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गुरूवार, जनवरी 29, 2026

गणेश मन्त्र स्तोत्रम्

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मुद्गलपुराणोक्तं गणेशमन्त्रस्तोत्रं(Ganesha Mantra Stotram) हिंदू धर्म के प्रमुख ग्रंथों में से एक है, जिसे मुद्गल पुराण में वर्णित किया गया है। मुद्गल पुराण गणेशजी के संबंध में महत्वपूर्ण पुराण माना जाता है, जिसमें गणेशजी की महिमा, उनके जीवन चरित्र और उनकी पूजा के लिए विभिन्न मंत्रों और स्तोत्रों का उल्लेख है। यह स्तोत्र गणेश भक्तों के बीच अत्यंत लोकप्रिय है, क्योंकि इसे गणेशजी की कृपा और आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए अत्यधिक प्रभावी माना जाता है।

मुद्गल पुराण का परिचय:

मुद्गल पुराण गणेश पुराणों में से एक है, जिसमें विशेष रूप से भगवान गणेश की आराधना, उनके अवतार, उनकी लीलाएं और उनकी भक्ति का वर्णन है। इसमें भगवान गणेश के आठ प्रमुख रूपों (अष्टविनायक) का विस्तार से वर्णन मिलता है। इन आठ रूपों में उनके विभिन्न कार्य और दिव्य शक्तियों का उल्लेख है, जिन्हें ध्यान में रखते हुए भिन्न-भिन्न मंत्र और स्तोत्रों का पाठ किया जाता है।

गणेशमन्त्रस्तोत्र का महत्व:

गणेशमन्त्रस्तोत्र का पाठ गणेशजी की आराधना का एक महत्वपूर्ण साधन है। इसका नियमित रूप से पाठ करने से साधक को विघ्नों से मुक्ति, समृद्धि, ज्ञान और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। इस स्तोत्र में भगवान गणेश के विभिन्न रूपों का गुणगान किया गया है, जिससे भक्तों को उनके सभी अवतारों की महिमा का बोध होता है।

गणेशमन्त्रस्तोत्र का पाठ विधि:

गणेशमन्त्रस्तोत्र का पाठ करने से पहले साधक को शुद्धता और शांत वातावरण का ध्यान रखना चाहिए। निम्नलिखित विधि से इस स्तोत्र का पाठ किया जाता है:

  1. स्नान एवं शुद्धता: पाठ करने से पहले स्नान कर लें और साफ वस्त्र धारण करें। पवित्रता का ध्यान रखना अत्यंत आवश्यक है।
  2. ध्यान एवं ध्यान मुद्रा: किसी शांत स्थान पर बैठें, गणेशजी का ध्यान करें, और ध्यान मुद्रा में इस स्तोत्र का उच्चारण करें।
  3. मंत्र जप: गणेशमन्त्रस्तोत्र के प्रत्येक मंत्र का शांत मन से ध्यानपूर्वक जप करें।
  4. आरती एवं प्रसाद: पाठ के अंत में गणेशजी की आरती करें और भगवान को प्रसाद अर्पित करें।

गणेश मन्त्र स्तोत्रम् के लाभ:

गणेशमन्त्रस्तोत्र का नियमित रूप से पाठ करने से साधक को निम्नलिखित लाभ प्राप्त होते हैं:

  1. विघ्न नाश: यह स्तोत्र गणेशजी की कृपा से सभी विघ्नों और बाधाओं को दूर करने के लिए अत्यधिक प्रभावी है।
  2. बुद्धि और विवेक: गणेशजी को बुद्धि के देवता माना जाता है। इस स्तोत्र के जप से बुद्धि, विवेक और ज्ञान की प्राप्ति होती है।
  3. सौभाग्य: यह स्तोत्र साधक को सौभाग्य प्रदान करता है, जिससे उसकी सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।
  4. धन और समृद्धि: गणेशजी को धन और समृद्धि का देवता भी माना जाता है। इस स्तोत्र के पाठ से आर्थिक उन्नति और संपन्नता की प्राप्ति होती है।
  5. सुख और शांति: गणेशमन्त्रस्तोत्र का नियमित पाठ करने से साधक को मानसिक शांति और जीवन में सुख की प्राप्ति होती है।

गणेश मन्त्र स्तोत्रम् Ganesha Mantra Stotram

श्रृणु पुत्र महाभाग योगशान्तिप्रदायकम् ।
येन त्वं सर्वयोगङ्य़ो ब्रह्मभूतो भविष्यसि  ॥१॥

चित्तं पञ्चविधं प्रोक्तं क्षिप्तं मूढं महामते ।
विक्षिप्तं च तथैकाग्रं निरोधं भूमिसङ्य़कम् ॥२॥

तत्र प्रकाशकर्ताऽसौ चिन्तामणिहृदि स्थितः  ।
साक्षाद्योगेश योगेङ्य़ैर्लभ्यते भूमिनाशनात् ॥३॥

चित्तरूपा स्वयंबुद्धिश्चित्तभ्रान्तिकरी मता ।
सिद्धिर्माया गणेशस्य मायाखेलक उच्यते ॥४॥

अतो गणेशमन्त्रेण गणेशं भज पुत्रक ।
तेन त्वं ब्रह्मभूतस्तं शन्तियोगमवापस्यसि ॥५॥

इत्युक्त्वा गणराजस्य ददौ मन्त्रं तथारुणिः ।
एकाक्षरं स्वपुत्राय ध्यनादिभ्यः सुसंयुतम् ॥६॥

तेन तं साधयति स्म गणेशं सर्वसिद्धिदम् ।
क्रमेण शान्तिमापन्नो योगिवन्द्योऽभवत्ततः ॥७॥

इति मुद्गलपुराणोक्तं गणेशमन्त्रस्तोत्रं समाप्तम् ।

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