महालक्ष्मी स्तुति(Mahalakshmi Stuti) देवी लक्ष्मी की महिमा का गुणगान करने वाला एक महत्वपूर्ण स्तोत्र है। यह स्तुति भक्तों द्वारा उनकी कृपा प्राप्त करने और जीवन में सुख, शांति, धन-समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति के लिए की जाती है। इस स्तुति में देवी लक्ष्मी की विभिन्न दिव्य गुणों और स्वरूपों का वर्णन किया गया है।
महालक्ष्मी स्तुति का पाठ उनके अद्वितीय तेज, सौंदर्य और कृपा का स्मरण करते हुए उन्हें प्रणाम करता है। इसमें उनकी कृपा से मिलने वाले वरदानों, जैसे धन, ऐश्वर्य, सफलता, पापों का विनाश, और शत्रुओं पर विजय का उल्लेख है। स्तुति में महालक्ष्मी को सर्वगुण संपन्न, पवित्र, अद्वितीय और अनंत बताया गया है।
महालक्ष्मी स्तुति Mahalakshmi Stuti
महालक्ष्मीमहं भजे ।
देवदैत्यनुतविभवां वरदां महालक्ष्मीमहं भजे ।
सर्वरत्नधनवसुदां सुखदां महालक्ष्मीमहं भजे ।
सर्वसिद्धगणविजयां जयदां महालक्ष्मीमहं भजे ।
सर्वदुष्टजनदमनीं नयदां महालक्ष्मीमहं भजे ।
सर्वपापहरवरदां सुभगां महालक्ष्मीमहं भजे ।
आदिमध्यान्तरहितां विरलां महालक्ष्मीमहं भजे ।
महालक्ष्मीमहं भजे ।
काव्यकीर्तिगुणकलितां कमलां महालक्ष्मीमहं भजे ।
दिव्यनागवरवरणां विमलां महालक्ष्मीमहं भजे ।
सौम्यलोकमतिसुचरां सरलां महालक्ष्मीमहं भजे ।
सिद्धिबुद्धिसमफलदां सकलां महालक्ष्मीमहं भजे ।
सूर्यदीप्तिसमसुषमां सुरमां महालक्ष्मीमहं भजे ।
सर्वदेशगतशरणां शिवदां महालक्ष्मीमहं भजे ।
महालक्ष्मीमहं भजे ।
महालक्ष्मी स्तुति प्रमुख अंशों का भावार्थ
- “देवदैत्यनुतविभवां वरदां महालक्ष्मीमहं भजे।”
देवी लक्ष्मी को देवताओं और असुरों द्वारा नमन किया जाता है। वह भक्तों को वरदान देने वाली हैं। - “सर्वरत्नधनवसुदां सुखदां महालक्ष्मीमहं भजे।”
वह समस्त रत्नों, धन और समृद्धि की दात्री हैं। उनके आशीर्वाद से सुख और शांति प्राप्त होती है। - “सर्वसिद्धगणविजयां जयदां महालक्ष्मीमहं भजे।”
वह सभी सिद्धियों की अधिष्ठात्री देवी हैं और विजय प्रदान करती हैं। - “सर्वपापहरवरदां सुभगां महालक्ष्मीमहं भजे।”
देवी सभी पापों को हरने वाली और सौभाग्य प्रदान करने वाली हैं। - “आदिमध्यान्तरहितां विरलां महालक्ष्मीमहं भजे।”
वह अनादि, अनंत और अद्वितीय हैं। उनका कोई आरंभ, मध्य या अंत नहीं है। - “सिद्धिबुद्धिसमफलदां सकलां महालक्ष्मीमहं भजे।”
वह बुद्धि, सिद्धि और फलदायिनी हैं। उनके आशीर्वाद से सभी प्रकार की उपलब्धियाँ प्राप्त होती हैं। - “सूर्यदीप्तिसमसुषमां सुरमां महालक्ष्मीमहं भजे।”
देवी का तेज सूर्य के समान है। उनका स्वरूप दिव्य और सौम्य है।
महालक्ष्मी स्तुति का महत्व Mahalakshmi Stuti Importance
- धन-समृद्धि का आशीर्वाद: महालक्ष्मी की उपासना से घर में धन और समृद्धि आती है।
- सुख और शांति: यह स्तुति मानसिक शांति प्रदान करती है और जीवन में सकारात्मकता लाती है।
- पापों का नाश: महालक्ष्मी की कृपा से सभी पापों का विनाश होता है।
- सफलता और विजय: स्तुति में देवी को विजयदायिनी कहा गया है। वह हर क्षेत्र में सफलता का आशीर्वाद देती हैं।
स्तुति का पाठ कैसे करें
- प्रातःकाल स्नानादि के बाद पवित्र स्थान पर दीप जलाकर इस स्तुति का पाठ करें।
- शुद्ध मन और श्रद्धा के साथ इसे पढ़ें।
- पाठ के बाद देवी को पुष्प, मिष्ठान्न और जल अर्पित करें।
महालक्ष्मी स्तुति का पाठ न केवल धन और समृद्धि के लिए किया जाता है, बल्कि यह आत्मिक शांति, शुभता और आध्यात्मिक प्रगति के लिए भी अत्यंत प्रभावी है।
महालक्ष्मी स्तुति से जुड़े 5 अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न और उनके उत्तर
महालक्ष्मी स्तुति का उद्देश्य क्या है?
महालक्ष्मी स्तुति का उद्देश्य देवी लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करना और समृद्धि, सुख, और शांति का आह्वान करना है।
महालक्ष्मी स्तुति का पाठ कब किया जाना चाहिए?
महालक्ष्मी स्तुति का पाठ शुक्रवार, दीपावली, या शुभ मुहूर्त में करना सबसे उत्तम माना जाता है।
महालक्ष्मी स्तुति का पाठ कैसे शुरू करना चाहिए?
पाठ शुरू करने से पहले स्वच्छ वस्त्र धारण करें, पूजा स्थान की सफाई करें, और दीप जलाकर देवी लक्ष्मी का ध्यान करें।
महालक्ष्मी स्तुति में किस प्रकार की प्रार्थना की जाती है?
इस स्तुति में देवी लक्ष्मी की स्तुति, उनकी कृपा की प्रार्थना, और जीवन में धन-धान्य व समृद्धि की याचना की जाती है।
महालक्ष्मी स्तुति का पाठ करने से क्या लाभ होते हैं?
इस स्तुति के पाठ से आर्थिक स्थिरता, समृद्धि, और घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।