अरे माता बहनो – Are Mata Behno
तर्ज : अरे द्वारपालो …
अरे माता बहनो इतना बतादो
मंदिर में श्रृंगार भला किस लिए है
अगर मिलनी ही है मिट्ठी में ये काया
काया से इतना प्यार भला किस लिए है
किसने क्या है पहना किसने क्या है ओड़ा
उधर ध्यान ज़्यादा पूजा में थोड़ा
अगर देखनी ही है औरों की सूरत
तो मंदिर में मूरत भला किस लिए है
देखो ये लिपस्टिक ,सोने की पायल
हज़ारो की साडी, मगर सस्ते चावल
इन्हें चाहिए गर सब कुछ ही महँगा
तो मंदिर के चावल अलग किस लिए है
सास ने क्या बोला,बहु ने क्या बोला
सारा भेद मंदिर में जाकर के खोला
सति सीता मैना अंजना की न जाने
अक्षरा आनंदी और दया की ही माने
अगर टीवी ही है आदर्श हमारा
तो गुरुवार के प्रवचन भला किस लिए है

