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शनिवार, मार्च 7, 2026

सूर्य ग्रह मंत्र

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सूर्य ग्रह मंत्र – Surya Mantra

सूर्य ग्रह (☀️) वैदिक ज्योतिष, भारतीय दर्शन और खगोलशास्त्र तीनों में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रखता है। यह न केवल सौरमंडल का केंद्र बिंदु है, बल्कि ज्योतिषीय दृष्टि से इसे आत्मा, पिता, तेज, अधिकार, स्वास्थ्य और आत्मबल का प्रतीक माना गया है।

surya dev

सूर्य ग्रह की ज्योतिषीय जानकारी

सामान्य गुण

विशेषताविवरण
प्रकृतिक्रूर, पुरुष ग्रह
तत्व (तत्त्व)अग्नि
राशि स्वामित्वसिंह (Leo)
उच्च राशिमेष (Aries) में उच्च (10° पर)
नीच राशितुला (Libra) में नीच (10° पर)
मित्र ग्रहचंद्र, मंगल, बृहस्पति
शत्रु ग्रहशुक्र, शनि
तटस्थ ग्रहबुध
वर्णक्षत्रिय
दिशापूर्व
दिनरविवार
रत्नमाणिक्य (Ruby)

ज्योतिष में सूर्य का प्रभाव

सूर्य को आत्मा, पिता, आत्मविश्वास, सत्ता, राजकीय सेवा, नेतृत्व, यश, प्रतिष्ठा आदि का कारक माना गया है। जन्मकुंडली में सूर्य की स्थिति के अनुसार व्यक्ति के जीवन में निम्न बातें प्रभावित होती हैं:

शुभ सूर्य के प्रभाव:

  • नेतृत्व क्षमता
  • समाज में सम्मान
  • उच्च पद, राजकीय सहयोग
  • आत्मबल व आत्मविश्वास
  • ओजस्वी व प्रभावशाली व्यक्तित्व

अशुभ सूर्य के प्रभाव:

  • पिता से मतभेद या हानि
  • अधिकारहीनता
  • स्वास्थ्य समस्याएँ (हृदय, आंख, अस्थमा)
  • अहंकार, क्रोध, आत्मकेंद्रित स्वभाव

सूर्य ग्रह के मंत्र

सूर्य ग्रह मन्त्र विनियोग

ॐ अस्य सूर्यमंत्रस्य भृगुऋषि:, गायत्री छन्द:, दिवाकरो देवता, ह्री बीजम्, श्री शक्ति दृष्टा–दृष्टफलसिद्धये जपे विनियोगः।

विनियोग के बाद गुरु का ध्यान.

भावस्यद्रत्नाढ्यमौलि: स्फुरदधररुचारज्जितश्चारुकेशी।
भास्वान्योदिव्यतेजा करकमलयुत: स्वनर्णवणर्न प्रभाभि:॥
विश्वाकाशावकाशो ग्रहगणसहितो भाति यश्चोदयाद्रौ।
सवर्वानन्दप्रदाता हरिहरनमितपातु  मां व्विश्वचक्षु:॥

गुरु ध्यान करने के बाद में साधक एक बार पुन: ‘सूर्य यंत्र’ का पूजन करे और पूर्ण आस्था के साथ स्फटिक माला से या लाल मूंगा माला से सूर्य गायत्री मंत्र एवं सूर्य सात्विक मंत्र की एक-एक माला का मंत्र जप करें.

बीज मंत्र

ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः


यह सूर्य का बीज मंत्र है। इसका नियमित जाप आत्मबल, नेत्रज्योति, और उच्च पद प्राप्ति में सहायक होता है।

सूर्य गायत्री मंत्र

॥ आदित्याय विह्महे प्रभाकराय धीमहि तत्र: सूर्य: प्रचोद्यात॥

सूर्य सात्विक मंत्र

॥ ॐ घृणि: सूर्याय नम्: ॥

सूर्य तांत्रोक मंत्र की नित्य 23 माला 11 दिन तक जाप करे।

सूर्य तांत्रोक्त मंत्र

॥  ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौ स: सूर्याय नम्: ॥

सूर्य स्तोत्र

प्रातः स्मरामि खलु तत्सवितुर्वरेण्यं रूपं हि मण्डलमृचोऽथ तनुर्यजुंषि।
सामानि यस्य किरणा: प्रभवादिहेतुं ब्रह्माहरात्मकमलक्ष्यचिन्त्यरूपम् ॥1॥

प्रातर्नमामि तरणिं तनुवाङमनोभि र्ब्रहोन्द्र पूर्वक सुरैर्नतमर्चितं च।
र्वष्टि प्रमोचन विनिग्रह हेतुभूतं त्रैलोक्य पालनपरं त्रिगुणात्मकं च् ॥2॥

प्रातर्भजामि सवितारमनन्तशक्तिं पापौघशत्रुभयरोगहरं परं चं।
तं सर्वलोककनाकात्मककालमूर्ति गोकण्ठबंधन विमोचनमादिदेवम् ॥3॥

ॐ चित्रं देवानामुदगादनीकं चक्षुर्मित्रस्य वरुणस्याग्ने:।
आप्रा घावाप्रथिवी अंतरिक्षं सूर्य आत्मा जगतस्तस्थुषश्रच ॥4॥

सूर्यो देवीमुषसं रोचमानां मत्यर्यो न योषामभ्येति पश्र्चात्।
यत्रा नरो देवयन्तो युगानि वितन्वते प्रति भद्राय भद्रम ॥5॥

श्लोकत्रयमिदं भानो: प्रात: काले पठेतु य: ।
स सर्वव्याधिनिर्मुक्त: पर सुखमवाप्नुयात् ॥6॥

सूर्य को प्रसन्न करने के उपाय

  1. रविवार का व्रत रखें, नमक त्यागें, और सूर्योदय से पहले स्नान कर सूर्य को जल अर्पण करें।
  2. ताम्र पात्र (तांबे के लोटे) से सूर्य को जल चढ़ाएँ, उसमें लाल पुष्प, अक्षत और रोली डालें।
  3. माणिक्य रत्न सोने या तांबे की अंगूठी में रविवार को धारण करें (कुंडली के अनुसार)।
  4. पिता की सेवा करें, उनके प्रति श्रद्धा रखें।
  5. सूर्य नमस्कार और आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ लाभकारी होता है।
  6. अग्निहोत्र, अन्नदान, गौसेवा आदि पुण्यकर्म करने से सूर्य की कृपा बढ़ती है।

सूर्य से संबंधित पौराणिक कथाएँ

  • सूर्य देव को भगवान विष्णु का स्वरूप माना जाता है।
  • भगवान राम ने लंका विजय से पूर्व ‘आदित्य हृदय स्तोत्र’ का पाठ किया था।
  • सूर्यदेव का विवाह संज्ञा (संग्या) से हुआ जिनसे यमराज, यमुनाजी और तद पश्चात छाया से शनिदेव उत्पन्न हुए।
  • सूर्य की उपासना से राजयोग, रोगमुक्ति और तेजस्विता की प्राप्ति होती है।

सूर्य ग्रह ज्योतिष में आत्मा का प्रतिनिधित्व करता है। यह जीवन का मूल स्रोत, चेतना, सम्मान और अधिकार का कारक है। इसका संतुलन जीवन में स्थिरता और आत्म-विश्वास प्रदान करता है। सूर्य के प्रति समर्पित उपासना और मंत्र जप से व्यक्ति की मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक शक्ति का विकास होता है।

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