31 C
Gujarat
सोमवार, मार्च 9, 2026

स्याम तव मूरति हृदय समानी | Syam Tav Murti Hriday Samani

Post Date:

स्याम तव मूरति हृदय समानी

Syam Tav Murti Hriday Samani

स्याम तव मूरति हृदय समानी ।

अंग-अंग व्यापी, रग-रग राँची, रोम-रोम उरझानी ||

जित देखौं तित तू ही दीखत, दृष्टि कहा बौरानो ।

स्रवन सुनत नित ही बंसी-धुनि, देह रही लपटानी ।।

स्याम-अंग सुचि सौरभ मीठी, नासा तेहि रति मानी ।

जिभ्या सरस मनोहर मधुमय, हरि-जूठन रस-स्वानी ।।

ऊधौ कहत संदेस तिहारो, हमहिं बनावत ग्यानी ।

कहु थल जहाँ ग्यानकों राखें, कहा मसखरी ठानी ।।

निकसत नाहिं हृदयतें हमरे बैठ्यो रहत लुकानी ।

ऊषौ ! स्याम न छाड़त हमकों, करत सदा मनमानी ।।

Share post:

Subscribe

Popular

More like this
Related

सरस्वती मां की आरती

सरस्वती मां(Saraswati Mata Aarti) को ज्ञान, संगीत, कला और...

गोकुल अष्टकं

गोकुल अष्टकं - Shri Gokul Ashtakamश्रीमद्गोकुलसर्वस्वं श्रीमद्गोकुलमंडनम् ।श्रीमद्गोकुलदृक्तारा श्रीमद्गोकुलजीवनम्...

अष्टादश शक्तिपीठ स्तोत्रम्

अष्टादश शक्तिपीठ स्तोत्रम्अष्टादश शक्तिपीठ स्तोत्रम् एक अत्यंत पवित्र...

लक्ष्मी शरणागति स्तोत्रम्

लक्ष्मी शरणागति स्तोत्रम्लक्ष्मी शरणागति स्तोत्रम् (Lakshmi Sharanagati Stotram) एक...
error: Content is protected !!