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SanatanWeb.com > Blog > गीतकाव्य > भजन > विष्णु भजन > चाहता जो परम सुख तू जाप कर हरिनाम का
भजनविष्णु भजन

चाहता जो परम सुख तू जाप कर हरिनाम का

Sanatani
Last updated: जनवरी 24, 2026 2:04 अपराह्न
Sanatani
Published: जनवरी 24, 2026
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चाहता जो परम सुख तू जाप कर हरिनामका – Chaahata Jo Param Sukh Too Jaap Kar Harinaamaka

चाहता जो परम सुख तू, जाप कर हरिनामका ।

परम पावन, परम सुंदर, परम मंगलधामका ।।

लिया जिसने है कभी हरिनाम भय-भ्रम-भूलसे ।

तर गया, वह भी तुरत, बन्धन कटे जड़-मूलसे ||

हैं सभी पातक पुराने घास सूत्रेके समान ।

भस्म करनेको उन्हें हरिनाम है पावक महान ||

सूर्य उगते हो अँधेरा नाश होता है यथा ।

सभी अघ हैं नष्ट होते नामकी स्मृतिसे तथा ॥

जाप करते जो चतुर नर सावधानीसे सदा ।

वे न बँधते भूलकर यमपाश दारुणमें कदा ॥

बात करते, काम करते, बैठते-उठते समय ।

राह चलते नाम लेते विचरते हैं के अभय ॥

साथ मिलकर प्रेमसे हरिनाम करते गान जो ।

मुक्त होते मोहसे कर प्रेम-अमृत पान सो ॥

छोड मन तू मेरा मेरा अंतमें कोई नहीं तेरा – Chhod Man Too Mera Mera Antamen Koee Nahin Tera
कर मन हरिको ध्यान राम गुन गाइये
जागह ब्रजराज लाल मोर मुकुटबारे
अरे द्वारपालों कन्हैया से कह दो भजन लिरिक्स
दृग तुम चपलता तजि देहु
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