32.8 C
Gujarat
रविवार, मार्च 8, 2026

अरे मन नू कछु सोच बिचार Are Man Noo Kachhu Soch Bichaar 

Post Date:

अरे मन नू कछु सोच बिचार

Are Man Noo Kachhu Soch Bichaar

अरे मन, नू कछु सोच-बिचार । झूठो जग साँचों करि मान्यो, भूल्यो फिरत गँवार ।।

मृग जिमि भूल्यो देखि असत जल, मरु धरनी बिस्तार । सुन्याकास तिरवरा दीखत, मिथ्या नेत्र विकार ||

रसरी देखि सरप जिमि मान्यो, भयबस रह्यो पुकार । सीप माहिं ज्यों भयो रौप्य-भ्रम, तिमि मिथ्या संसार ।।

स्वप्न-दृश्य साँचे करि मानत, नहिं कछु तिनमहँ सार । तिमि यह जग मिथ्या ही भासत, प्रकृति-जनित खिलवार ।।

जो यातें उद्धार चहै तो, हरिमय जगत निहार । मायापतिकी सरन गहे तें, होवे तब निस्तार ।।

Share post:

Subscribe

Popular

More like this
Related

सरस्वती मां की आरती

सरस्वती मां(Saraswati Mata Aarti) को ज्ञान, संगीत, कला और...

गोकुल अष्टकं

गोकुल अष्टकं - Shri Gokul Ashtakamश्रीमद्गोकुलसर्वस्वं श्रीमद्गोकुलमंडनम् ।श्रीमद्गोकुलदृक्तारा श्रीमद्गोकुलजीवनम्...

अष्टादश शक्तिपीठ स्तोत्रम्

अष्टादश शक्तिपीठ स्तोत्रम्अष्टादश शक्तिपीठ स्तोत्रम् एक अत्यंत पवित्र...

लक्ष्मी शरणागति स्तोत्रम्

लक्ष्मी शरणागति स्तोत्रम्लक्ष्मी शरणागति स्तोत्रम् (Lakshmi Sharanagati Stotram) एक...
error: Content is protected !!