग तिलंग ( Raag Tilang )
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