36.9 C
Gujarat
शनिवार, मार्च 7, 2026

देख निज नित्य निकेतन द्वार

Post Date:

Dekh Nij Nity Niketan Dvaar

देख निज नित्य निकेतन द्वार ।

भूला निज निर्मल स्वरूपको, भूला कुल-व्यवहार ।

फूला, फसा फिर रहा संतत, सहता जग-फटकार ।।

पर-पुर, पर-घरमें प्रवेश कर, पाला पर-परिवार ।

पड़ा पाँच चोरोंके पल्ले, लुटा, हुआ लाचार ।।

अब भी चेत, ग्रहणकर सत्पथ, तज माया-आगार ।

उज्ज्वल प्रेम-प्रकाश साथ ले, चल निज गृह सुखसार ।।

शम-दमादिसे तुरत निघनकर काम-क्रोध बटमार ।

सेवन कर पुनीत सत-संगति पथशाला श्रमहार ।।

श्रीहरिनाम शमन-भय-नाशक निर्भय नित्य पुकार ।

पातकपुंज नाश हों सुनकर ‘हरि-हरि-हरि’ हुंकार ।।

आश्रय कर शरणागतवत्सल प्रभु-पद-कमल उदार !

निज घर पहुँच, नित्य चिन्मय बन, भूमानंद अपार ।।

Share post:

Subscribe

Popular

More like this
Related

सरस्वती मां की आरती

सरस्वती मां(Saraswati Mata Aarti) को ज्ञान, संगीत, कला और...

गोकुल अष्टकं

गोकुल अष्टकं - Shri Gokul Ashtakamश्रीमद्गोकुलसर्वस्वं श्रीमद्गोकुलमंडनम् ।श्रीमद्गोकुलदृक्तारा श्रीमद्गोकुलजीवनम्...

अष्टादश शक्तिपीठ स्तोत्रम्

अष्टादश शक्तिपीठ स्तोत्रम्अष्टादश शक्तिपीठ स्तोत्रम् एक अत्यंत पवित्र...

लक्ष्मी शरणागति स्तोत्रम्

लक्ष्मी शरणागति स्तोत्रम्लक्ष्मी शरणागति स्तोत्रम् (Lakshmi Sharanagati Stotram) एक...
error: Content is protected !!